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ईरान अमेरिकी यु!!द्ध में पुतिन की एंट्री? बुशहर हमले से रूस आगबबूला! ट्रम्प के खिलाफ रूसी सेना..

Hindi Post

दुनिया इस वक्त एक ऐसे बड़े परमाणु युद्ध की दहलीज पर खड़ी है और इसलिए क्योंकि ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र पर दोबारा हुए हमले ने रूस को आग बबूला कर दिया। मॉस्को ने सीधी चेतावनी दी अमेरिका को। अब ट्रंप से साफ कह दिया गया इजराइल से नितन्या को चेतावनी देते हुए कहा गया कि अब आप विनाश के लिए तैयार रहिए। रूस की इस सीधी धमकी के बाद सवाल यह उठने लगा कि क्या पुतिन अब आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ मिलकर युद्ध के मैदान पर आ चुके हैं?


क्रमली ने साफ कर दिया कि परमाणु बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह का हमला पूरी दुनिया के लिए भयानक परिणाम लेकर आने वाला है और रूस इसे मूगदर्शक बनकर बिल्कुल नहीं दिखेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की अपीलों के बावजूद तनाव अपने चरम पर है और परमाणु तबाही का साया गहराने लगा। रूस की यह हालिया चेतावनी वैश्विक राजनीति में एक बहुत बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

अब तक रूस पर्दे के पीछे से ईरान का समर्थन कर रहा था। लेकिन बुशहर संयंत्र के पास हुए धमाकों ने मॉस्को के धैर्य की सीमा तोड़ दी। रूस और ईरान के बीच रक्षा समझौते पहले से ही मजबूत हैं और अब इस हमले के बाद मॉस्को ने जो कड़े तेवर अपनाए उससे साफ है कि वो अमेरिका की दादागिरी को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है। खासकर अमेरिका में सत्ता परिवर्तन और डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद जिस तरह की आक्रामक नीतियां सामने आने की उम्मीद है उसे देखते हुए पुतिन ने पहले ही अपनी घेराबंदी शुरू कर दी।

पुतिन ने वाशिंगटन को साफ स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अगर परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाना बंद नहीं हुआ तो इसके परिणाम ऐसे होंगे जिसकी कल्पना नहीं कर सकते। जानकारों का मानना है कि रूस का यह आक्रामक रुख केवल एक बयान नहीं बल्कि यह युद्ध में उनकी सक्रिय एंट्री का ऐलान है। बुशल परमाणु संयंत्र ना केवल ईरान की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि रूस ने इसके निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई और वहां रूसी विशेषज्ञ भी तैनात रहते हैं।

ऐसे में वहां हमला सीधे तौर पर रूसी हितों पर हमला माना गया। रूस ने साफ शब्दों में कहा कि अगर इजराइल या अमेरिका इस तरह के दुस्साहस भरी कार्रवाइयों को रोकता नहीं है तो मॉस्को अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। यह स्थिति इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर भी रूस सतर्क है और वो दिखाना चाहता है कि वो किसी भी दबाव में झुकेगा नहीं।

परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचे साहाकार के बीच कुशर के आसपास की हलचल ने पूरे मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर लाकर एक बार फिर खड़ा कर दिया है। अगर रूस इस युद्ध में ईरान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ता है तो यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रहेगा बल्कि यह सीधे तौर पर रूस बनाम नाटो की स्थिति पैदा कर देगा। उधर अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा मानते हैं

और इसे रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। लेकिन रूस की नई चेतावनी उनके समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं। सवाल यह कि क्या अमेरिका रूस की इस धमकी को गंभीरता से लेगा या दुनिया एक ऐसी तबाही की ओर बढ़ चलेगी जहां से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आएगा। मॉस्को के कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया कि अब यह जंग परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा से कहीं आगे निकलकर वैश्विक वर्चस्व की लड़ाई बन चुकी है।

आगे अगर अमेरिका इस तरह की कारवाई जारी रखता है। रूस नुकसान महसूस करता है तो वो भी सैन्य कारवाही से पीछे नहीं हटेगा। बहरहाल देखना दिलचस्प होगा कि रूस अब कितने दिनों में खुलकर इस युद्ध में सामने आने वाला है। बहरहाल इस ताजा घटनाक्रम को आप कैसे देखते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजिएगा।

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