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2500 मरीन्स रवाना, अब ईरान से जमीन पर सीधे भिड़ेगा अमेरिका..

Hindi Post

वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट में यूएस ने अपनी तरकश से सबसे बेहतरीन तीर निकाल लिया है और उसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस में इस्तेमाल करने जा रहा है। ओपन मैगजीन ने यह रिपोर्ट किया है कि यूएस अपने सबसे बेहतरीन मरीन स्ट्राइकर ग्रुप को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस में भेज रहा है और इसमें शामिल है यूएसएस ट्राइपोली जो फिलहाल जापान में तैनात है। लेकिन ओपन मैगजीन ने यह रिपोर्ट किया है कि उसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस में धीरे-धीरे भेजा जा रहा है। जब ऑलरेडी पर्शियन गल्फ में यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेरा तैनात हैं

तो इस बीच यूएसएस ट्राइपोली को क्यों भेजा जा रहा है और सबसे इंपॉर्टेंट चीज यूएसएस ट्राइपोली जो है वो एमफीबीएस है यानी कि वो समुद्र में और धरती पर दोनों जगह पर ऑपरेट कर सकता है इसके बारे में और भी जानकारी देने के लिए मानस है। जी देखिए यह जैसा आपने बताया एफीबियस है। यह अपने आप में बहुत यूनिक चीज है क्योंकि वो जब तक वो पानी पे रहता है वो पानी पे ऑपरेट करता है।

जैसे ही वह तट के पास पहुंचता है, वह कुछ दूरी तक ना वो तट के ऊपर एक हॉवर क्राफ्ट एक तरीके का नाव होती है एक तरीके की। वो हवर करता है उसके ऊपर। वो जमीन से कुछ ऊपर रहता है। इस वजह से मरींस जो होते हैं अभी कुछ दिन पहले हम सुन रहे थे कि ग्राउंड ऑपरेशंस की बात हो रही है बार-बार कि क्या यूएस बूट्स ऑन द ग्राउंड यानी अपने सैनिक उतारेगा स्टेट ऑफ होर्मूस को खोलने के लिए? क्योंकि मिसाइल हमले करना, फाइटर जेट से हमले करना इससे आप उनको कमजोर तो कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस पे वाकई में कंट्रोल पाना है।

उस पैसेज को आपको क्लियर रखना है जिससे जो ऑयल के प्राइसेस आप देख रही हैं किस तरह से बढ़ रहे हैं। एनर्जी सिक्योरिटी का खतरा पूरी दुनिया पे है। भारत में भी हम देख रहे हैं कि एलपीजी की किस तरह से क्राइसिस हो रही है। किसी से छिपा नहीं है। अगर उनको स्टेट ऑफ फर्मस को खोलना है तो उनको मरीन कोर को भेजना होगा। अब मरीन कोर अपने आप में बहुत फैसनेटिंग है। अमेरिका में जितनी भी मूवीज बनती हैं आर्मी पे बेस्ड जितनी भी फौज पे बेस्ड वहां जितनी भी पिक्चरें वेब सीरीज बनेंगी आपको उसमें मरीन कोर का जिक्र जरूर मिलेगा।

मैं अभी कुछ दिन पहले एक पुरानी मूवी है वाइट हाउस डाउन वो देख रहा था। तो उसमें वाइट हाउस पे कब्जा हो जाता है और उस फिल्म का जो हीरो है वो प्रेसिडेंट से कहता है कि ऐसा करिए आप मरींस को बुलाइए वो इनकी बैंड बजा देंगे। तो मरींस का एक वो मतलब दिमाग में लोगों के है कि मरींस आके कुछ भी कर सकते हैं। वो जैसे हमारे इंडिया में है पैरा एसएफ जैसे बेस्ट ऑफ द बेस्ट जो चुने जाते हैं वैसे ही मरींस हैं।

उनको शारीरिक मानसिक मतलब वो 10 दिन तक बिना खाए रह जाना इस तरह की चीजें वो इतना हार्डली ट्रेंड होते हैं। ना सिर्फ बंदूक चलाना बल्कि एक मरीन हर कम से कम 300 टाइप की चीजों में वो माहिर होता है। वो मार्शल आर्ट्स गाड़ियों को सीधा तो चलाना ही है। हर गाड़ी को वो रिवर्स में भी चला सकते हैं उतनी स्पीड से। मतलब 300 तरह की उनको ट्रेनिंग दी जाती है। अब मरींस के अलावा जो आपने बताया कि यूएसएस ट्राइपोली यह अपने आप में बड़ा यूनिक जहाज है। ये एक तो एफीबियस है जैसा आपने बताया।

दूसरी चीज यह है कि मरींस के पूरे स्ट्राइक कोर को एक साथ कैरी कर सकता है। यानी इसमें सैनिक भी जाते हैं साथ में। तीसरी चीज ये है कि इस पे हेलीकॉप्टर्स रहते हैं। एमए 60 हेलीकॉप्टर होते हैं। उस पे रोमियो हेलीकॉप्टर्स की भी बात सुनने में आ रही है कि शायद अमेरिका ने वो डिप्लॉय और सबसे खास हेलीकॉप्टर जो अमेरिका का है ऑस्प्रे उस हेलीकॉप्टर को मतलब अमेरिका बहुत अपने शान मानता है एक तरीके से कि ये हेलीकॉप्टर हम कुछ भी कर सकते हैं इससे। स्पीड बहुत ज्यादा है। एक्यूरेसी बहुत अच्छी है।

कंट्रोल बहुत अच्छा है। एमुनेशंस बहुत अच्छे हैं उस पे। तो ये जो दो-तीन चीजें हैं ये यूएसएस ट्राइपोली को खास बनाती हैं। मरींस की बात करें हम फिर से तो मरींस का जो ग्रुप है 31 एक्सप्रेडिशनरी ग्रुप कहते हैं इसको। अमेरिका के बाहर जितने भी सैनिक उसके स्टेशंड हैं उसमें मरीन में ये इकलौता ऐसा ग्रुप है मरीन कोर का जो यूएस के बाहर है। यह जापान के ओकिनावा में इनका बेस है। यह वहां से रवाना हो रहे हैं और कम से कम इन एक से दो हफ्ते में। संभवत अब ये किस रास्ते जाएंगे? मिलिट्री है तो क्लासिफाइड होती है चीजें। लेकिन संभवत यह स्टेट ऑफ मलक्का इंडियन ओशियन से होते हुए स्टेट ऑफ होर्मोस के पास पहुंचेंगे

इसके अलावा दो और जहाज हैं इस बेड़े में। ऐसा नहीं है कि यूएसएस ट्राइपोली और मरीन कोर को साथ अकेला लेकर जाएगा। इसमें यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स नाम का एक जहाज है जो यह क्रूज़र है। क्रूज़र आप समझिए सबसे बड़े जो जंगी जहाज होंगे। अब्राहम लिंकन तो खैर अह एयरक्राफ्ट कैरियर है। जेरा फोल्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। लेकिन उसके बाद जो जंगी जहाज कहते हैं जिस पे हथियार लगे होते हैं। अब्राहम लिंकन पे अपने कोई खास हथियार नहीं होते। उसकी सबसे बड़ी ताकत है उसके फाइटर जेट्स जो उस पे तैनात होते हैं।

लेकिन यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स पे जिस तरीके के हथियार लगे होते हैं। हर तरह की मिसाइल्स मतलब खतरनाक से खतरनाक गंस, एंटी एयरक्राफ्ट गंस क्या नहीं है इस पे? एक तरीके से कह दें क्या नहीं है इस पे? तो ये अतिशयोक्ति नहीं होगी मेरे ख्याल से। भारत के पास भी जो क्रूज़ डिस्ट्रयर्स हैं हमारे शानदार जहाज होते हैं। मानना साहब ने पहले भी बताया था कि इस पूरे स्ट्राइककर ग्रुप में 2500 यूएस मरीन सैनिक रहते हैं।

यूएस ट्राइपोली में या यूएसएस ट्राइपोली में या पूरे मरीन स्ट्राइककर ग्रुप में। देखिए जहां तक ये किस तरीके से इनको डिप्लॉय किया जाएगा यह यूएस के ऑपरेशनल डिसीजन होगा। लेकिन हां स्टैंडर्ड तरीका यह है कि इनको यूएसएस ट्राइपोली से ही भेजा जाएगा। साथ में जैसा मैंने बताया कि यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स नाम का एक क्रूजर जाएगा जो बड़े साइज का जंगी जहाज होता है। उससे थोड़े छोटे होते हैं डिस्ट्रयर जिनको हम कहते हैं। यूएसएस रफाइल पैराल्टा नाम का एक जहाज है। ये भी बहुत खतरनाक जहाज माना जाता है। इस पे मिसाइल्स हैं।

क्रूज मिसाइल से लैस है ये। तो इस वजह से और गाइडेड मिसाइल होती हैं इसमें जो बहुत प्रसीजन अटैक कर सकती हैं। बहुत सटीक हमले कर सकती हैं। तो इस वजह से ये जो पूरा बेड़ा है इससे ये आशंका और तेज हो गई है कि यूएस जो ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जो चला रहा है ईरान के अगेंस्ट इजराइल के साथ मिलके क्या वो उसमें अपने बूट्स ऑन द ग्राउंड जो कहते हैं कि जमीन पे अपने सैनिक उतारेगा। क्योंकि बिना उसके अगर आपको चाहे आपका लक्ष्य न्यूक्लियर जो उनका भंडार है जो एनरिच्ड यूरेनियम है

उनको सीज करना हो चाहे आपका लक्ष्य रिजीम चेंज करना हो आपका लक्ष्य कोई भी हो सकता है लेकिन अगर आपको इन दोनों में से कुछ भी करना है तो आपको बूट्स ऑन द ग्राउंड की जरूरत पड़ेगी बिना उसके आप हवाई हमले से नहीं कर सकते क्योंकि आप हवाई हमले करेंगे ईरान भी हवाई हमले करेगा और पूरी तरीके से आप कभी हवाई हमलों में सटीकता की गुंजाइश बहुत कम होती है। हो सकता है कि अब आजकल हम देख रहे हैं

कि रेल लॉन्चर्स और मोबाइल लॉन्चर्स आ गए हैं। यह कह रहे हैं कि हमने उनके बैलेस्टिक मिसाइल के जो लॉन्चर हैं उनको तबाह कर दिए हैं। हो सकता है कि जहां जिस जगह पे ये अटैक कर रहे हैं जिन लॉन्चर्स पे वो मोबाइल लॉन्चर्स हों। वह एक जगह से दूसरी जगह मूव करने में सक्षम हो। इंडिया ने अभी-अभी कुछ दिन पहले टेस्ट किया था कि रेलवे एक ट्रेन पे एक लॉन्चर लगा था मिसाइल का। तो ये बहुत ईरान ने अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी में बहुत तरक्की की है। बहुत शानदार उसने लिक्विड फ्यूल, सॉलिड फ्यूल मतलब हर तरीके के उसने मिसाइल बनाई है। चाहे वो क्रूज हो चाहे बैलेस्टिक हो।

हर तरीके के उसने ड्रस में आप देख ही रही हैं कि किस तरीके से उसके ड्रोंस ने पूरा तांडव मचाया हुआ है एक तरीके से मिडिल ईस्ट में। उसको रोकने के लिए यूक्रेन को बुलाना पड़ा। उन्हीं जेलस्की को जिनको अभी प्रेसिडेंट ट्रंप कुछ दिन पहले वाइट हाउस में कहते हैं कि आप सूट पहन के क्यों नहीं आए? तो इस पे बड़े खैर खैर खबर तो ये भी थी कि रूस भी इंटेल दे ही रहा है। हां रूस देखिए ईरान का एक पारंपरिक दोस्त है रूस और चीन दोनों और रूस के एजेंट्स मतलब जिस होटल्स में हिट कर रहे हैं वो जिन बिल्डिंग्स में हिट कर रहे हैं

उनके ड्रोंस तो ये कुछ थ्योरीज हैं ऐसी कुछ लोग ऐसे टेलीग्राम चैनल्स जो हैं उनके आईआरजीसी के और इंटरनल उसमें ये ऐसा सुनने में आता है कि रूस उनको बताता है कि अमेरिकी सैनिक जो अपने बेस को छोड़कर किस होटल में स्टेशनंड है। किस जगह पे स्टेशन है? क्योंकि सैनिक कभी अलग-अलग नहीं जा सकते। अगर 500 सैनिकों का एक ग्रुप है, हो सकता है कि उनको 25-250 में बांट दिया जाए, लेकिन, ऐसा नहीं कि एक-एक 250 सैनिकों को 250 जगह भेज दिया जाएगा। तो, यह कुछ ना कुछ रूस इसमें जरूर मदद कर रहा है।

प्रेसिडेंट पुतिन पुराने फ्रेंड हैं ईरान के। और यह जो ड्रोंस की बात आती है शाहिद ड्रोंस जो हैं ईरान के सेम इसी का एक वर्जन जेरान टू ये रशिया ऑलरेडी यूज कर रहा है और इन्हीं को तोड़ने में जेलस्की साहब जो हैं हमारे प्रेसिडेंट उनकी बड़ी महारत है कहते हैं तो वो आ रहे हैं मदद करने तो अब देखना यह है कि किस तरीके से क्या इंटल दी जा रही है क्या नहीं क्योंकि इंटल एक ऐसा शब्द है ना कि वो कोई पुख्ता नहीं होती इंटेलिजेंस की ये इंटेलिजेंस है

ये हमारी जानकारी ऐसा कुछ होता नहीं है इंटेलिजेंस जैसा कि ये मतलब एकदम सटीक या तो एक रेड लाइन होती है या तो थोड़ा सा आप उस पे काम करते हो कोई जानकारी आई चार तरह की जानकारी आई चारों पे काम करते हो और किसी पे आपका चांस बैठता है तो इस तरीके से Intel काम करती है। 100% पुख्ता Intel कहीं नहीं होती। हां लेकिन रूस के मामले में मैं ये कह सकता हूं कि रूस की एजेंसियां जो हैं पहले से भी बहुत ज्यादा सतर्क रही हैं।

पहले से बहुत ज्यादा उन्नत रही हैं। कोल्ड वॉर के टाइम उन्होंने अपने आप को मतलब एक तरीके से मंझे हुए खिलाड़ी हैं वो। तो उन्होंने बहुत सॉलिड काम किया है अपने इंटेलिजेंस पे। रूस ने जो एफएसबी है, जीआरयू है। उनकी अलग-अलग ऐसी यूनिट्स है जो बायोपन, केमिकल वेपन एक उनकी यूनिट है। कहते हैं कि जीआरयू की एक यूनिट है। अब वो सीक्रेट एलेक्सी नवलनी को जब ज़हर दिया गया था तो उस समय उसका नाम सामने आया था। कहा गया कि उस वो यूनिट ऐसे हथियार बनाती है कि मतलब आपको टच करेंगे और वो आपको पता नहीं चलेगा और आपके बॉडी के ऑर्गन सड़ने लगेंगे। ऐसी चीजें वो बनाते हैं। ये कहानियां हैं ऐसी लेकिन ऐसा सच में हुआ है

जैसे एक छा लंदन में एक पुतिन के एक विरोधी थे। उनकी उन पे हमला हुआ और एक छाते की पिंच चुभो दी गई उनको और वो उनके ऑर्गन सड़ने लगे। ऐसे ही अलेक्सी नवलनी को एक जहर दिया गया। नर्व एजेंट से उन पे हमला हुआ। तो रूस की इंटेलिजेंस नो डाउट हो सकता है वो ईरान को मदद कर रहे हो क्योंकि ईरान हमेशा से रूस की ओर थोड़ा सा टिल्टेड रहा है और अमेरिका से तो उसके संबंध खासकर इस्लामिक क्रांति के बाद से बिल्कुल अच्छे नहीं रहे हैं।

तो ये एक स्वाभाविक वजह भी है रूस की ओर उसके टिल्ट होने की और चाइना एक ऐसा प्लेयर है जो जिसके लगभगल लगभग जो भी अमेरिका का विरोधी है वो चाइना से उसकी अच्छी बनती है कि ये नेचुरल चीज है। जी मानस वापस से यूएस के मरीन स्ट्राइककर ग्रुप पर आते हैं। थोड़ा विषयंतर हो गया था। लेकिन फिर भी हम यूएस मरीन स्ट्राइककर ग्रुप पर आते हैं। जहां पर यह भेजा जा रहा है, वह स्टेट ऑफ हॉर्मोंस है। हमने अपने पिछली वीडियो में स्टेट ऑफ हॉर्मोंस के बारे में आपको पहले ही बता रखा है। लेकिन फिर भी बताते हैं कि यह वो पैसेज है

जहां से दुनिया भर का 20% जो ऑयल है, यहीं से जाता है। यह इसके नॉर्थ में जो यह पैसेज है, इसके नॉर्थ में ईरान है और साउथ में यूएई और ओमान है। 33 कि.मी. का यह पैसेज है जिसे फिलहाल ईरान ने ब्लॉक कर रखा है। जो भी शिप्स यहां से गुजर रहे हैं उस पर हमले किए जा रहे हैं और इसी वजह से साउथ एशिया के कई देशों को तेल संकट से जूझना पड़ रहा है। इस खबर पर जो भी अपडेट्स हैं हम आप तक पहुंचाते रहेंगे। जानकारी दे रहे थे मेरे साथ मानस। मेरा नाम प्रगति है।

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