हमने इंडिया को बहुत ज्यादा कर्ज दिया है। इतना कर्ज पहले इंडिया के किसी भी पीएम ने नहीं लिया है। इतने पैसों का क्या करते हैं इंडिया के पीएम? यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से शेयर किया जा रहा है। बयान एक कार्ड पर चसपा है।
ट्रंप का नाम और फोटो लगी है। मतलब ट्रंप की फोटो लगी है उस पे और ऊपर लगा है एक मीडिया हाउस का लोगो जो इस बयान को वैलिडेट कराने की कोशिश में है। लोग इसे अपने-अपने तरीके से सच मानकर Twitter, Facebook से लेकर Lindin तक दबाकर शेयर कर रहे हैं। डॉनल्ड ट्रंप पिछले कुछ अरसे से जिस तरह बयान दे रहे हैं उससे एक बार की अगर आप इस बयान को देखेंगे तो एक बार की कोई भी सच और झूठ में फर्क भूल जाए। अपन ने भी सच्चाई खंगाली। क्या मिला वो जानेंगे आज के पड़ताल में। आगे बढ़ने से पहले देखा जाए कि किसने किस तरह से पोस्ट शेयर किया है।
क्या दावे किए हैं। Facebook पर रोचक ज्ञान नाम के पेज ने पोस्ट को शेयर किया। कैप्शन दिया डोन्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत पर किया तीखा वार। यानी कि वो कह रहे हैं कि ये डोनल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला है। एक्स पर प्रीति चौबे नाम की एक यूजर जिनके बायो में पूर्व पत्रकार लिखा है वो इसे शेयर करके लिखती हैं पूरे देश में आपने विज्ञापन पर और चुनाव में प्रचार अभियानों में बाद में दूसरी पार्टी के जीते हुए सांसदों या विधायकों के खरीदफरोख्त और चुनी हुई सरकार को गिराने में खर्च करते हैं। अपने नाम के आगे सेवानिवृत्त लिखने वाले शेखर खरे ने वायरल पोस्ट शेयर करके लिखा संघ भाजपा और उसके अनु शांसिक संगठनों और मोदी जी के संघी साथियों के बड़े-बड़े आलीशान दफ्तर मकान और फार्म हाउस जो बनाने थे आखिर 90 साल से भीख मांग कर खा रहे थे अब सत्ता हथियाने में कामयाब हुए हैं तो सत्ता की अय्याशी तो करब करेंगे ना इसी तरह के कई अन्य यूज़र्स ने भी पोस्ट को शेयर किया है। जिनके पोस्ट आप स्क्रीन पर देख सकते हैं। तो क्या है दावे की सच्चाई?
क्या ट्रंप ने भारत के पीएम को लेकर ऐसा कोई कमेंट किया है? यह जानने के लिए हमने Google पर अलग-अलग तरह से कई कीवर्ड सर्च किए। लेकिन सामने कोई ऐसी रिपोर्ट नहीं आई जो दावे को पुख्ता करती हो। हमने वाइट हाउस की वेबसाइट पर ट्रंप के प्रेस कॉन्फ्रेंस सेक्शन को भी खंगाला। लेकिन वहां भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली। जाहिर है अमेरिका का राष्ट्रपति अगर इस तरह का बयान भारत के पीएम के लिए देगा तो उसकी कहीं ना कहीं तो रिपोर्टिंग होगी। देश और भाषा से इधर कहीं तो छपेगा लेकिन हमें कहीं ऐसा कोई ठोस जानकारी हमें ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।
अब बात वायरल पोस्ट की उसे गौर से देखने पर कार्ड में लिखे टेक्स्ट में कई बेसिक गलतियां मिलेंगी। जो एक मीडिया हाउस तो क्या उसका एक इंटर्न भी ना करें। कहीं कोई फुल स्टॉप नहीं। वाक्य अपनी गति से बढ़े जा रहा है। पूरी बात हो गई लेकिन मजाल हो कि कोई फुल स्टॉप आ जाए। पोस्ट में मीडिया संस्थान एनबीटी का लोगो लगा है। उसके बाकी पोस्ट के अगर आप फोंट साइज देखेंगे कार्ड की तो वह डिजाइन उसके फोंट साइज वो वायरल पोस्ट से काफी अलग है। इस मसले पर एनबीटी का भी बयान आया है। उसने एक्स पर पोस्ट करके वायरल पोस्ट को फर्जी बताया है। संस्था ने लिखा पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एनबीटी के नाम से कई पोस्ट वायरल हो रही हैं और उन फर्जी पोस्ट के जरिए भ्रामक संदेश फैलाए जा रहे हैं। इस पोस्ट में दो तस्वीर लगी है जिसमें से एक फेक है और एक असली है। यानी एनबीटी ने जो वायरल पोस्ट है उसको फर्जी बताया और एक दूसरी पोस्ट शेयर की है जिसमें बताया संस्था ने कि जिस पोस्ट को असली बताया है उसमें ट्रंप का बयान अलग है।ट्रंप उसमें कह रहे हैं हम ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम जीतेंगे। यानी कुल जमा बाद ट्रंप के हवाले से भारत पीएम भारतीय पीएम के कर्ज लेने का बयान फर्जी है। तो अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप ने भारत को कर्ज देने को लेकर हाल फिलहाल कुछ कहा है?
Google पर खोजबीन करने पर हमें डोनल्ड ट्रंप का अगस्त 2025 में दिया एक बयान मिला। तब अमेरिकी सरकार ने नया नवेला एक विभाग बनाया था। डॉज डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी। इस विभाग ने भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए दिए जाने वाले पैसों में कटौती कर दी थी। कुल 21 मिलियन डॉलर यानी ₹175 करोड़ की मदद की जाती थी। ट्रंप प्रशासन ने एक झटके में सब खत्म करने का ऐलान कर दिया था। तब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था भारत के पास पहले से ही बहुत पैसा है। तो अमेरिका उन्हें यह फंड क्यों दे रहा है? ट्रंप की भारत से शिकायत भी थी कि भारत अमेरिकी सामानों पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाता है जिससे वहां बिजनेस करना मुश्किल होता है।ट्रंप ने कुछ सुझाव भी दिए थे। उन्होंने सुझाया था कि भारत में मतदान बढ़ाने की बजाय अमेरिका के अपने मतदान, अपने वोटिंग और मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन यह कटौती ट्रंप ने केवल भारत में ही नहीं उसके पड़ोसी देश बांग्लादेश और नेपाल में भी की थी। लेकिन तब या अब ट्रंप ने कहीं भी कर्ज को भारतीय पीएम से जोड़कर कुछ नहीं कहा है। कुल मिलाकर डी ललनटॉप की पड़ताल में दावा भ्रामक निकला। अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम से फर्जी बयान शेयर हो रहा है। जिसका अमेरिका, भारत और उनके हुक्मरानों से कोई लेना देना नहीं है। लड्डो।