आज से करीब 3 दिन पहले जो स्टेटमेंट भारत ने अमेरिका के लिए जारी की थी, ठीक वही स्टेटमेंट आज इटली ने भी अमेरिका के लिए जारी कर दी है। जिसे देखने के बाद तो ट्रंप को सच में अपने आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा होगा कि मेलोनी ने अमेरिका का साथ देने से मना किया। जी हां दोस्तों, इस वक्त बहुत से देश अमेरिका के बजाय भारत की नीति को ज्यादा सपोर्ट कर रहे हैं।
दरअसल, आपको याद होगा कि अमेरिका भारत के बेसिस की ओर देख रहा है क्योंकि ईरान अरब देशों में अमेरिका के जो बेसिस है उन्हें पहले ही निशाना बना चुका है और उनका काफी नुकसान भी करवा चुका है। आप सभी जानते हैं कि क़तर, सऊदी और यूएई जहां-जहां अमेरिका के अहम बेसिस थे, वहां-वहां ईरान ने अपने बैलेस्टिक मिसाइल दाग कर उन्हें फिलहाल के लिए तो नाकाम कर दिए हैं।
ऐसे में अमेरिकी सेना को ऐसे बेसिस की जरूरत है जो ईरानी मिसाइल्स की रेंज से दूर भी हो और ईरान वहां हमले भी ना कर पाए। इसीलिए अमेरिका भारत के ग्रेट निकोबार मिलिट्री बेस, कार निकोबार एयरफोर्स बेस और आईएएस कडंबा नेवल बेस का एक्सेस चाहता था ताकि ईरान पर सटीक बमबारी की जा सके। लेकिन भारत सरकार इसके लिए राजी नहीं हो रही क्योंकि यह जंग भारत की नहीं।
अब भारत के मना करने के बाद ट्रंप ने यूरोपीय देशों से उनके बेस का एक्सेस मांगा था ताकि वह वहां से ईरान को निशाना बनाए। लेकिन देखिए न्यूज़ निकल कर आई है कि स्पेन और फ्रांस के बाद अब इटली ने भी अपने सैन्य बेसेस अमेरिका को देने से इंकार किया है। इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रंप से साफ कहा है कि हम युद्ध में नहीं है और ना ही इसमें शामिल होना चाहते। उनका यह भी कहना है कि ईरान पर जो हमले हो रहे हैं
वो अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के विपरीत किए जा रहे और यूरोपीय सहयोगी इस स्थिति में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रहे। मेलोनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सैन्य हमले के लिए इटली की जमीन या सैन्य अड्डे के इस्तेमाल से पहले सरकार की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है और हम नहीं चाहते कि यूरोप के देश अमेरिका के साथ इस जंग को और भड़काए। बताया जा रहा है
कि फ्रांस ने भी अमेरिका के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल के लिए अमेरिका से इजराइल भेजे जा रहे हथियारों वाले कार्गो विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। यानी कि साफ है कि भारत समेत इस वक्त सभी देश यही चाहते हैं कि यह युद्ध यहीं रुके। जबकि ट्रंप पागलों की तरह इस युद्ध को खींचते जा रहे हैं। जबकि भारत ने शुरू में ही कहा था कि इस युद्ध में कोई भी विजेता नहीं बन सकता। बस नुकसान ही नुकसान होगा जो कि हम सब देख रहे हैं