कस्टोडियल डेथ केस में नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई गई है। मामला पिता बेटे की मौत से जुड़ा है। फैसला तमिलनाडु में मददुरई के फर्स्ट एडिशनल सेशंस कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बाप बेटे की मौत नेचुरल नहीं थी और ना ही उन्हें पहले से कोई बीमारी थी। कोर्ट ने माना कि दोनों की मौत कस्टडी में हुई वायलेंस की वजह से हुई है
केस में 10 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था। नौ को मौत की सजा सुनाई गई है और 10वें आरोपी की कोविड से मौत हो गई थी। मामला तमिलनाडु के सतनकुलम का है। केस की शुरुआत होती है साल 2020 से। देश में कोविड लॉकडाउन लगा था। सड़कों पर सन्नाटा था। घर से निकलना मना था। 19 जून 2020 की रात करीब 7:30 बजे 58 साल के बिजनेसमैन पी जयराज को पुलिस ने
हिरासत में ले लिया। आरोप लगा कि जयराज ने लॉकडाउन नियम को तोड़ा है। सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक जयराज के 31 साल के बेटे जे बेनिक्स को जैसे ही यह खबर मिली वो पिता को लेने के लिए सतनकुलम पुलिस स्टेशन पहुंचा। थाने पहुंचकर बेनिक्स ने देखा कि सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल जयराज को बुरी तरह से पीट रहे हैं। बेनिक्स ने सवाल किया कि उसके पिता को क्यों पकड़ा गया है?
बेनिक्स ने पिता को बचाने के लिए बीच में वह आया तो पुलिसकर्मियों ने उसे भी पकड़ लिया और दोनों बाप बेटे को हिरासत में रख लिया। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जयराज और बेनिक्स को इसलिए पीटा गया ताकि उन्हें यह सबक सिखाया जा सके कि पुलिस के सामने पेश कैसे आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को कई घंटों तक पीटा गया। उनके कपड़े भी उतार दिए गए थे। दोनों को बारी-बारी से बुलाया जाता।
लकड़ी की टेबल पर उनके सिर झुकाए जाते। वह हिल ना पाए इसलिए उनके हाथ पैरों को कसकर जकड़ा जाता और फिर उसी पोजीशन में लाठी से उन्हें पीटा जाता था। उन्हें इस बात के लिए भी मजबूर किया गया कि वह अपने खून को खुद ही साफ करें। फर्श पर पड़े खून को अगले दिन सफाई कर्मचारी से साफ कराया गया ताकि सबूत मिटाया जा सके। खून से सने कपड़े को अस्पताल के डस्टबिन में फेंक दिया गया था।
जयराज के रिश्तेदार ने बताया कि जब दोनों का शोषण हो रहा था तब वह थाने के बाहर ही बैठे थे। अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस ने उनसे डार्क कलर के कपड़े मंगवाए थे ताकि खून नजर ना आए। जयराज और बेनिक्स के खिलाफ फर्जी आरोप भी लगाए गए थे। पहले उन्हें कोविड पट्टी सब जेल में रखा गया लेकिन बाद में जब हालत ज्यादा बिगड़ गई तो एक सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।
22 जून को ज्यादा खून बहने और हेमरेज की वजह से बेनिक्स की मौत हो गई थी और अगले दिन जयराज ने भी दम तोड़ दिया था। मौत की खबर जैसे ही बाहर आई पूरे राज्य में बवाल मच गया। पुलिस ब्रूटिटी की बातें होने लगी। लोगों ने जमकर विरोध किया। तब जाकर 24 जून 2020 को मद्रास हाईकोर्ट की मदद बेंच ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।
सीबीआई को जांच के आदेश दिए गए। जांच में सतनकुलम थाने की दीवारों, टॉयलेट, एसएओ के कमरे और लाठियों से डीएनए सैंपल को लिया गया जो जयराज और बेनिक्स से मैच हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी बताया गया कि मौत की वजह पिटाई है। सीबीआई ने 10 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया। उनमें से एक की अगस्त 2020 में कोविड से मौत हो गई थी। 25 सितंबर 2020 को सीबीआई ने बाकी नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की।
इसी केस में 6 साल बाद फैसला आया। 23 मार्च को जज जी मुथु कुमारन ने माना कि पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप सही हैं और उन्होंने सबूत मिटाने की भी कोशिश की थी। बारे बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक केस में 50 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए हैं जो यह सिद्ध करने के लिए काफी थे कि पिता बेटे की मौत पुलिस टॉर्चर की वजह से हुई है और अब नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा मिली है। कोर्ट के फैसले पर आपकी क्या राय है कमेंट करके बता सकते हैं।