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Vrindavan केसी घाट नाव हादसा: 10 मौत, 5 लापता

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यह वृंदावन की तस्वीर है। वृंदावन में नाव डूब जाती है। नाव डूबने से 10 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। और नाव डूबने से कुछ मिनट पहले ये जो श्रद्धालु हैं वो राधे-राधे का जाप कर रहे थे। भगवान का [संगीत] जाप कर रहे थे और कई श्रद्धालु जो है भजन कीर्तन कर रहे थे। सब में बहुत ज्यादा उत्साह था और आप साफ यह वीडियो देख सकते हैं कि कैसे उत्साह से भरे लोग हैं और सब में एक ही भाव है भक्ति भाव और सब भजन कर रहे हैं भक्ति कर रहे हैं लेकिन इन्हें नहीं पता था कि कुछ ही मिनट बाद इनके नाव की टक्कर [संगीत] होने वाली है

और इस टक्कर में वो नाव पलट जाएगी और कुछ लोग अपनी जान से हाथ जोड़ देंगे और ये तस्वीर देखिए पूरी तस्वीर देखिए एक बार ये वीडियो देखिए राराधे अब ये जब टक्कर हुई टक्कर होने के बाद नाव पलट गई तो पास में पुल का काम चल रहा था। वहां कुछ मजदूर थे और कुछ मजदूरों ने बिना सोचे समझे छलांग लगा दी और लोगों को बचाने का काम शुरू कर दिया। यह तस्वीर देखिए कैसे जो आसपास के लोग हैं वो रेस्क्यू कर कर लोगों को बाहर निकाले क्योंकि उसमें से ज्यादातर लोग जो थे उन्हें [संगीत] तैराकी नहीं आती थी। तैरना नहीं आता था

और किसी के पास भी लाइफ जैकेट नहीं था। अब ये जो नाव चलाते हैं इनको ज्यादा पैसे कमाने की आदत हो गई है। तो यह पहले तो ओवर कैपेसिटी के मतलब नाव की कैपेसिटी 10 लोगों की होगी तो 30 लोगों को बिठा लेंगे और सेफ्टी के नाम पे जीरो कुछ नाव की हालत खराब है। मैं खुद गया हूं वृंदावन और मैंने देखा है कि मुझे खुद लाइफ जैकेट वहां उन्होंने ऑफर नहीं किया था ना दिया था लाइफ जैकेट और उस समय मेरी भी गलती थी। मैंने पूछा नहीं था कि आप बिना लाइफ जैकेट के कैसे चला रहे हो और प्रशासन के नाम पे वहां कोई अधिकारी कोई कुछ था नहीं।

नाव जो नाविक हैं वहां चलाने वाले हैं वो वहीं के लोकल रहने वाले हैं तो उनकी रोजी रोटी है। हम मैं मान सकता हूं कि हर किसी की रोजी रोटी है। लेकिन आप किसी की जान से खिलवाड़ नहीं करोगे। स्टैंडर्ड मेंटेन है। डीएम की तरफ से आर्डर है कि वहां लाइव जैकेट के बिना कोई भी नाव [संगीत] जो है अंदर नहीं लेकर जा सकता। लेकिन कोई देखरेख करने वाला नहीं है। ऑर्डर तो निकल जाता है कि ऑर्डर है इस ऑर्डर को फॉलो करने वाला है। लेकिन उसको अमल में लाने वाला कोई नहीं है। और यही हालत है। ऐसा नहीं है कि वृंदावन कोई ऐसी जगह है जहां लोगों की नजर नहीं है। वहां तमाम मीडिया गण वहां तमाम ब्यूरोक्रेट्स, आईएएस, आईपीएस, ऑफिसर, जजेस हर कोई आता है वृंदावन में दर्शन करने के लिए बांके बिहारी के। और उसके बाद हर कोई यमुना तट पर भी जाता है कि यमुना मां के दर्शन कर ले, नदी में जाकर थोड़ा सैर कर ले, घूम आए। और अक्सर लोगों के ज़हन में ये सवाल नहीं उठता कि यहां सिक्योर यहां तो कोई है ही नहीं।

सिक्योरिटी के नाम पर कुछ भी नहीं है। लोग डूब जाए तो रेस्क्यू करने के लिए कोई टीम नहीं है। अब इन सब चीजों के बीच में 10 लोगों की मौत हो गई। जिम्मेदारी किसकी बनती थी? गलती किसकी है? इस वीडियो में डिस्कस करेंगे। शुरुआत से लेकर अंत तक एक ही परिवार के सात लोग मारे गए। उनकी क्या गलती थी? वो नाविक तो फरार हो गया लेकिन 6 घंटे बाद उस नाविक को अरेस्ट कर लिया गया। देखिए ये जो पूरे श्रद्धालु थे इसमें टोटल 37 नंबर बताया जा रहा है। 37 जो पूरे श्रद्धालु थे इन्होंने एक प्राइवेट नाव की स्टीमर की और स्टीमर वालों से बातचीत की। दो तीन स्टीमर वाले थे उनसे बातचीत की। फिर एक स्टीमर डन हुआ और उस स्टीमर में बैठ के ये यमुना के सफर पर निकल गए।

अब बताया जा रहा है इसी स्टीमर पर एक ही फैमिली के सात लोग थे। मतलब ये पूरे जो 37 लोग थे उसमें अब भजन कीर्तन शुरू हो गया और बढ़िया से लोग गाना बजाना कर रहे थे। सब कुछ सही चल रहा था और धीरे-धीरे जो नाव है आगे बढ़ रही थी। अब बताया जा रहा है कि केसी घाट है। केसी घाट जो है बांके बिहारी टेंपल से 2 कि.मी. ही दूर है। अब केसी घाट से ये पूरा जो जितने लोग थे ये सब नाव पे नाव पे सवार होकर आगे बढ़ने लगे। तो अब ये हादसा हुआ कैसे? तो देखिए ये जो पूरा ग्रुप था ये ग्रुप तो लुधियाना से आया हुआ था और दो बस भरकर लोग आए थे। कम से कम 150 से ज्यादा लोग थे और अलग-अलग ग्रुप अलग-अलग नाव पर बैठकर आगे जा रहे थे सफर करने। अब ऐसे में ये जो भी पूरा ग्रुप था 37 लोगों का ये एक नाव पे सवार होता है और तट से 50 फीट दूर जाता है। जब तट से 50 फीट दूर जाता है गाना बजाना सब कुछ चल रहा था। भजन कीर्तन चल रहा था। इस बीच हवा जो है वो तेज हो जाती है। अब वो जो नाविक है वो अपने नाव को संभाल नहीं पा रहा है। पहले से ओवरवेट है। ओवरवेट है ना किसी के पास लाइफ जैकेट है। अब इतने में लोग कह रहे थे कि रोक दो रोक दो रोक दो साइड में रोक दो कहीं साइड में रोक दो। पुल के पास रोक दो। लेकिन वो नाविक जो है वो सुन नहीं रहा था। वो हैंडल करने की कोशिश कर रहा था। इस बीच जो हादसे की जगह है बताया जा रहा है वहां एक लोहे का ब्रिज है और उस ब्रिज की मरम्मत चल रही थी। उस ब्रिज के पास जाकर उस ब्रिज के जो पिलर है उससे लड़ गया। लड़ने के बाद तुरंत जो है वो नाव पलट गई। नाव पलट गई तो आधे से ज्यादा लोग जो थे किसी को भी तैरना नहीं आता था। सब डूबने लगे। नाविक जो है वहां से फरार हो गया। जो आसपास जो ब्रिज की मरम्मत कर रहे थे लेबर वो कूद गए। वो बचाने लगे। ये तस्वीर तभी की है रेस्क्यू करते टाइम और सबने रेस्क्यू करने लगे। अब इस बीच जो रेस्क्यू दल है 10 घंटे तक पूरा जो है वो रेस्क्यू ऑपरेशन चला। अभी तक रेस्क्यू ऑपरेशन चल ही रहा है क्योंकि कुछ लोग अभी भी लापता है। पांच से ज्यादा लोग लापता है। कुछ लोग घायल अवस्था में जिनको अस्पताल में भर्ती कराया गया और 10 नंबर बताया जा रहा है। 10 लोग अभी मौत के घाट उतर चुके हैं। मतलब सोचिए 10 लोगों की मौत हो चुकी है। अब ऐसे में ये लोग थे कौन? कहां से आए थे? अब ये पूरा जो ग्रुप था ये लुधियाना से 9 अप्रैल को निकला था। और ये श्री बांके बिहारी क्लब है। उनके ग्रुप का नाम है।

ये लोग दो बसेस में भर के 130 से ज्यादा श्रद्धालु थे। अब यह लोग वृंदावन चार दिन के स्टे पर थे और यह वृंदावन एक्सप्लोर करने वाले थे। चार दिन वृंदावन में रुककर अलग-अलग मंदिरों में जाकर दर्शन अलग-अलग जगहों पर जाकर विजिट करने वाले थे। अब ऐसे में इनका आज का प्लान मतलब कल का प्लान था कि ये कल जो है दर्शन करने के बाद यमुना नदी के तट पर जाएंगे और जो तट है और नदी है नदी के इलाकों में घूमेंगे और नदी में जाएंगे, सैर करेंगे। और इसी बीच भक्ति भाव और भक्ति वाले पूरे मन से ये लोग जो है पहुंचे थे यमुना के तट पर। अब इसके बाद उन्हें भी नहीं ज्ञात था कि वो जिस स्टीमर पे बैठ रहे हैं उसकी कंडीशन खराब है और जो नाविक है वो तो सबसे पहले भाग गया और भागने के बाद उसे लगा कि वो बच जाएगा लेकिन पुलिस ने 6 घंटे बाद उसे हिरासत में ले लिया और उसे अरेस्ट कर लिया गया और उससे पूछताछ की जा रही है। आमतौर पर लाइफ जैकेट कुछ नाविक देते हैं और कई बार जो खुद लोग भी

हैं वो भी डिसिप्लिन नहीं होते। वो भी जैकेट देने के बाद भी नहीं पहनते और कई जगह तो जैकेट नहीं दिया जाता और यहां तो जैकेट दिया ही नहीं था जो नाविक है उसने जैकेट दिया नहीं था और प्रशासन के लोग क्या कर रहे थे वहां मॉनिटर के लिए कोई नहीं है कि कोई एक अधिकारी नियुक्त कर दिया जाए इतनी इतना हाई क्राउडेड एरिया है मतलब वृंदावन में आप जब जाइए तब भीड़ होती है। अब ऐसे जगह पर इतनी भीड़ है और ऐसे में कोई मॉनिटर करने के लिए कोई अधिकारी नहीं। कोई नहीं तट पर एक अधिकारी नहीं जो देखे कि ये जो जितने भी नाव है जिनको परमिशंस मिली है या परमिशन मिली भी नहीं है अपने मन से चला रहे जो लोकल गांव वाले ऐसे में हम बोलते हैं कि ये टूरिज्म की सबसे बेस्ट जगह है मतलब मथुरा वृंदावन इतना फेमस है कि उसके कॉरिडोर को लेकर भी बातचीत चल रही है कि वहां कॉरिडोर बनाया जा रहा है उसको भी लेकर जो लोकल लोग हैं विरोध कर चुके हैं। अब ऐसे में अगर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति देखी जाए तो वहां तो कोई नहीं था। मतलब कोई देखने के लिए नहीं था। कोई जांच करने के लिए नहीं था। डीएम की तरफ से अगर सिर्फ रूल बुक बना दी जाए कि यह रूल है, यह रूल का पालन करना है। लेकिन वहां उसको पालन कराने के लिए कोई नहीं है। कोई मौजूद नहीं है। किसी का डर नहीं है। जो नाविक के अपने मन के हिसाब से कितने लोगों को भी बिठा रहे हैं। 10 लोगों की कैपेसिटी है तो 20 लोगों को बिठाया जा रहा है। एक बार सुनते हैं जो वहां के डीआईजी हैं शैलेश पांडे।

उन्होंने इस पर क्या कुछ कहा? एक बार उनकी बात सुनते हैं। देखिए लगभग सवा 3 बजे यह बंसीवट और केसी घाट के बीच में जमुना नदी पे जहां पों पुल है वहां पे एक नाव दुर्घटनाग्रस्त हुई जिसमें लगभग 25 से 27 लोग बताए जा रहे हैं। अभी एग्जैक्ट नंबर जो लोग हैं उनसे बातचीत करके कंफर्म किया जा रहा है। टकराने का जो प्रथम दृष्टा कारण अभी तक लोग जो बता रहे हैं वो था कि पोंटून पुल से टकराकर जो है टकराकर यह घटना हुई है। उसमें अभी तक 10 डेड बॉडीज रिकवर की जा चुकी हैं। फायर सर्विस की टीम, पुलिस की टीम, स्थानीय गोताखोर, स्थानीय नाविक सभी लोग यहां पे राहत और बचाव कार्य में लगे हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी अपने नियत स्थान से रवाना है। जल्द ही जल्द वो भी वहां पहुंच जाएंगी। जो भी मिसिंग लोग हैं उनकी तलाश जो है की जा रही है और जो स्थानीय जैसा मैंने बताया स्थानीय पुलिस गोताखोर प्रशासन की पूरी टीम यहां पे है। मेडिकल टीम जो भी रिकवर की जा रही है जो जीवित लोग निकले हैं उनको उपचार हेतु अस्पताल में भिजवाया गया है। तो मेडिकल टीम, प्रशासन की टीम, पुलिस टीम ये सारी जो प्रशासकीय विभाग हैं उनकी टीमें लगातार कोऑर्डिनेट करके रिसर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन को कंप्लीट कर रही है। अब ये देखिए ये जो परिवार है ये सात लोगों का परिवार ये तस्वीरें जो आप देख रहे हैं यही सात लोग हैं एक ही परिवार के जो लुधियाना से आए थे और इनके घर का जो बेटा है, मम्मी हैं, चाचा चाची हैं और घर के और लोग जो हैं इसमें बेमौत मारे गए। मतलब कोई दोष नहीं था। वो तो आए थे एक फैमिली टाइम स्पेंड करने, दर्शन करने और एक साथ फैमिली जो है घूमने निकली थी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि किसी की गलती की वजह से ये सारे लोग उसका खामियाजा भुगतेंगे। उनके घर वाले रो रहे हैं। एक बार उनके घर वालों की बाइट सुनते हैं। घर वाले क्या कह रहे हैं। माता राधा [नाक से की जाने वाली आवाज़] माता माता माता यार माइक नीचे रख लो यार। माता माता जी बेटा कल बच्चे गली चंगे ले गए कि मथुरा बिंद्रा में आया नहीं गया बाहर चले गए।

पहुंच गए सारे फ़ करियो। ठीक-ठाक पहुंच गए। 2:30 बजे वीडियो पाई है स्टेटस कि ऐसी सारे खुश अपनी सेल्फियां खींच मैं कहा चलो ध्यान ना जाना जिर्न कर उस बाद बेटा तो बाद मैसेज ही आ गए पता नहीं चल कौन आई? सिर्फ यह कह के बचा नहीं जा सकता कि गलती सिर्फ नाविक की है। प्रशासन की इसमें 100सदी गलती है। आपने नियम बनाया है। वहां देखने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं है। कोई नहीं है। धड़ल्ले से काम चल रहा है। आप जानते हो इतनी भीड़ आती है। इतने श्रद्धालु बाहर से आते हैं। आपको हर जगह एक प्रॉपर वालंटियर एक प्रॉपर ऑफिसर हो। अपॉइंट करना चाहिए। कि देखिए नाविक के लिए वहां एक गार्ड अपॉइंट कर दीजिए। जैसे आप गाड़ियों का चालान करते चालान सिस्टम लाइए। मैं नैनीताल में गया था और मुझे याद है जो नैनी लेखक है उसमें अगर आप बिना लाइफ जैकेट के जाओगे तो आपको वो नाविक जो है बिठाएगा ही नहीं। बोलेगा सर आपको बैठना पड़ेगा नहीं तो मेरा चालान हो जाएगा। मैंने उससे पूछा था कि सर मैं फोटो के लिए सिर्फ निकाल दूं। बोला नहीं सर आप मत निकालिए नहीं तो मेरा चालान हो जाएगा। तो ये जब डर होगा जब चालान का डर होगा। जब इन सब चीजों की बात होगी तब होगा ना। आप वर्ल्ड क्लास टूरिज्म की बात करते हो। इतनी सारी चीजें कहते हो कि हम फैसिलिटीज दे रहे हैं। ये दे रहे हैं। लेकिन [गला साफ़ करने की आवाज़] देखिए बेचारे श्रद्धालु जिनकी कोई गलती नहीं थी बेमौत मारे गए। अब बहुत सारे पॉलिटिशंस और सब हर कोई पहुंच रहा है मौका है वारदात पे और हॉस्पिटल्स [गला साफ़ करने की आवाज़] में देखने के लिए कि क्या कुछ है कैसे रिलीफ दिया जा सके। कैसे जो परिवार वालों की मदद की जा सके। लेकिन जिसके घर का आदमी अब इस दुनिया में नहीं रहा। उससे पूछिए कि नॉर्मल नेग्लिजेंस मैं तो बोलूंगा बहुत ही छोटी सी नेगिजेंस थी। मतलब अगर प्रॉपर कोई एक शख्स होता एक एक पुलिस वाला भी होता वहां निगरानी के लिए तो बहुत बड़ा हादसा बच जाता। और मेरा सवाल तो वहां के एसपी, डीएम और एसएसपी सबसे है। डीआईजी से भी है कि क्या आपको पता है इतनी भीड़ आती है, जो जो एरिया में भीड़ होती है, जहांजहां सिक्योरिटी मेजर्स लेने चाहिए, क्या आप वहां सिक्योरिटी मेजर्स ले रहे हो? आपने जो रूल्स बनाए हैं, क्या उन रूल्स को फॉलो किया जा रहा है?

इनके सवाल के जवाब जो है इनके पास तो होंगे नहीं क्योंकि इनकी नाकामी है और इनकी नाकामियों की वजह से एक नाविक जो है ओवरलोड लोगों को भर लेता है। लाइफ जैकेट किसी को नहीं पहनाता और लोगों की मौत हो जाती। अब देखना होगा इसमें सरकार इन लोगों का इस्तीफा लेती है या नहीं। क्योंकि सबसे बड़ा सवाल है अगर जो जिम्मेदार अधिकारी हैं जिनके कार्यकाल में रहते-रहते ऐसी चीजें हो रही हैं तो उनके ऊपर स्ट्रिक्ट एक्शन होना चाहिए। नहीं तो ये फिर जो अगला अधिकारी आएगा और जो नाविक हैं वो सोचेंगे किसी पे तो एक्शन ही नहीं हुआ। सिर्फ एक नाविक है वो फंस गया। वो जेल चला गया। फिर धड़ल्ले से ये काम चलता रहेगा। तो इसमें सरकार को स्ट्रिक्ट एक्शन लेना चाहिए। बकायदा मैंने देखा कि सीएम योगी जी का ट्वीट आया इस पे। अमित शाह जी का ट्वीट आया। फिर हमारे जो देश के प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी जी उनका भी ट्वीट आया है। वो भी कह रहे हैं कि परिवार वालों से संवेदना है। लेकिन स्ट्रिक्ट एक्शन लेना जरूरी है अधिकारियों के खिलाफ क्योंकि ये उनकी नेग्लिजेंस है। उनको पता है उनके एरिया में उनके क्षेत्र में ये जो एरिया है घाट वाला वो आता है। तो वहां कोई ऑफिसर वहां कोई पुलिस अधिकारी या वहां कोई डीएम की तरफ से कोई रिप्रेजेंटेटिव क्यों नहीं है? वहां किसी की ड्यूटी क्यों नहीं लगाई गई है? अब देखना होगा ट्रैफिक पुलिस रोड पर रहती है लेकिन यहां देखने के लिए कोई नहीं है। अब इसी का खामियाजा यह परिवार वालों ने भुगता है। अब देखेंगे आगे क्या होता है। कोई एक्शन होता है या ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। तो दोस्तों इस वीडियो पर आपकी क्या राय है? जरूर बताइएगा। तब तक के लिए, धन्यवाद।

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