एक्सपर्ट सशन कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडिडेट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब चाहते हैं कि ईरान के साथ चल रही जंग का खर्च अकेले अमेरिका ना उठाए। 30 मार्च को वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेवट ने कहा कि ट्रंप सोच रहे हैं कि अरब देशों से भी इस जंग का खर्च उठाने में मदद ली जाए। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अब यह जंग अमेरिका और ट्रंप को महंगी पड़ रही है?
दूसरी तरफ ईरान है। वहां से मैसेज साफ-साफ आ चुका है। ईरान के सीनियर मिलिट्री एडवाइजर मोहसिन रजई ने कहा कि जब तक हमारी शर्तें पूरी नहीं होंगी, लड़ाई नहीं रुकेगी। वो शर्तें क्या हैं? जंग में जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई हो। सारे आर्थिक प्रतिबंध हटे और तो और अमेरिका यह गारंटी दे कि वह आगे से हमारे मामले में दखल नहीं देगा। मतलब ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा।
लेकिन इसी बीच वाइट हाउस थोड़ा पॉजिटिव दिखने की कोशिश कर रहा है। कैरोलिन लिविट ने कहा कि पर्दे के पीछे सीधे-सीधे तो नहीं लेकिन इनडायरेक्ट बातचीत चल रही है और अच्छी चल रही है। उनका कहना है कि जो बातें पब्लिकली कही जा रही हैं असल बातचीत यानी जो बातें प्राइवेटली हो रही हैं वो काफी अलग है। कैरोलिन ने यहां तक कह दिया कि ईरान के बातचीत करने वाले लोग पर्दे के पीछे पहले के नेताओं से ज्यादा समझदार हैं जो अब इस दुनिया में नहीं है।
वैसे यह पर्दे के पीछे वाली बात अमेरिका पहले भी कह चुका है और ईरान ऐसे किसी भी बातचीत को नकारता ही आया है। अब बात करते हैं जंग कितने दिन चलेगी। वाइट हाउस के मुताबिक ट्रंप शुरू से ही कह रहे हैं कि यह जंग चार से छ हफ्ते तक चल सकती है। और अभी वही अनुमान है। प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि आज जंग का 30वां दिन है। मतलब अगर ट्रंप के टाइमलाइन के हिसाब से देखें तो जंग अपने आखिरी चरण में हो सकती है।
एक और बड़ा मुद्दा है जिस पर सबकी नजर है। वो आपसे हमसे जुड़ा है। वो है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस। हिंदी में कहें तो जलडमरू मध्य। यह वो रास्ता है जहां से दुनिया का 20 फ़ीसदी तेल गुजरता है जो जंग की वजह से बंद है। लिविट का दावा है कि हम एक्टिवली इसे दोबारा खोलने पर काम कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ इसे खोलना ही लक्ष्य नहीं है बाकी मिलिट्री गोल्स भी पूरे करने हैं।
अब सबसे जरूरी सवाल क्या अमेरिका ईरान में सेना उतारेगा? इस पर कैरोलिन लिविट ने कहा कि ट्रंप ने इस बात को खारिज नहीं किया है। यानी अभी भी एक संभावना है। पेंटागन अलग-अलग प्लान तैयार कर रहा है। लिविड से ट्रंप के उस बयान पर भी सवाल हुआ जिसमें ईरान के डिसलिनेशन प्लांट्स को निशाना बनाने की बात कही गई थी। यह प्लांट आम लोगों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहीं से पीने का पानी मिलता है
डिसलिनेशन प्लांट में। बेसिकली खारे पानी को पीने योग्य यानी कि पीने के लायक बनाया जाता है। तो इस पर लेवट ने कहा कि अमेरिकी सेना जो भी करेगी वो कानून के दायरे में रहकर करेगी। लेकिन उन्होंने यह भी साफ-साफ कहा कि ट्रंप अपने मिशन के सारे लक्ष्य पूरे करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बातचीत फेल हो गई तो अमेरिका आगे और सख्त कदम उठा सकता है।
यह ईरान के लिए सही फैसला लेने का एक और मौका है। वरना उन्हें अमेरिकी फौज का सामना करना पड़ेगा। अगर बातचीत से बात नहीं बनी तो अमेरिका और सख्त कदम उठाने को तैयार है। तो कुल जमा बात यह है कि एक तरफ पर्दे के पीछे बातचीत का दावा किया जा रहा है। दूसरी तरफ जंग भी जारी है। ऊपर से अब ट्रंप ने अरब देशों से पैसे मांग लिए हैं। नीचे से मिलिट्री प्रेशर है और बीच में है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस। बाकी इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं.