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ट्रम्प के अपने ही इन 5 हिम्मती लोगों ने खोली ट्रंप की पोल..

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ईरान पर हमला कर बुरे फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति इन दिनों युद्ध से किसी भी सहारे बाहर निकलना चाहते हैं। ट्रंप के हालिया बयानों से ऐसा लगता है जैसे अमेरिका यह जान चुका है कि ईरान से युद्ध लड़ना तो दूर अब हम रोक पाना बेहद मुश्किल हो चुका है। इसके पीछे कारण मिडिल ईस्ट में तमाम मुस्लिम देशों में मौजूद अमेरिका के बेस का लगभग नाकाम हो जाना है। हालांकि धमकी फिर भी जारी है।

इस बीच अमेरिका से ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि उसने इसराइल के कारण एक ऐसे युद्ध को मोड़ लिया जिससे न सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंच रही है बल्कि पूरी दुनिया गैस और तेल की किल्लत से जूझने लगी है। लेकिन अब इस पूरे युद्ध को लेकर जो सच्चाई सामने आ रही है, उसने अमेरिका की सबसे बड़ी दलील पर ही सवाल खड़े कर दिए। वही दलील जिसके आधार पर दुनिया को समझाया गया कि ईरान पर हमला जरूरी था। दावा किया गया कि ईरान की परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा था और अगर उसे नहीं रोका जाता तो पूरा मिडिल ईस्ट तबाह हो सकता था।

अब इसी दावे पर दुनिया के पांच बड़े अधिकारियों ने ऐसा खुलासा किया है जिसने अमेरिकी दावों की नींव हिला दी है। चौंकाने वाली बात यह है इन पांच में से दो अधिकारी खुद अमेरिका से जुड़े हैं। सबसे पहली बात अमेरिकी खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबाार्ड की। 18 मार्च को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने गवाही देते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जून 2025 के हमले के बाद ईरान का परमाणु कार्यक्रम बुरी तरीके से प्रभावित हुआ था।

उसके बाद ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की कोई सक्रिय कोशिश नहीं की थी। इस बयान के सामने आते ही अमेरिकी संसद में हंगामा मच गया। सवाल उठ खड़े हुए। अगर यह जानकारी पहले से थी तो फिर हमला किस आधार पर किया गया? दूसरा बड़ा बयान ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन अहमद मुसैदी का है जो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने अपने लेख में दावा किया कि दोनों देशों के बीच समझौता करीब-करीब तय हो चुका था। ईरान यूरेनियम संवर्धन को कम करने के लिए तैयार था।

लेकिन ऐन वक्त पर इसराइल के दबाव में आकर अमेरिका ने हमला कर दिया। बुसैली ने तो यहां तक कह दिया कि उस समय अमेरिकी विदेश नीति पर ट्रंप का नियंत्रण कमजोर पड़ चुका था। तीसरा बयान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख रॉफेल ग्रासी का है। जंग के दौरान इन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान किसी सक्रिय परमाणु हथियार का शामिल नहीं है और वह तुरंत बम बनाने की स्थिति में भी नहीं था।

चौथा खुलासा ब्रिटेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोनाथन पावेल से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने जो आखिरी जानकारी दी गई थी, उसमें साफ संकेत थे कि ईरान के साथ समझौता बहुत करीब है। लेकिन महज दो दिन बाद ही अमेरिका ने इसराइल के साथ मिलकर हमला कर दिया। यह फैसला ब्रिटेन तक के लिए चौंकाने वाला था। पांचवा और सबसे बड़ा झटका अमेरिका के भीतर से आया।

वरिष्ठ खुफिया अधिकारी जॉय कैंट ने इस युद्ध के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने साफ तौर पर लिखा कि ईरान से अमेरिका को तात्काल कोई खतरा नहीं था और यह युद्ध इसराइल के प्रभाव में लिया गया फैसला था। इन पांच बयानों ने मिलकर एक ऐसी तस्वीर पेश कर डाली जिसमें अमेरिका का आधिकारिक नैरेटिव कमजोर पड़ता दिख रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर ईरान तत्काल परमाणु खतरा नहीं था। अगर बातचीत जारी थी और समझौता करीब था तो फिर युद्ध का फैसला क्यों नहीं लिया गया?


यही वजह है कि अब अमेरिका खुद इस युद्ध में फंसता नजर आ रहा है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में उसके सैन्य ठिकाने दबाव में हैं। दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर उसकी साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तेल और गैस की सप्लाई पर असर ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। और अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह युद्ध वास्तव में सुरक्षा के लिए था या फिर यह एक राजनीतिक और रणनीतिक गलती साबित हो रहा है। इजराइल में इस वक्त रात खूनी रात में तब्दील हो चुकी है।

ईरान की तरफ से लगातार क्लस्टर वॉरहेड लैस, खुर्रम शहर और सिजिल जैसी मिसाइलें दागी जा रही हैं। एक के बाद एक, एक एक के बाद एक यह लगातार आसमान से आग उगल रही हैं। इजराइल के कोने-कोने में चाहे वह तेल अवीव का इलाका हो या फिर हाइफा या बेत सेमिश जैसे इलाके हर जगह सिर्फ एक ही तस्वीर नजर आ रही है। वो यह कि ईरानी मिसाइलें लगातार हमले बोल रही हैं।

इजराइल में मच रही इस भारी तबाही को कोई पहले से नहीं जानता बल्कि यह पहली दफा है जब गजा जैसी तस्वीर इसराइल के कोने-कोने से निकल कर सामने आ रही है और फिर दुनिया सवाल पूछ रही है कि इसराइल के पास वो कौन सा एयर डिफेंस सिस्टम था जिसकी चर्चा दुनिया भर में की जाती थी लेकिन अब तो ईरानी मिसाइलों के हमले में वह नजर तक नहीं आ रहा। आपको बता दें कि इस वक्त ईरान की तरफ से 64वीं लहर दागी गई है

जो लगातार इसराइल के कोने-कोने में दहशत फैला रही है। इससे पहले इजराइल ने ईरान के सुप्रीम नेशनल काउंसिल के सलाहकार अली लारीजानी की हत्या कर दी थी। गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामिनई को टारगेट किलिंग में मार दिया गया था। जिसके बाद से ही ईरान ने इसराइल और अमेरिका दोनों के खिलाफ अपना बहद ऑपरेशन चालू किया था।

लगातार ईरानी मिसाइलें और ड्रोन अमेरिका हो या फिर इसराइल हो उनके तमाम बेससेस और फिर उनके देश के कोने-कोने में आग उगल रही हैं और यही कारण है कि अब तक पिछले 24 घंटे में 177 इसराइली नागरिक इंश्यर्ड बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कईयों की मौत हो चुकी है। हालांकि इसराइल पर आरोप लगता है कि वो मीडिया इनार्गों के कारण खबरें बाहर आने ही नहीं देता।

गौरतलब है कि बीती रात ही ईरान के साउथ पार्स में इसराइल ने गैस प्लांट पर अटैक कर दिया था। जिसके बाद बड़े पैमाने पर आग लग गई थी। ईरान के आईआरजीसी ने उसी वक्त ऐलान कर दिया था कि वो इस हमले का बहुत बड़ा इंतकाम लेगा। इसके बाद से क़तर, सऊदी और यूएई जैसे देशों के गैस प्लांट पर ईरान ने जबरदस्त धावा बोला। लगातार आग की लपटें आसमान को छूने की जद्दोजहद करती हुई नजर आई।

लेकिन अगर बात करें सिर्फ इसराइल की तो बीते 24 घंटे में ईरान की तरफ से सैकड़ों मिसाइल दागी गई हैं और यही वजह है कि इसराइल का एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरीके से कोलैप्स होता हुआ नजर आ रहा है। फिलहाल खबर यह है कि ईरान अभी अपने हमलों में तेजी कर रहा है और उसकी तरफ से साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि खामिनी और सुप्रीम नेशनल काउंसिल के सलाहकार अली लारजानी की मौत का बदला नितन याहू से गंभीर तौर पर लिया जाएगा।

यहां तक कि खबरें ऐसी भी हैं कि एआरजीसी ने कसम खा रखी है कि वह नितन्याहू की हत्या करने के बाद किसी तरीके से थमेगी। यानी साफ तौर पर खून का बदला खून। लेकिन इसराइल में इस वक्त पूरी रात हड़कंप मच रहा है। क्योंकि जिस तरीके से ईरान के हमले इजराइल के कोने-कोने में दहला रहे हैं उसी हिसाब से यह भी कहा जा रहा है कि आने वाला समय इसराइल में और भयंकर तबाही का हो सकता है।

फिलहाल ईरान की रणनीति यही कहती है कि वो क्लस्टर मिसाइलें जिनमें एक बार में ही सैकड़ों बम होते हैं वही दागे जाएंगे। जिसके कारण सिर्फ कुछ ही मिसाइलें क्लस्टर वार हेड वाली पूरे के पूरे इसराइल को डहला दे रही हैं। और यह तस्वीर जो इसराइल की आप अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं, यह और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। क्योंकि यह तस्वीरें सिर्फ पिछले 24 घंटे की हैं। जिनमें इसराइल की रात ही यह बताने के लिए काफी है कि ईरानी मिसाइलों ने आखिर किस कदर तबाही मचाई है।

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