Cli
trumppp

पहले 3 और अब ईरान ने रखी ट्रंप के सामने 8 बड़ी शर्तें..

Hindi Post

मध्य पूर्व में छिड़ी जंग अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में अब हर तरफ से इस जंग को खत्म करने की मांग उठाई जा रही है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं

कि अमेरिका इस टकराव से थोड़ा पीछे हटने और बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है। ट्रंप का दावा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच पूरे हफ्ते बातचीत चल सकती है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ईरान की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा। लेकिन अब इस पूरे मामले में सबसे अहम बात सामने आई है ईरान की शर्तें। ईरान ने साफ कर दिया है कि जंग खत्म करनी है

तो कुछ बड़ी और सख्त शर्तों को मानना होगा। मध्य पूर्व में जारी इस भीषण तनाव के बीच अब कूटनीति ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। बातचीत की कोशिशें तेज गुजरी हैं। लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस गारंटी और ठोस फैसलों के वो पीछे हटने वाला नहीं है। वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के सामने आठ बड़ी शर्तें रखी हैं जो इस पूरे संघर्ष के भविष्य को तय कर सकती है।

आइए ग्राफिक्स के जरिए आपको दिखाते हैं ईरान की आठ बड़ी शर्तें। पहली शर्त ईरान चाहता है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपने सभी सैन्य ठिकानों को बंद करें। मतलब साफ है ईरान अब अपने आसपास अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। दूसरी शर्त ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह खत्म किए जाएं। यह प्रतिबंध उसकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालते रहे और

अब ईरान इन्हें पूरी तरह हटवाना चाहता है। तीसरी शर्त इजराइल द्वारा हिजबुल्लाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को तुरंत रोका जाए। ईरान हिजबुल्ला को अपना सहयोगी मानता है। इसलिए इस मुद्दे पर वो बेहद सख्त है। चौथी शर्त होरमुज स्टेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान को शुल्क वसूलने की अनुमति दी जाए। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और इस पर नियंत्रण ईरान की रणनीतिक ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है।

पांचवी शर्त अमेरिका यह गारंटी दे कि वह भविष्य में कभी भी ईरान पर हमला नहीं करेगा। यानी सिर्फ मौखिक भरोसा नहीं बल्कि ठोस अंतरराष्ट्रीय आश्वासन चाहिए। छठी शर्त युद्ध के दौरान हुए नुकसान के अनुपात में ईरान को वित्तीय मुआवजा दिया जाए। इससे साफ है कि ईरान इस जंग की कीमत वसूलना चाहता है। सातवीं शर्त ईरान 5 साल तक बैलस्टिक मिसाइल विकास रोकने और और यूरेनियम संवर्धन कम करने को तैयार है।

लेकिन इसके बदले उसे अपने हितों की सुरक्षा चाहिए। आठवीं शर्त ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी कि आईएईए को अपने सेंट्री फ्यूज का निरीक्षण करने देगा और प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग रोकने पर भी सहमत हो सकता है। लेकिन यह सब एक व्यापक समझौते का हिस्सा होना चाहिए। अब बात उन तीन बड़ी शर्तों की जो ईरान पहले ही रख चुका था। 12 मार्च को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजिशकियन ने साफ कहा कि जंग खत्म करने के लिए तीन बुनियादी शर्तें पूरी करनी होगी

पहली शर्त ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए। यानी ईरान अपने परमाणु और रणनीतिक अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा। दूसरी शर्त उसे हुए नुकसान का हर्जाना दिया जाए। ईरान इस युद्ध को सिर्फ सैन्य नहीं आर्थिक नुकसान के नजरिए से भी देख रहा है।

तीसरी शर्त भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ पक्की और अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले। यानी ईरान अब बिना सुरक्षा आश्वासन के किसी समझौते पर भरोसा नहीं करेगा। कुल मिलाकर साफ है कि बातचीत की राह आसान नहीं है। एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ ईरान ने अपनी शर्तों का दायरा इतना बड़ा कर दिया है कि समझौता करना किसी बड़ी कूटनीतिक चुनौती से कम नहीं होगा।

अब देखना यह होगा कि क्या यह शर्तें किसी समझौते का रास्ता खोलती है या फिर मिडिल ईस्ट की यह जंग दुनिया के लिए और बड़ा संकट बनती चली जाएगी। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट बॉक्स में जाकर जरूर बताइएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *