मध्यपुर में जंग और उसकी आंच अब पहुंच चुकी है पाकिस्तान तक। तेल की टंकियां सूख रही हैं। गैस के सिलेंडर खाली हो रहे हैं और महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। क्या पाकिस्तान ऊर्जा संकट के सबसे बड़े तूफान में फंस चुका है? और क्या यह हालात उसे आर्थिक तौर पर और भी गहरे संकट में धकेल देंगे। नमस्कार, मैं हूं दीपिका पांडे और आप देख रहे हैं जागरण न्यूज़। मध्य पूर्व में छिड़ी जंग अब सिर्फ ईरान, इजराइल या अमेरिका तक सीमित नहीं रही। इसका असर अबे एशिया के देशों पर भी साफ दिखने लगा है
और सबसे ज्यादा मार पड़ी है पाकिस्तान पर जहां तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित है और हालात इतने खराब हो चुके हैं कि देश के पास सिर्फ कुछ दिनों का ही स्टॉक बचा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार सिर्फ 7 दिन का, डीजल 17 दिन का, पेट्रोल करीब 20 दिन का और एलपीजी तो महज छ दिन की बची है। यानी अगर सप्लाई नहीं आई तो पाकिस्तान में जिंदगी ठहर सकती है। दरअसल इस संकट की सबसे बड़ी वजह है
होम जलडमरू मध्यम जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। लेकिन इस वक्त ईरान की सख्ती के कारण कई तेल टैंकर वहां फंसे हुए हैं और पाकिस्तान के जहाज भी इसी जाम में फंसे हैं। अब सवाल यह है जब तेल नहीं पहुंचेगा तो देश कैसे चलेगा? और शायद इसी डर ने पाकिस्तान सरकार को सख्त फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। पाकिस्तान में महंगाई का बम फूट चुका है।
सरकार ने हाई ऑक्टेन ईंधन पर टैक्स बढ़ाकर ₹100 से सीधा ₹300 प्रति लीटर कर दिया। यानी लग्जरी गाड़ियों में अब पेट्रोल भरवाना जेब पर भारी पड़ने वाला है। वहीं आम जनता को भी राहत नहीं है। पेट्रोल की कीमत ₹266 से बढ़कर ₹321 प्रति लीटर और डीजल ₹280 से बढ़कर ₹335 प्रति लीटर पहुंच चुका है। इसका असर आसमान में भी दिख रहा है। जेट फ्यूल महंगा हुआ तो फ्लाइट टिकट भी उड़ गए।
घरेलू उड़ानों में 2800 से ₹5,000 तक का इजाफा हुआ है और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में तो ₹1,000 से लेकर ₹28,000 तक महंगी हो चुकी हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ब्लैकआउट का खतरा भी मंडराने लगा है। सरकार ने खर्चों में कटौती की। वर्क फ्रॉम होम लागू किया। स्कूल कॉलेज तक बंद करने पड़े लेकिन इन सबके बावजूद संकट थमता हुआ नजर नहीं आ रहा। क्योंकि पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि वो अपने तेल का करीब 70% आयात करता है
वो और वो भी मध्य पूर्व से। ऐसे में अगर जंग लंबी चली तो पाकिस्तान के लिए हालात संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। तो सवाल बड़ा है क्या पाकिस्तान इस ऊर्जा संकट से उभर पाएगा या फिर महंगाई और तेल की कमी उसे एक और आर्थिक संकट में धकेल देगी। फिलहाल जंग की आग ने पाकिस्तान की सांसे जरूर तेज कर दी हैं। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?हमें कमेंट बॉक्स में जाकर जरूर बताइएगा।