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ईरान, वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा में क्या करेंगे ट्रंप?..

Hindi Post

वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नजर क्यूबा पर है। 16 मार्च को ट्रंप ने कहा कि उन्हें क्यूबा को अपने कंट्रोल में लेने का सम्मान मिल सकता है। सम्मान। ट्रंप ने ओएल ऑफिस से कहा, “मैं पूरी जिंदगी सुनता आया हूं कि अमेरिका क्यूबा को कब अपने नियंत्रण में लेगा।” यह एक बड़ा सम्मान है। किसी ना किसी तौर पर क्यूबा को लेना। चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में लूं। मैं वहां कुछ भी कर सकता हूं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या क्यूबा में अमेरिका वैसी ही सैन्य कारवाई करेगा जैसी जनवरी में वेनेजुएला में निकोलस माधुरों के खिलाफ हुई थी? या यह ईरान के साथ चल रहे संघर्ष जैसी होगी। इस पर ट्रंप ने कहा मैं आपको यह नहीं बता सकता। ट्रंप के ये बयान उस समय सामने आए जब क्यूबा एक बार फिर अंधेरे में डूब गया। 16 मार्च को पूरे क्यूबा में बिजली गुल हो गई। जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए। राजधानी हवाना समेत कई शहर अंधेरे में डूब गए। जहां सड़कों पर सिर्फ गाड़ियों की हेडलाइट्स और बैटरी लाइट्स से रोशनी हो रही थी।

देश की बिजली ग्रिड ऑपरेटर्स के मुताबिक ग्रिड फेल होने के वक्त चल रहे पावर यूनिट्स में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी और पूरे देश में बिजली बहाल करने की कोशिश की जा रही है। यह हालात नए नहीं है। पिछले कुछ सालों में क्यूबा में बार-बार बड़े स्तर पर ब्लैकउ्स होते रहे हैं। इसकी वजह पुराना बिजली ढांचा, ईंधन की कमी और तेल सप्लाई पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध बताए जा रहे हैं। क्यूबा बिजली बनाने के लिए तेल पर काफी निर्भर है।

पिछले 3 महीनों से अमेरिका ने क्यूबा को मिलने वाले विदेशी तेल पर रोक लगा रखी है। जिसमें वेनेजुएला से आने वाली सप्लाई भी शामिल है। इसके कारण बार-बार बिजली कटौती हो रही है। अस्पतालों को कुछ इलाज टालने पड़े हैं। खाने की कमी बढ़ रही है और लोगों में गुस्सा भी दिखने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक ईंधन की कीमतें इतनी बढ़ गई है कि काले बाजार में पेट्रोल करीब ₹9 प्रति लीटर यानी करीब ₹831 तक पहुंच गया है।

यानी एक कार का टैंक भरने में $300 से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। जो ज्यादातर क्यूबाई लोगों की सालाना कमाई से भी ज्यादा है। क्यूबा सरकार का कहना है कि यह संकट अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से जबकि आलोचक कहते हैं कि देश के बिजली ढांचे में लंबे समय से निवेश यानी इन्वेस्टमेंट की कमी भी एक बड़ी वजह है। 14 मार्च को क्यूबा के मोरून शहर में लोग बिजली और खाने की दिक्कतों को लेकर सड़कों पर उतर आए। क्यूबा के राष्ट्रपति मेगेल डियाज कानेल ने कहा कि पिछले 3 महीनों से देश को कोई तेल नहीं मिला है।

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है ताकि दोनों देशों के बीच समस्याओं का हल निकाला जा सके। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई आपात कदम उठाए हैं। जैसे स्कूल के घंटे कम करना, बड़े खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम टालना और ट्रांसपोर्ट सेवाओं में कटौती करना। क्यूबा में पावर प्लांट 40 साल से ज्यादा पुराने हैं और अपनी क्षमता से ज्यादा चल रहे हैं। देश में जो कच्चा तेल इस्तेमाल होता है वो भारी और कम गुणवत्ता वाला है। कम क्वालिटी वाला जिससे मशीनंस पर दबाव बढ़ता है

और बिजली उत्पादन यानी इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन कम हो जाता है। पहले वेनेजुएला क्यूबा को सस्ता तेल दे देता था। जिससे उसकी ऊर्जा व्यवस्था चलते रहती थी। लेकिन जनवरी 2026 में निकुलस मादुरों के हटने के बाद से यह सप्लाई बंद हो चुका है। जिससे क्यूबा की हालत और खराब हो गई। इन सबके बीच अमेरिका और क्यूबा के रिश्तों में भी तनाव बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच बैक चैनल बातचीत तो जारी है।

इसमें कैदियों के बदले तेल जैसे फार्मूलों पर चर्चा हो रही है। क्यूबा ने 51 राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की बात कही है। जबकि अमेरिका सीमित स्तर पर तेल की सप्लाई देने पर विचार कर रहा है। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की एक बड़ी मांग ये भी है कि क्यूबा के राष्ट्रपति मेगेल डियाज़ कानेल को सत्ता से हटाया जाए। हालांकि डियाज़ कानेल ने कहा है कि बातचीत बराबरी,

सम्मान और संप्रभुता के सिद्धांतों पर होनी चाहिए सोवनिटी। ट्रंप ने वेनेजुएला में बदलाव और ईरान के साथ संघर्ष के बाद संकेत दिए हैं कि क्यूबा अगला निशाना हो सकता है। उन्होंने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए वेनेजुएला से तेल सप्लाई बंद कर दी और उन देशों पर टेरिफ लगाने की धमकी दी जो क्यूबा को तेल बेचते हैं। हालांकि पिछले कई दशकों से अमेरिका ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार का विरोध जरूर किया है।

लेकिन 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद हुए समझौते के तहत उसने क्यूबा पर हमला ना करने का वादा भी निभाया है। फिलहाल वाइट हाउस ने यह साफ नहीं किया है कि क्यूबा में किसी संभावित सैन्य कारवाही का कानूनी आधार क्या होगा। देश और दुनिया की दूसरी बड़ी खबरें भी हम आप तक इसी तरह लाते रहेंगे.

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