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इस खास गाने के लिए लगी थी आशा भोंसले और रफी पर 500 रुपये की शर्त, पूरा किस्सा

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दिग्गज गायिका और पद्म विभूषण [संगीत] से सम्मानित आशा भोसले का निधन संगीत जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। आशा भोसले ने एक से बढ़कर एक गाने इंडस्ट्री को दिए। 1966 की फिल्म तीसरी मंजिल का सुपरहिट गाना आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा और उस पर ₹500 की दोस्ताना शर्त का दिलचस्प किस्सा आज भी लोग याद करते हैं। इस गाने की एक कठिन लाइन गातेगाते आशा भोसले की सांसे फूल गई थी।

लेकिन यह गाना बाद में सुपरहिट साबित हुआ [संगीत] और आज भी याद किया जाता है। चलिए आपको बताते हैं फिल्म तीसरी मंजिल के गाने से जुड़ा यह किस्सा क्या है? यह दिलचस्प घटना साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म तीसरी मंजिल के सुपरहिट गाने आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि इस गाने की एक खास लाइन बेहद कठिन थी जिसे सही सुर और सही एनर्जी के साथ गाना आसान नहीं था।

यही वजह बनी कि इस गाने को लेकर एक दोस्ताना प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। ₹500 की लगी थी शर्त। म्यूजिक डायरेक्टर आर डी बर्मन और फिल्म मेकर नासिर हुसैन के बीच ₹ 5500 की शर्त लग गई कि इस चुनौतीपूर्ण हिस्से को बेहतर तरीके से गा कौन पाएगा? आशा भोसले या फिर मोहम्मद रफी। उस दौर में ₹500 की रकम भी काफी बड़ी होती थी। एक रियलिटी शो के दौरान खुद आशा भोसले ने इस किस्से को साझा किया था।

उन्होंने बताया कि गाने की लाइन ओ आजा आजा आ उनके लिए बेहद मुश्किल थी। इसे परफेक्ट बनाने के लिए उन्होंने कई दिन तक लगातार अभ्यास किया। यहां तक कि एक बार जब वह कार में बैठकर इस गाने की प्रैक्टिस कर रही थी तो उनकी सांसे इतनी तेज चलने लगी कि ड्राइवर घबरा गया। उसे लगा कि उनकी तबीयत खराब हो गई है और वह उन्हें फटाफट अस्पताल ले जाने की बात करने लगा। भले ही उस वक्त यह गाना आशा भोसले के लिए चुनौती बना लेकिन रिलीज के बाद यह जबरदस्त हिट साबित हुआ। आज भी यह गीत क्लासिकल हिट्स में गिना जाता है और संगीत प्रेमियों के दिलों में इसकी खास जगह है।

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