धुरंधर 2 का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। हमजा अली मजारी की कहानी दर्शकों को खूब पसंद आई। लेकिन अब आपको उस रियल धुरंधर की कहानी बताऊंगा जो धुरंधर के हमजा की तरह जांबाज तो था पर उसके जितना लकी नहीं था। वो पाकिस्तान जाकर देश के काम आया लेकिन खुद लौट कर कभी भारत नहीं आ सका। यह कहानी उस भारतीय जासूस की है जिसके बारे में जानकर हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। क्योंकि असली कहानी में एक ऐसा जासूस था जो दुश्मन के घर में घुसा।
सालों तक खेल खेलता रहा। एक भारतीय जासूस दुश्मन देश में जाकर ना सिर्फ रह रहा था बल्कि पाकिस्तान आर्मी का हिस्सा बन जाता है। यह कहानी है रविंद्र कौशिक की जिसे दुनिया द ब्लैक टैगर के नाम से जानती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म की कहानी भारत के असली धुरंधर रविंद्र कौशिक की है। जिन्होंने कॉलेज में पढ़ाई से लेकर थिएटर में एक्टिंग और रॉ के एजेंट तक का किरदार पूरी शिद्दत से निभाया। कौशिक [संगीत] ने भी पाकिस्तान की आर्मी में सॉलिड घुसपैठ करके जगह बनाई।
उन्होंने पाक फौज की सेना की मूवमेंट और इस्लामाबाद के न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में जरूरी खबरें जुटाकर भारत भी भेजी। हालांकि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के ट्रैप में पकड़े जाने के बाद उनका अंत बहुत बुरा हुआ। वो देश के काम तो आ गए लेकिन कभी देश में दोबारा नहीं लौट पाए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे पाकिस्तान में पकड़े कैसे गए थे? वह भी आपको बताते हैं।
कौशिक शानदार जिंदगी जीते हुए पूरी दबंगई के साथ काम कर रहे थे। उनकी जिंदगी का सबसे बुरा मोड़ उनकी अपनी गलती से नहीं बल्कि जूनियर जासूस की गलती से आया। 1983 में रॉ के एक छोटे लेवल के ऑपरेटिव इनायत मसीह को उनसे कांटेक्ट करने के लिए भेजा था। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक मसीह को पाकिस्तानी काउंटर इंटेलिजेंस आईएसआई ने फौरन पकड़ लिया।
इंटेरोगेशन में मसीह टूट गया और अधिकारियों को मुल्तान के उस पार्क में ले गया जहां उसे कौशिक से मिलना था। कौशिक को सितंबर 1983 में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उनके साथ सालों तक अमानवीय हरकतों का दौर चला। उन्हें सियालकोट के इंटेरोगेशन सेंटर से कोर्ट, लखपत और मियावली जेलों के हाई सिक्योरिटी सेलों के बीच शिफ्ट किया गया। कौशिक ने शुरुआत में अपनी असली पहचान बताने से इंकार कर दिया। वह खुद को पाकिस्तानी नागरिक बताते रहे।
1985 में कौशिक को एक पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी जिसे बाद में उम्र कैद में बदल दिया गया। रविंद्र कौशिक की मौत 21 नवंबर 2001 को मियावली सेंट्रल जेल में दिल की बीमारी से हुई। यह बीमारियां करीब 20 साल तक चले टॉर्चर की वजह से बढ़ गई थी। उन्हें जेल के पीछे एक अनजान कब्र में दफनाया गया था। और आज भी जब भी कोई ऐसी फिल्में आती हैं, बॉक्स ऑफिस पर भी जमकर धमाल मचती है।
बॉलीवुड की धुरंधर और उसके सीक्वल में मौजूद कंटेंट दर्शकों को खूब पसंद आते हैं। जासूसी पाकिस्तान में अंडर कवर मिशन और देशभक्ति की थीम से सजी फिल्मों को देखकर लोग मूवी के किरदारों की तुलना असली भारतीय इंटेलिजेंस के लोगों से करने लगते हैं। वो ऐसे किरदारों को ब्लैक टाइगर से जोड़ते हैं। भारत के द रियल स्पाई की कहानी आपको कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.