क्या हो अगर अमेरिका कोई ऐसा युद्ध लड़ रहा हो जिसे खुद उनके टॉप इंटेलिजेंस अफसर एकदम गलत मानते हो? क्या हो अगर अचानक यह पता चले कि यह जंग किसी बाहरी खतरे की वजह से नहीं बल्कि किसी और देश के भारी दबाव में शुरू की गई है। जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक ऐसा ही बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
नमस्कार, मैं हूं सिद्धार्थ प्रकाश। आज हम बात करेंगे अमेरिका के उस हाई प्रोफाइल इस्तीफे की जिसने सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी विदेश नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो कट ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जो कैंट कोई आम अफसर नहीं है। उन्हें खुद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस अहम पद पर नियुक्त किया था।
लेकिन मंगलवार को एक्स पर अपनी एक पोस्ट से उन्होंने अमेरिका की राजनीति में भूचाल ला दिया। उन्होंने लिखा कि मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर ईरान में चल रहे मौजूदा युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। जो कैंट ने अपने इस्तीफे में जो सबसे बड़ी बात लिखी है वो यह है कि ईरान से हमारे देश यानी अमेरिका को कोई तुरंत खतरा था ही नहीं। यह बिल्कुल साफ है कि हमने यह युद्ध इजराइल और उसकी ताकतवर अमेरिकन लॉबी के भारी दबाव में आकर शुरू किया है।
सोचिए अमेरिका का एक इतना बड़ा काउंटर टेररिज्म अफसर सरेआम दुनिया से कह रहा है कि युद्ध अमेरिका की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इजराइल के दबाव में लड़ा जा रहा है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस ने फिलहाल इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है और कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। शुरुआत में जब ईरान पर हमले हुए थे तब ट्रंप ने इसे एक बड़ा खतरा बताया था।
उनके प्रशासन का कहना था कि ईरान हमले की तैयारी कर रहा था। लेकिन मजे की बात देखिए। कैपिटल हिल में पेंटागन की जो ब्रीफिंग हुई [संगीत] उसमें खुद रक्षा अधिकारियों ने कह दिया कि ईरान की तब तक हमला करने की कोई योजना ही नहीं थी जब तक कि उस पर पहले कोई हमला ना किया जाए। ट्रंप ईरान पर हमले को लेकर अपने ही बयानों में बार-बार उलझते नजर आ रहे हैं। कभी वह कहते हैं कि वह ईरान की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को बचा रहे हैं
तो कभी कहते हैं कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। कभी आतंकवादियों का सफाया करने की बात करते हैं और कभी वहां की जनता से सत्ता पलटने को कहते हैं। तो कुल मिलाकर जो केंट के इस्तीफे ने यह साबित कर दिया है कि इस युद्ध के पीछे की असली कहानी वह नहीं है जो हमें बताई जा रही है। आपको क्या लगता है कमेंट करके जरूर बताइएगा.