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NATO क्यों नहीं छोड़ सकता अमरीका? बुरा फंस गए ट्रंप!

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वी प्रोवाइड [संगीत] यू द प्लेटफार्म टू टर्न योर ड्रीम्स इनू रियलिटी। गिव विंग्स [संगीत] टू योर एस्पिरेशंस विद के आर मंगलम यूनिवर्सिटी। अमेरिकी राष्ट्रपति नाटो को कागज का शेर बता चुके हैं। साथ ही उन्होंने अपने सहयोगियों पर भी लगातार संघर्ष में शामिल होने का ना सिर्फ दबाव बनाया बल्कि ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों पर उनकी मदद ना करने के आरोप भी लगाए। ट्रंप ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं। दरअसल यहां पर ट्रंप जो हैं इस युद्ध में अब अकेले बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं क्योंकि ब्रिटेन ने सीधे तौर पर कहा कि यह हमारा युद्ध नहीं है और अब जब ब्रिटेन ने बड़ा झटका दिया और कई देश ट्रंप के साथ नजर नहीं आ रहे तो ट्रंप ऐसे बयान दे रहे हैं जो सच्चाई से बिल्कुल परे हैं। सर यहां पर क्या आपको संभव लग रहा है कि नाटो से अमेरिका बाहर हो सकता है? देखिए एक्चुअली अमेरिका का कहना यह है कि नाटो का जो आर्टिकल फाइव है वो यह कहता है कि अगर नाटो के किसी देश पर हमला होगा तो वो हमला सभी नाटो देशों माना जाएगा और नाटो देश मिलकर उसका क्या करेंगे? मुकाबला करेंगे। अब यहां पर नाटो के सभी कंट्रीज ने चाहे हम यूके की बात करें, फ्रांस की बात करें, कनाडा की बात, किसी भी देश की हम बात करें, सब ने साथ देने को मना कर दिया। उनका ये है कि अगर हमने साथ दिया तो हम पर भी हमले होंगे और हमारे बेस कैंप भी तबाह होंगे। हालांकि अमेरिका कहना ये था कि आप शामिल भले ना हो कम से कम अपने को यूज़ करने के लिए दे दे लेकिन उसके लिए भी उन्होंने मना कर दिया। अब रही बात नाटो से निकलने की ये बात फैक्ट है कि डोनाल्ड ट्रंप पहले टेन्योर सालों का टाइम था तब की बातें कही कि हम नाटो में क्यों है?

हम नाटो में क्यों रहे? हमें नाटो में रहने का क्या लाभ है? डिफिट है। तब भी उन्होंने इस तरह की बातें कही थी। लेकिन उनके इसी प्रेशर में क्या था कि नाटो के सब ने अपना जो नाटो में कंट्रीब्यूशन अमाउंट है वो 2% से बढ़ाकर 5% तक कर दिया था और कई कंट्रीज ने अपना डिफेंस बढ़ाया ताकि अमेरिका जो अकेला कंट्रीब्यूशन करता है नाटो में 32 देशों में करीब 15% का कंट्रीब्यूशन अमेरिका अकेले का होता था होता है बाकी सब का 2% भी नहीं होता था कोई 1% कोई आधा%5% इतना होता था बढ़ाया चलिए तो बात एक अलग हुई अब यहां पर क्या है कि क्या लीगल देखिए जब जो बाइडन का टेन्योर था जो बाइडन ने एक बिल पास किया एनडीए उस एनडीए में ये किया गया था कि अगर अमेरिका नाटो से निकलेगा तो उसको कांग्रेस की 2 बाय थर्ड मेजॉरिटी चाहिए यानी कि स्पेशल मेजॉरिटी अब अगर प्रेसिडेंट ट्रंप चाहते हैं हम नाटो से बाहर निकले तो उनको कांग्रेस के पास जाना होगा टू थर्ड मेजॉरिटी से पास कराना होगा वो मुझे लगता है पॉसिबल नहीं है कैसे वो सेनेटर सभी सेटर को समझाएंगे कैसे वो कांग्रेस को समझाएंगे। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के लोगों को समझाएंगे और मुश्किल काम होगा। दूसरा तरीका हो सकता है कि एक इमरजेंसी प्रोविजंस का प्रयोग करें प्रेसिडेंट ट्रंप और नाटो की जो ट्रीटी है उसका भी एक आर्टिकल 13 जो परमिशन देता है कि आप एक साल का नोटिस देकर बाहर हो सकते हैं। लेकिन उस स्थिति में भी क्या होगा? आपको सुप्रीम कोर्ट को फेस करना होगा। अगर आप इस एनडी एक्ट को बाईपास करते हैं कुल मिला के मुझे लगता है कि अमेरिका बाहर नहीं निकल सकता। पहली बात लेकिन एक बात मुझे लगती है अगर अमेरिका क्वेश्चन उठाता है तो इससे क्या होगा?

नाटो वीक जरूर होगा। हो सकता है कुछ और देश बाहर निकलने की बात करने लग जाए और रशिया के इनफ्लुएंस में आ जाए। ये हो सकता है कि नाटो कमजोर हो जाए या अमेरिका आगे अगर नाटो पे कोई आपत्ति आती है, विपत्ति आती है तो उस कंडीशन में जैसे आज नाटो कंट्रीज ने अमेरिका का साथ नहीं दिया कल को अमेरिका भी बैकफुट पर आ सकता है तो नाटो पूरा ही बिखर सकता है। ये पॉसिबिलिटीज बनती है। बिल्कुल। और हम बात करें तो सर यहां पर 2016 में ही जब पहली बार राष्ट्रपति पद का ट्रंप चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने नाटो को अप्रचलित करार दिया था। यानी कि पहले से ही वो नाटो के बारे में कई बयान दे चुके हैं। तो अब जो है वो गठबंधन से निकलना चाह रहे हैं। और अब आपने ये कहा कि ट्रंप के लिए मुश्किल होगा क्योंकि उसे पास कराना होगा और वहां पे जो है पेच फंसता हुआ नजर आ सकता है। जी बिल्कुल मैं वही कह रहा हूं कि टू बाय थर्ड मैच्योरिटी पास कराना आसान नहीं होगा। लेकिन एक तरीका है ना सोनम जी? आप साइलेंट बाहर हो जाइए। साइलेंटली बाहर होने का मतलब क्या है कि नाटो के खर्चे कम कर दीजिए आप। नाटो में कहिए मेरे पास बजट नहीं है।

मैं बजट ज्यादा नहीं दूंगा। नाटो किसी देश को रशिया को धमकाता है या कोई और देश आपत्ति विपत्ति आती है तो अमेरिका अपना सपोर्ट करने को मना कर दे। अगर ऐसी कंडीशन अमेरिका करेगा तो नाटो ऑटोमेटिकली बिखर जाएगा और मुझे लगता है ऐसा कि अगर नाटो कंट्रीज पर आगे कोई विपत्ति आएगी तो अमेरिका ऐसा ही करेगा क्योंकि वो एनडीए को बाईपास नहीं कर सकता। जो एनडीए एक्ट है 2/3 मेजोरिटी वाला उसके थ्रू वो बाहर नहीं निकल पाएगा। तो मुझे लगता है कि साइलेंटली अमेरिका बाहर निकलने का प्रयास करेगा नाटो से। बिल्कुल बहुत-बहुत शुक्रिया इस पूरी जानकारी के लिए। सर आपने समझा कि कैसे अब यहां पर रूस के राष्ट्रपति वलादमीर पुतिन की तरफ से यहां दिया गया है बयान कि अब रूस जो है पूरी तरह तैयार है इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए।

हालांकि ईरान की तरफ से अभी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार नहीं मान लेता तब तक यह युद्ध चलता रहेगा। लेकिन यहां पर अब जो पूरा मामला है वो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप है जो लगातार यह दावा कर रहे हैं कि हमने यह युद्ध जीत [संगीत] लिया है। हालांकि उनके दावों पर ईरान जवाब दे रहा है और लगातार जो जवाबी हमले हैं वो ईरान की तरफ से किए जा रहे हैं। चेतावनी ईरान की तरफ से दी जा रही है। ईरान ने सीधे तौर पर कहा है कि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भ्रम है। अब यहां पर जो पेंच फंस रहा है वो यह है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो से बाहर निकल पाएंगे? आपने अभी समझा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किल हो सकता है लेकिन जो रास्ता है कि वो चुपचाप यहां से इस नाटो से बाहर निकल सकते हैं और नाटो के बिखरने की नौबत आ सकती है।

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