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राज ज्योति दूरदर्शन का बड़ा चेहरा जिसे धुरंधर फिल्म में देखने के बाद भी पहचान नहीं रहे लोग

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आज की कहानी किसी ऐसे कलाकार की नहीं है जिसे रातोंरात शहरत मिल गई हो। बैठे-बैठे तुम्हारा चेहरा निहारते रहने का समय नहीं है मेरे पास रोज। [संगीत] अरे अपने को छोड़ तू। आज हम उस छुपे हुए हीरे की बात करेंगे जिसने पिछले 40 सालों से बॉलीवुड को एक से एक बढ़कर बेहतरीन फिल्में दी हैं। लोग इनका चेहरा देखकर तुरंत पहचान जाते हैं। मैं कर्ण उन समस्त पराक्रमों को दिखाने के लिए तत्पर हूं। जो इस सभा में युवराज अर्जुन ने कर दिखाया। उन्हें कयामत से कयामत तक लगान और आर्टिकल 370 जैसी फिल्मों में देखकर लोगों ने खूब तालियां भी बजाई है। आशा देखने में भोलीभाली सीधी साली लेकिन ओके। लेकिन अफसोस उनके असली नाम और उनकी असल जिंदगी की कहानी से बहुत कम लोग वाकिफ हैं। आज हम आपको नागजुशी के उस अनसुने सफर पर ले चलेंगे जो कश्मीर की वादियों और दिल्ली की गलियों से शुरू होकर बॉलीवुड के सबसे बड़े खानदानों तक पहुंचता है। ए शशि जी अपने मित्रों से कह दीजिए मुझे मजाक बिल्कुल पसंद नहीं। [हंसी] पर्दे पर रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर दुरंदर टू द रिवेंज चल रही है

और दर्शक अपनी कुर्सियों से बंधे हुए हैं। लेकिन अचानक क्लाइमेक्स का वो खूनखार सीन आता है। बैकग्राउंड में मशहूर गाना राजपूतिन बज रहा है और सामने खड़ा है पाकिस्तानी सेना का एक बेहद खूनखार और बेरहम लेफ्टिनेंट जनरल शमशाद हसन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर इस खौफनाक विलन में जान फूंकने वाला यह अभिनेता आखिर है कौन? नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल। हेलो दोस्तों, आप सुन रहे हैं मेरी यानी अंकिता की आवाज आपके अपने चैनल हिंदी रेडियो पर। 4 फरवरी 1961 को इस दुनिया में कदम रखने वाले राज का पूरा नाम राजेंद्रनाथ ज्योति है। इंटरनेट पर कई जगह यह गलत जानकारी फैली हुई है कि उनका जन्म कश्मीर में हुआ। [संगीत] लेकिन असल में उनका जन्म दिल्ली में हुआ है। उनका ताल्लुक एक बेहद पढ़े लिखे और प्रगतिशील कश्मीरी पंडित परिवार से है। [संगीत] उनके परिवार की जड़े भारत के स्वतंत्रता संग्राम से बहुत गहराई तक जुड़ी हुई है। उनके खानदान के लाडो रानी जुतशी एक बहुत ही निडर और मशहूर क्रांतिकारी महिला रही हैं। राज के पिता का नाम नरेंद्रनाथ जुतशी है जो पेशे से एक जानेमाने पत्रकार रहे हैं। उनकी माता अनुराधा एक टीचर रही हैं। उनके परिवार में उनकी एक बहन भी हैं जिनका [संगीत] नाम शबनम जुशी हो रहा है। राज के खून में ही कला और अभिनय का रंग घुला हुआ है।

उनके दादा दीदारनाथ जोशी जी एक बहुत ही मशहूर रेडियो और थिएटर आर्टिस्ट रहे हैं। अगर आपने एमएस थियो की वह ऐतिहासिक फिल्म गर्म हवा देखी है तो उसमें बलराज साहनी के बड़े भाई का वह दमदार किरदार दीनाना जी ने ही निभाया था। ऐसे साहित्य और कला से भरे माहौल में राज का बचपन गुजरा। उनकी दादी का नाम रूप रानी जुतशी है और चाचा का नाम महेंद्रनाथ जुशी है। घर में हमेशा से ही खुले विचारों और कला को बढ़ावा देने वाला माहौल रहा है। तीन साल नाकाम रहकर चौथे हमले में बीए कर लिया तो कौन सा महमूद गजनवी बन गया? महज पांच या छ साल की उम्र से ही राज ने कविताएं पढ़नी और स्कूल के नाटकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। उनके अंदर का वो कलाकार बचपन से ही बाहर आने के लिए बेताब दिखाई देता। उनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई दिल्ली में ही पूरी हुई। बाद में उन्होंने ग्वालियर के मशहूर और बहुत ही प्रतिष्ठित [संगीत] द सिंधिया स्कूल में दाखिला लिया। 1977 में उन्होंने वहां से अपनी पढ़ाई पूरी की। ग्वालियर [संगीत] के उस ऐतिहासिक माहौल और स्कूल के नाटकों ने उनके भीतर एक्टिंग के शौक को एक पक्के इरादे में बदल दिया। कॉलेज की पढ़ाई के लिए वे वापस दिल्ली आ गए और वहां भी थिएटर और नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने लगे। दिल्ली [नाक से की जाने वाली आवाज़] के बाग उनका सफर दक्षिण भारत की तरफ मुड़ गया। वे हैदराबाद चले गए। वहां जाकर उन्होंने बहुत ही मशहूर थिएटर ग्रुप ज्वाइन कर लिया। मंच पर अभिनय करते हुए उन्हें जो सुकून और खुशी मिलती वो किसी और चीज से नहीं मिल पाती।

एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद यह बात मानी है कि थिएटर के मंच पर वह खुद को सबसे ज्यादा आजाद और जिंदा महसूस करते हैं। थिएटर की इसी दुनिया में कुछ समय बिताने के बाद जिंदगी उन्हें बेंगलुरु ले गई। बेंगलुरु में उन्हें एक एडवरटाइजिंग एजेंसी में काम मिल गया। बेंगलुरु की वह एडवरटाइजिंग एजेंसी उनकी जिंदगी का बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी एजेंसी में काम करते हुए उनकी मुलाकात एक ऐसे इंसान से हुई जिसने उनके अंदर के उस छुपे हुए कलाकार को पूरी तरह से पहचान लिया। वो इंसान कोई और नहीं भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर हैं। नाना पाटेकर ने राज के हुनर को बहुत करीब से देखा और उन्हें एक बहुत ही पक्की सलाह दी। नाना ने राज से कहा, तुम्हारा यह असली हुनर एडवरटाइजिंग की इस दुनिया के लिए नहीं बना है। तुम्हें तुरंत मुंबई जाना चाहिए और वहां फिल्मों में अपनी किस्मत आजमानी चाहिए। नाना पाटेकर की वो बात राज के दिल में गहराई से उतर गई। 1980 के दशक की शुरुआत में [संगीत] राज दिल्ली के रेडियो के लिए कुछ काम कर रहे थे। उसी दौरान किसी काम के सिलसिले में उनका मुंबई आना हुआ। माया नगरी की उस हवा में कुछ तो जादू है जो हर कलाकार को अपनी तरफ खींच ही लेता है। मुंबई में उनके एक दोस्त ने उन्हें एक बहुत ही काम की खबर दी। दोस्त ने बताया कि मशहूर फिल्मकार केतन मेहता अपनी नई फिल्म के लिए कुछ नए कलाकारों की तलाश कर रहे हैं और ऑडिशन चल रहे हैं। यह सुनकर राज बिना कोई समय गवाए सीधे केतन मेहता के ऑफिस पहुंच गए। [संगीत] जब राज वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वहां पहले से ही एक दुबला पतला लड़का बैठा हुआ है। राज पूरे आत्मविश्वास के साथ उस लड़के के पास गए और बोले कि मैं केतन मेहता से मिलने आया हूं। वे मेरा ऑडिशन लेने वाले हैं। उस लड़के ने बहुत ही मासूमियत से राज की तरफ देखा और जवाब दिया कि वे तो मेरा ऑडिशन लेने वाले हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि राज के सामने बैठा वह लड़का कोई और नहीं आज के दौर के सुपरस्टार आमिर खान थे। इन दोनों ही कलाकारों ने वहां अपना बेहतरीन ऑडिशन दिया। केतन मेहता इन दोनों के काम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी फिल्म के लिए इन दोनों को ही चुन लिया। केतन मेहता वही डायरेक्टर हैं जिन्होंने मशहूर सीरियल मिस्टर योगी बनाया था। इस सीरियल के मशहूर कलाकार मोहन गोखले पर हमने एक बेहतरीन वीडियो बनाई है। जिसकी लिंक आपको [संगीत] डिस्क्रिप्शन बॉक्स और वीडियो के अंत में दिखने वाले कार्ड्स में मिल जाएगी। आवाज तो पहचान ली है। अब जरा शक्ल भी दिखा दीजिए। डर जाओगे। क्यों? ऐसी क्या बात है? मेरे चेहरे पर चेचक के मोटे-मोटे दाग हैं। आंख है कांच की, टेढ़ा है नाक, फटे हुए। बोलो। देखोगे? हां। डोगे तो नहीं? नहीं। कोशिश करूंगा। [संगीत] [संगीत

] 1984 में आई फिल्म होली राज और आमिर की यह पहली फिल्म थी। मराठी के मशहूर लेखक महेश एल कुंचवार के नाटक पर बनी यह बहुत ही गंभीर और गहरी फिल्म है। कॉलेज के छात्रों और प्रिंसिपल के बीच होने वाले टकराव, बगावत और एक छात्र की आत्महत्या जैसे खौफनाक घटना पर आधारित इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, ओमपुरी, श्रीराम लागो, दीप्ति नवल और आशुतोष गोवारीकर जैसे दिग्गज कलाकारों की पूरी फौज मौजूद रही। राज ने [संगीत] इस फिल्म में एक बांगी छात्र की भूमिका बहुत ही शानदार तरीके से निभाई। इसी फिल्म से बॉलीवुड को राज रुशी और आमिर खान के रूप में दो बहुत ही बेमिसाल कलाकार मिल गए। नाम किसने दिया यार? पता लगाना चाहिए। लगाना चाहिए नहीं लगाना पड़ेगा कि डाल देंगे। मजबूरी जाएगी क्या? इतना जब हो ही गया तो हो जाए। तो फिर निकाले मैं इसमें से कुर्सियां। यार और भी भड़क जाएंगे। छोड़ दे अब यार तू रख ले दे बे। अब परवाह नहीं समझा। यार होली की होली चलेगी बॉस होली चलेगी होली के बाद राज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने अपने किरदारों के साथ हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की। [संगीत] 1986 में एन चंद्रा की फिल्म अंकुश आई। इस फिल्म में राज ने एक समलैंगिक लड़के का किरदार निभाया। उस दौर में जब मुख्यधारा के अभिनेता ऐसे किरदारों से दूर भागते थे। राज ने अपनी बेबाक एक्टिंग से सबको हैरान कर दिया। ए शशि जी अपने मित्रों से कह दीजिए मुझे मजाक बिल्कुल पसंद नहीं। बिल्कुल। [हंसी] इसके बाद 1990 में उन्होंने रामगोपाल वर्मा की कल्ट क्लासिक फिल्म शिवा में नागार्जुन के दोस्त की बेहतरीन भूमिका निभाई। आशा देखने में भोलीभाली, सीधी साधी। लेकिन ओके। फिल्मों के अलावा राज ने टेलीविजन की दुनिया में भी अपना एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल किया। 90 के दशक में जब दूरदर्शन का सुनहरा दौर चल रहा था। राज उस दौर के सबसे व्यस्त और लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक बन गए। उन्होंने मशहूर लेखक सुनील गंगोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित और सोमेन बनर्जी द्वारा निर्देशित सीरियल युगांतर में काम किया। इस सीरियल में उनके साथ नवीन निश्चल, मोहन गोखले, बीना बनर्जी और अजीत कपूर जैसे दिग्गज कलाकार मौजूद रहे। बैठे-बैठे तुम्हारा चेहरा निहारते रहने का समय नहीं है मेरे पास सरोज। [संगीत] अरे अपने को छोड़ तू। दूरदर्शन के दर्शकों के लिए राज ऋषि एक बहुत ही जाना पहचाना चेहरा बन गए। उन्होंने शिकस्त, कह ककंशा, तहकीकात, नजराना, गुब्बारे और दिलगी जैसे शानदार सीरियल्स में काम किया। उनका एक और बहुत ही मशहूर काम मृत्युंजय सीरियल में रहा। शिवाजी सावंत के मशहूर उपन्यास पर आधारित और डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी द्वारा निर्देशित इस ऐतिहासिक सीरियल में राज ने कर्ण का किरदार इतनी गहराई से निभाया कि लोग उनके मुरीद हो गए। मैं कर्ण उन समस्त पराक्रमों को दिखाने के लिए तत्पर हुए। जो इस सभा में युवराज अर्जुन ने कर दिखाया। उन्होंने गृह लक्ष्मी का जिन नामक लोकप्रिय सीरियल में भी जिन की भूमिका निभाकर बच्चों और बड़ों सबका खूब मनोरंजन किया। बाद में प्राइवेट चैनलों के आने के बाद दूरदर्शन का रुतबा थोड़ा कम हुआ।

फिर भी कलर्स टीवी के मशहूर शो मधुबाला एक इश्क एक जुनून में काम करके राज ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी अपनी जगह बनाए रखी। साल 2021 में आई वेब सीरीज भ्रम में भी उनके काम की खूब तारीफ हुई। राज का हुनर किसी एक भाषा या माध्यम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने [संगीत] असमिया फिल्म एक और ने देखा नोदिर के सिपारे में काम किया। हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता [संगीत] फिल्म स्लम डॉग मिलेनियर के साथ अमेरिकन डे लाइट और परजानिया जैसी बेहतरीन अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। साल 2019 में उन्होंने बतौर डबिंग आर्टिस्ट भी काम किया। हॉलीवुड फिल्म डंबो के हिंदी वर्जन में उन्होंने मशहूर अभिनेता माइकल किटन के किरदार को अपनी दमदार आवाज दी। साल 2017 में वे कोणार्क सारंगी के हिंदी गाने घर जाना है कि म्यूजिक वीडियो में भी नजर आए। [संगीत] राजऋषि एक बहुत ही जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। उन्हें प्रकृति और शांत माहौल से बहुत गहरा लगाव है। वे अक्सर पहाड़ों और जंगलों में समय बिताना पसंद करते हैं। उन्होंने रानीखेत में मौजूद फाउंडेशन फॉर द कंटेंप्लेशन ऑफ नेचर के मुख्यालय वृक्षालय हिमालयन सेंटर का भी दौरा किया है। जो प्रकृति के प्रति उनके प्रेम को साफ जाहिर करता है। पर्दे पर वे कितने भी खूंखार विलेन या गंभीर किरदार निभाए लेकिन असल जिंदगी में वे एक बहुत ही शांत और सुलझे हुए इंसान हैं। राजद जोशी का यह शांत और प्रकृति से जुड़ा हुआ स्वभाव उनके व्यावहारिक जीवन और पारिवारिक रिश्तों में बहुत गहराई तक नजर आता है। माया नगरी के इस चकाचौंध भरे सफर में उनका सबसे दिलचस्प पन्ना आमिर खान के खानदान से ही जुड़ा हुआ है। जिस आमिर खान के साथ वे होली फिल्म के ऑडिशन में पहली बार मिले थे। किस्मत ने उन्हें उसी आमिर खान का जीजा बना दिया। हुआ यूं कि 1988 में मंसूर खान अपनी फिल्म कयामत से कयामत तक बना रहे थे। इस फिल्म में आमिर खान मुख्य हीरो के तौर पर काम कर रहे थे और राजी ने श्याम प्रकाश नाम का बहुत ही अहम किरदार निभाया था। यह फिल्म राज और आमिर दोनों के ही करियर का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। बात यह है कि तुम्हारे माता-पिता इसके साथ तुम्हारा रिश्ता जुड़ रहा है। अच्छा [हंसी] उन्हें क्या पता कि ये रणधीर सिंह की बेटी है। कयामत से कयामत तक की शूटिंग के दौरान एक बहुत ही मशहूर और दिलचस्प किस्सा है जो आज भी बॉलीवुड के गलियारों में सुनाया जाता है।

साल 2023 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था। उस वीडियो में राज और आमिर खान आधी रात को मुंबई की सुनी सड़कों पर ऑटो रिक्शा के पीछे अपनी इसी फिल्म कयामत से कयामत तक के पोस्टर चिपकाते हुए नजर आ रहे थे। अपने करियर की शुरुआत में अपनी फिल्म को लोगों तक पहुंचाने के लिए दोनों ने सचमुच सड़कों पर उतर कर पसीना बहाया था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान राजद जुशीच की मुलाकात नजहद खान से हुई। नजहद खान महान फिल्मकार नासिर हुसैन की बेटी हैं। नासिर हुसैन के भाई ताहिर हुसैन भी जानेमाने अभिनेता और निर्माता रहे हैं और ताहिर हुसैन के बेटे ही आमिर खान हैं। इस [संगीत] पारिवारिक रिश्ते के हिसाब से नजहद खान आमिर खान की चचेरी बहन लगती हैं। जब फिल्म के सेट पर राज और उजहद की पहली बार पहचान हुई तब शायद आमिर खान ने भी सपने में नहीं सोचा होगा कि पर्दे पर उनके साथ काम करने वाला यह नौजवान कलाकार बहुत ही जल्द उनके परिवार का ही एक अटूट हिस्सा बन जाएगा। राज और नुजाद का रिश्ता प्यार में बदल गया और दोनों ने 1989 में शादी कर ली। [संगीत] यहां राज ऋषि के जीवन की एक और बहुत ही हैरान कर देने वाली बात सामने आती है। [संगीत] राज रुचशी आज के मशहूर बॉलीवुड स्टार इमरान खान के सौतेले पिता हैं। असल में [संगीत] राज से शादी करने से पहले नुजहत की शादी अनिल पाल नाम के शख्स से हुई थी और वे लोग अमेरिका में जाकर बस गए थे।

इसी वजह से इमरान खान जन्म से ही अमेरिकन नागरिक हैं। [संगीत] इमरान के जन्म के कुछ महीनों बाद ही नुसहत अपने पति अनिल पाल से अलग हो गई [संगीत] और वापस मुंबई आकर बस गई। शादी के बाद राज ने इमरान को अपने सगे बेटे से भी बढ़कर प्यार दिया। राज और नजहदत की अपनी कोई संतान नहीं हुई। लेकिन राज ने इमरान की परवरिश में कोई कमी आने नहीं दी। खुद इमरान खान ने भी कई इंटरव्यूज में इस बात को खुले दिल से स्वीकारा है कि राज ऋषि उनके लिए हमेशा पिता के समान रहे हैं। इमरान का कहना है कि जब वे बड़े हो रहे थे तब राज ही उनके जीवन के एक असली पिता की छवि थे। राज भी इमरान के बहुत करीब रहे हैं। जब इमरान ने अपने मामा आमिर खान के प्रोडक्शन की फिल्म जाने तू या जाने ना में बॉलीवुड से डेब्यू किया तो राज उनकी कामयाबी से फूले नहीं समाए। सब कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। 16 साल तक एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिताने के बाद साल 2005 के आसपास राज और नुजहत के रास्ते हमेशा के लिए अलग हो गए। दोनों ने बहुत ही शांति से एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया। कयामत से कयामत तक की शानदार कामयाबी के बाद राज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने आमिर खान के साथ भी कई बेहतरीन फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया। साल 2001 में आई ऐतिहासिक और ब्लॉकबस्टर फिल्म लगान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आशुतोष गोवारेकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राज ने इस्माइल खान का वो बेहद दमदार किरदार निभाया था जो भुवन की क्रिकेट टीम का एक बहुत ही अहम और मजबूत हिस्सा था।

लगान बॉक्स ऑफिस पर बहुत ही हिट साबित हुई और इस फिल्म को ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट किया गया। [संगीत] अक्सर मीडिया वाले और आम लोग राजदशी से एक सवाल जरूर पूछते हैं। लोग उनसे पूछते हैं कि उन्होंने और आमिर खान ने अपना फिल्मी सफर बिल्कुल एक साथ शुरू किया था। आज आमिर खान कामयाबी के उस शिखर पर पहुंच गए हैं जहां उन्हें बॉलीवुड का मिस्टर परफेक्शनिस्ट और सुपरस्टार कहा जाता है। और आज आज भी सपोर्टिंग किरदारों तक ही सीमित रह गए हैं। क्या उन्हें इस बात को लेकर कभी बुरा नहीं लगता? [संगीत] इस सवाल का जवाब राज ने एक इंटरव्यू में बहुत ही बेबाकी और सुलझे हुए अंदाज में दिया। राज ने कहा था कि अगर मेरे अंदर इस बात को लेकर जरा सी भी कड़वाहट होती तो मेरी जिंदगी नर्क बन जाती। लोग मुझे आज भी टोकते हैं और कहते हैं कि देखो आमिर कहां पहुंच गया। लेकिन मुझे इस बात का जरा सा भी दुख नहीं होता। हम दोनों ने एक साथ शुरुआत जरूर की थी। लेकिन एक अभिनेता के तौर पर हम दोनों का सफर और हमारी मंजिलें बिल्कुल अलग-अलग रही हैं। यह जवाब साफ दिखाता है कि राजशी असल में कितने संतुष्ट और सकारात्मक इंसान हैं। उन्हें इस माया नगरी की झूठी चकाचौंध से कोई लेना देना नहीं है। [संगीत] राज का सफर आज भी बिना थके बदस्तूर जारी है। उन्होंने माचिस, कृष्णा कॉटेज, [संगीत] लव आजकल जैसी 100 से भी ज्यादा फिल्मों में अपनी अदाकारी का बेमिसाल जादू बिखेरा है।

[संगीत] साल 2024 में आई यामी गौतम की फिल्म आर्टिकल 370 में उनके निभाए गए किरदार ने एक बार फिर सबका दिल जीत लिया। यह फिल्म कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के गंभीर विषय पर बनी थी और चुनाव से ठीक पहले रिलीज हुई थी। इस फिल्म में राज जोशी की अदाकारी ने दर्शकों और समीक्षकों दोनों से खून वाहवाही लूटी। उनका हर किरदार उनकी हुनर की एक नई परत खोलकर सामने रखता है। धुरंधर 2 का वह खूनखार शमशाद हसन हो या लगान का वह सीधा-साधा इस्माइल खान। दाद जोशी ने यह साबित कर दिया है कि एक सच्चा कलाकार कभी किसी एक सांचे में बंधकर नहीं रह सकता। फिल्मी कलाकारों की यही सबसे बड़ी खूबी होती है कि वह हर किरदार को अपनी आत्मा से सींचते हैं। चाहे उन्हें एक बड़ा स्टारडम मिले या ना मिले। तो दोस्तों, यह थी दिल्ली की गलियारों से लेकर हॉलीवुड और धुरंधर 2 तक का शानदार सफर तय करने वाले एक बेहद मंझे हुए और जमीन से जुड़े हुए कलाकार नाग [संगीत] जोशी की पूरी कहानी। मैं थी आपके साथ आपकी अपनी अंकिता। बहुत ही जल्द एक और नई और दिलचस्प कहानी के साथ आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए आप अपना और अपनों का ख्याल रखिए। नमस्कार। ओम

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