यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात में सोशल मीडिया पर वीडियो डालना कुछ लोगों को भारी पड़ गया है। वहां की सरकार ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। इन लोगों में 19 भारतीय भी शामिल है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने इजराइल ईरान तनाव के बीच सोशल मीडिया पर झूठे और भड़काऊ वीडियो फैलाए। यूएई के अटर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अलशम्स ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी के दौरान कुछ ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें गलत जानकारी फैलाई जा रही थी।
प्रशासन का कहना है कि इन वीडियो का मकसद लोगों में डर और अफवाह फैलाना था जिससे देश की शांति और स्थिरता पर असर पड़ सकता था। दरअसल यूएई सरकार पहले ही साफ कर चुकी थी कि ईरान के ड्रोन या मिसाइल हमलों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं किए जाएंगे। लेकिन कुछ लोगों ने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अब उन्हें कानूनी कारवाई का सामना करना पड़ रहा है। मामला दो हिस्सों में बटा हुआ है। 14 मार्च को प्रशासन ने 10 लोगों के नाम जारी किए जिसमें दो भारतीय शामिल थे।
जिसके बाद 15 मार्च को 25 और लोगों की लिस्ट आई जिसमें 17 भारतीय हैं। हालांकि इस मामले में सिर्फ भारतीय ही नहीं है। पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, फिलीपींस और मिस्र के नागरिक भी शामिल हैं। सरकार ने आरोपों के आधार पर इन लोगों को तीन अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा है। पहला ग्रुप उन लोगों का है जिन्होंने असली वीडियो के साथ खेल किया। यानी वीडियो तो असली थे लेकिन उनमें अपनी तरफ से आवाज, कमेंट्री या एडिटिंग जोड़ दी गई। इसे ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई जैसे अभी-अभी यूएई पर कोई बड़ा मिसाइल हमला हुआ हो।
इस ग्रुप में 10 लोग हैं जिनमें पांच भारतीय शामिल बताए गए हैं। दूसरा ग्रुप थोड़ा और हाईटेक है। इसमें वो लोग हैं जिन्होंने एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पूरी तरह से फर्जी वीडियो तैयार किए। इन वीडियो में दिखाया गया कि यूएई के शहरों में धमाके हो रहे हैं या मिसाइल गिर रही है। प्रशासन के मुताबिक यह सब फुटेज पूरी तरह मनघण थी। इस ग्रुप में सात लोग हैं जिनमें पांच भारतीय बताए जा रहे हैं।
तीसरा ग्रुप उन लोगों का है जिन पर दुश्मन देश की तारीफ करने का आरोप है। इस ग्रुप में छह लोग हैं जिनमें पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी शामिल है। आरोप है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया पर एक ऐसे देश के नेताओं और उसकी सेना की तारीफ की जो यूएई का दुश्मन माना जाता है। हालांकि उस देश का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया। लेकिन रिपोर्ट्स में इशारा इजराइल की ओर माना जा रहा है।
यूएई के अटर्नी जनरल ने साफ कहा है कि यह सभी गंभीर अपराध हैं। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम एक साल की जेल हो सकती है। साथ ही 1 लाख दरहम यानी करीब ₹25 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। फिलहाल सभी आरोपियों को कोर्ट में ट्रायल के लिए भेज दिया गया है।
इससे पहले भारत सरकार भी यूएई में रहने वाले भारतीयों को सावधान कर चुकी है। सलाह दी गई थी कि हमलों या सैन्य गतिविधियों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर ना करें। यूएई सरकार भी बार-बार कह चुकी है कि फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कारवाई होगी। चाहे वह किसी भी देश का नागरिक क्यों ना हो। फिलहाल इस खबर में इतना ही।