दिल्ली में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की 16वीं बैठक में कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला कि जो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को भी चौंका देगा क्योंकि इस बैठक में एनएसए अजीत डोबाल ने जो कूटनी दांव चले उन्होंने पूरा खेल ही पलट कर रख दिया। भारत को लेकर चीन के ऐसे सुर बदल गए कि सब देखते रह गए। आपको बताऊंगा कि बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री बांगई ने भारत के लिए ऐसी क्या बात बोल दी कि आने वाले दिनों में बहुत कुछ हो सकता है।
भले ही दुश्मनों का प्रवक्ता बनने वाले गिद्ध गैंग को यह बात हजम नहीं हो कि पिछले कुछ सालों में भारत ने हर क्षेत्र में जो इतिहास रचे हैं उससे दुनिया में एक धाक शमी है। और यह बात सच है कि दुनिया में कोई भी बड़ा मुद्दा हो उसमें भारत की प्रतिक्रिया बहुत मायने रखती है।
आज दुनिया भारत को इस नजर से देखती है कि भारत ही ऐसा देश है जो असंभव को संभव कर सकता है और खुद को समझने वाले देशों को सबक भी सिखा सकता है। इसलिए जो चीन भारत को आंख दिखाने की कोशिशें करता रहा है। आज वह भी भारत के आगे नतमस्तक दिखाई दे रहा है। इस बार तो चीन ने भारत के लिए बहुत बड़ी बात बोल दी है और इसके पीछे एनएसए अजीत डोबाल की कूटनीति के असर को माना जा रहा है। दरअसल ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे चीन के विदेश मंत्री ने एनएसए अजीत डोबाल से मुलाकात की। बैठक में दोनों पक्षों ने भारत चीन संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की। मुलाकात के बाद चीन ने यह स्वीकार किया कि भारत और चीन एक दूसरे के प्रतिद्वंदी या दुश्मन नहीं बल्कि अहम पार्टनर हैं।
दोनों देशों के बीच बनी ये रणनीति सहमति इस बात का पुख्ता संकेत है कि गलवान संघर्ष के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचे द्विपक्षीय संबंध अब तेजी से सुधार और बहाली की पटरी पर लौट आए हैं। चीनी विदेश मंत्री वांगी ने बैठक के बाद बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी के संयुक्त मार्गदर्शन में चीन भारत संबंध एक बेहद नित्य स्तर से उभरकर अब सुधार और रिकवरी की पटरी पर लौट आया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच यह स्पष्ट सहमति बन चुकी है कि चीन और भारत प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि भागीदार हैं। वांगी ने यह भी बताया कि सीमा पर स्थिति अब शांतिपूर्ण बनी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि चीन भारत को ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में पूरा समर्थन देता है। दरअसल भारत चीन सीमा विवाद सिर्फ दो पड़ोसी देशों का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे एशिया वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करता है। दोनों देश दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं। अगर सीमा पर शांति बनी रही तो दोनों देश व्यापार निवेश और क्षेत्रीय स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
पिछले सालों में भारत ने अपनी सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सड़कों, पुलों और सैन्य तैनाती को तेज किया है। चीन भी अपनी तरफ बुनियादी ढांचा मजबूत कर रहा है। लेकिन अब दोनों पक्ष समझ चुके हैं कि सैन्य टकराव से दोनों को नुकसान ही होगा। ब्रिक्स जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ने से कूटनीतिक स्तर पर माहौल बेहतर हुआ है।
चीन भी जानता है कि दिखाने वाले अमेरिका जैसे देश हर स्तर पर लड़ने के लिए भारत को साथ लेकर चलना पड़ेगा। इसीलिए भारत को लेकर चीन के तेवर बदल रहे हैं। हालांकि भारत भी चीन के रगरग से वाकिफ है। भारत अपने हिसाब से ही चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।