ईरान के सामने फौजी वर्दी, अमेरिका के सामने सूट बूट, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर साहब यह ड्रेस डिप्लोमेसी क्यों? ईरान अमेरिका के डेलीगेशन पाकिस्तान में पीस टॉक के लिए मौजूद है। आज यानी 11 अप्रैल को दुनिया की नजर इस्लामाबाद पर टिकी हुई है। लेकिन अभी लाइमलाइट में अगर कोई है तो वो है पाकिस्तान के फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुरे। वो भी अपने पहनावे को लेकर। क्या है यह मामला? इस पर जानकारी देंगी हमारी साथी प्रगति। प्रगति प्लीज बताइए। जी आकांक्षा जैसा कि पूरी दुनिया की नजर इस समय इस्लामाबाद पर बनी हुई है क्योंकि ईरान और अमेरिका दोनों ही देशों के जो डेलीगेशंस हैं वो इस समय वहां पे पीस टॉक के लिए मौजूद हैं।
लेकिन वहां पाकिस्तान के जो फील्ड मार्शल हैं उनके पोशाक पे लोगों की नजरें बनी हुई हैं और उस पे कई तरह की टिप्पणियां आ रही हैं। क्योंकि जब ईरान का डेलीगेशन पाकिस्तान में लैंड हुआ तो वो आर्मी के पोशाक में नजर आए। वहां यानी कि जो उनका कॉम्बिट गियर यानी आर्मी यूनिफार्म जो थी पाकिस्तान की उसमें नजर आए। लेकिन जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वांस अपने डेलीगेशंस के डेलीगेशन के साथ नूर खान एयरबेस पे लैंड हुए तो वो वहां पे आसिम मुनीर सूट और बूट में नजर आए। तो ये चर्चा में बना हुआ है कि दोनों देशों के साथ जो उनका पहनावा अचानक से बदला वो कैसा संदेश देता है इस पे चर्चा। हां मेरा सवाल यही था कि ये जो दोनों जो पोशाकों में जो बदलाव है तो क्या ये किसी स्ट्रेटजी का कोई हिस्सा है? कोई सिंबलिज्म है इसकी?
तो आकांक्षा इस पे कुछ जानकारों की टिप्पणी भी आ रही है। अभी इंडिया टुडे से बात कर रहे थे मेजर जनरल संजय मिस्टन जो कि इंडियन आर्मी से रिटायर्ड हैं। तो उनका ऐसा मानना है कि जब कोई विदेशी नेता किसी दूसरे देश में जाता है तो और अगर कोई किसी देश का सैन्य अध्यक्ष यानी जैसे जनरल आसिम मुनीर है अगर उनको रिसीव करने पहुंचे हैं तो कायदे से उन्हें आर्मी के ड्रेस में होना चाहिए था जो उनकी वर्दी थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वो एक सिविल ड्रेस में पहुंचे यानी सूट बूट में नजर आए थे। तो वो उनका ऐसा मानना है कि वो अपने आप को एक राजनेता के तौर पर पाकिस्तान के सर्वे सर्वा के रूप में दिखा रहे थे वहां पे। जबकि ईरान की डेलीगेशन जब वहां पे पहुंची थी तो वो आर्मी के यूनिफार्म में पहुंचे थे। क्योंकि ईरानी जो डेलीगेशन थी उसके सामने वो अपने आप को एक सैनिक के तौर पर दिखा रहे थे क्योंकि बीते दिनों अह ईरान और पाकिस्तान के बीच में भी कुछ तनाव थे।
तो इसकी वजह से वो वैसे हुए। हालांकि कायदे से अगर कोई विदेशी नेता आता है तो उनके स्वागत के लिए प्रधानमंत्री की मौजूदगी जरूरी होती है ना कि किसी सैन्य अधिकारी की। जी प्रगति इस मीटिंग में और कौन-कौन मौजूद थे? कौन-कौन लीगेट्स मौजूद थे? आकांक्षा अगर हम ईरान के डेलीगेशन की बात करें तो ईरान की ओर से उनके विदेश मंत्री अह अब्बास अराक्षी और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ़ और उनके साथ 71 लोग और पहुंचे थे इस पीस टॉक में। और उस उन्होंने अपने डेलीगेशन का नाम मिनाब 168 रखा है। मिनाब 168 को हम आपको बताएं तो अमेरिकी के अमेरिका के कथित हमलों में मिनाब स्कूल पे अटैक हुआ था जो कि ईरान में है। उस पे 168 बच्चों से ज्यादा की मौत ज्यादा की मौत हो गई थी।
तो इसकी वजह से उन्होंने ट्रिब्यूट के तौर पे हां एक ट्रिब्यूट के तौर पे उन्होंने उसका नाम रखा और खास बात ये रही ईरानी डेलीगेशन की कि जब वो ईरान से पाकिस्तान के लिए रवाना हुए तो वो अपने साथ उन बच्चों के बैग जूते और फूल को भी लेके आए जो इस कथित हमले में मारे गए थे और आकांक्षा अगर हम अमेरिका की ओर से बात करें तो अमेरिका के जो उपराष्ट्रपति हैं जे डी वांस वो अपने डेलीगेशन के प्रमुख के तौर पर आ रहे हैं मतलब पहुंचे हैं और स्टीव विटकॉफ हैं ये ट्रंप के सलाहकार और मिडिल ईस्ट के राजदूत हैं। वहीं ट्रंप के दामाद और सलाहकार जारे कुशनर भी मौजूद हैं। और पाकिस्तान की ओर से हम बात करें तो इस बैठक में उनकी तरफ से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद ईशाक डार और मोहसिन नकवी समेत आसिम मुनीर भी मौजूद हैं। प्रगति मेरा अगला सवाल यह है कि जब आसिम मुनीर रिसीव करने गए थे
कॉम्बैट यूनिफार्म में तो यह पाकिस्तान के लिए कैसा संदेश था? देखिए आकांक्षा कई दफा ऐसा देखा गया है कि जो पाकिस्तान के फील्ड मार्शल हैं आसिम मुनीर वो उनकी राजनीति में इच्छा सबको दिखाई देती है कि उनकी राजनीतिक इच्छाएं हैं वो राजनेता के तौर पर खुद को दिखाना चाहते हैं। लेकिन जब वो इस बार दोनों देशों के डेलीगेशंस को रिसीव करने गए और आ तो उन्होंने अपनी देश की जनता को भी यह साफ संदेश दिया है कि मतलब पाकिस्तान की जो कमान है
जो सत्ता की कमान है वो देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास नहीं बल्कि उनके पास है और इस बार उन्हें फिर ऐसा जाहिर कर दिया कि वो देश की राजनीति में एक मतलब बड़ा स्थान रखना चाहते हैं। उनकी इच्छाएं हैं राजनीति में आने की। जैसा कि पाकिस्तान के पूर्व जो जितने भी सैन्य के बड़े अधिकारी रह चुके हैं, सेना के बड़े अधिकारी रह चुके हैं, उन्हीं के नक्शे कदम पर वो भी चल रहे हैं। जी थैंक यू प्रगति। सो इस पीस टॉक में जो भी अपडेट्स आएंगे, जो भी इसका कंक्लूजन निकलेगा, वो हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। मेरे साथ प्रगति पांडे है। मैं हूं आकांक्षा गोगे कैमरे के पीछे दानिश है। आप देखते रहिए द ललिन टॉक। शुक्रिया। [संगीत]