क्या एलपीजी गैस के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने की कोशिश की जा रही है? क्या डीप स्टेट ने पीएम मोदी के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा षड्यंत्र शुरू कर दिया है? इस होश उड़ा देने वाली खबर के बारे में आपको वीडियो में बताएंगे। लेकिन सबसे पहले उन तीन बयानों के बारे में जल्दी से जान लीजिए जिन्होंने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। अमेरिकी सेना के पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी डगलस मैक ग्रेगर बोल रहे हैं कि ट्रंप को तुरंत पीएम मोदी से फोन पर बात करनी चाहिए ताकि पीएम मोदी अमेरिका और ईरान के बीच मीडिएशन करवा सके।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत $300 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी। इस बयान के बाद संयुक्त अरब अमीरात के पूर्व डिप्लोमेट का बयान आया। उन्होंने भी कहा कि पीएम मोदी की सिर्फ एक कॉल ईरान और इजराइल की जंग रुकवा सकती है। इसी कड़ी में तीसरा बयान रूस ने दिया। भारत में तैनात रूसी राजदूत ने बयान दिया है कि भारत इतना ताकतवर देश है कि उसे हमसे तेल खरीदने के लिए अमेरिका की परमिशन नहीं चाहिए। ध्यान दीजिए कि यह सारे बयान पिछले कुछ घंटों में ही आए हैं। लेकिन पिछले कुछ घंटों में ही पीएम मोदी को हटाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। कुछ ताकतें हैं जो नहीं चाहती कि पीएम मोदी देश के प्रधानमंत्री रहे।
विपक्षी दलों और डीप स्टेट ने नोटबंदी, किसान आंदोलन और कोरोना काल में पीएम मोदी को हटाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। देश में जमकर अफवाहें फैलाई गई। लेकिन पीएम मोदी और भी ज्यादा मजबूत हो गए। मगर इस बार एलपीजी गैस के नाम पर पीएम मोदी को हटाने के लिए आखिरी दांव खेला गया है। हैरानी की बात देखिए कि जंग जिस इजराइल ने शुरू की थी वहां का विपक्ष तो सरकार के साथ खड़ा है। लेकिन जिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुनिया जंग रुकवाने की मांग कर रही है। उन्हीं के खिलाफ भारत का विपक्ष एकजुट हो गया है।
आप सबसे पहले इस तस्वीर को देखिए। इस तस्वीर में कांग्रेस ने दिखाया है कि पीएम मोदी की वजह से देश एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़ा हो गया है। ऊपर तंज कसते हुए कहा गया है कि यह है पीएम मोदी का मास्टर स्ट्रोक। लेकिन यह जानकर आपके होश उड़ जाएंगे कि कांग्रेस ने लाइन में खड़े इन लोगों की जो तस्वीर डाली है वो तस्वीर 2011 की है। उस समय की जब कांग्रेस सत्ता में थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तस्वीर का फैक्ट चेक कर दिया। यानी पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए कांग्रेस अपने कार्यकाल के समय जो बवाल हुआ था,
उस समय की तस्वीरें अब डाल रही है। 2011 में तो कोई जंग भी नहीं थी। खाड़ी देश भी मौज कर रहे थे। जमकर गैस और तेल का प्रोडक्शन भी हो रहा था। तो उस समय देश एलपीजी सिलेंडर के लिए लाइन में क्यों खड़ा हुआ था? आप याद कीजिए कि उस समय एक एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए आम जनता का कैसा तेल निकल जाता था। मजे की बात देखिए कि 2012 में वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए पेट्रोल और सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए थे। उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि सब्सिडी देने के लिए पैसा पेड़ पर नहीं उगता।
लेकिन आज सिर्फ राजनीति के लिए भारत में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि मानो भारत के हालात ईरान से भी बदतर हो गए हैं। हमारा मानना है कि संकट की घड़ी में राजनीति नहीं बल्कि एकजुटता होनी चाहिए। ₹250 में ट्वीट करने वाले इन्फ्लुएंसर्स ऐसा माहौल बना रहे हैं कि मानो पूरा भारत एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़ा है। जर्मनी में बैठे कुछ ज्ञानी तो अब एलपीजी और पेट्रोलियम एक्सपर्ट बन गए हैं।
एक तरफ जहां पूरी दुनिया को सिर्फ पीएम मोदी पर भरोसा है। उसी समय भारत के विपक्षी दल और फर्जी इन्फ्लुएंसरर्स यह बोल रहे हैं कि पीएम मोदी ने देश को बर्बाद कर दिया है। यह हाल तो तब है जब पीएम मोदी ने सरेआम आकर बोला है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी परिस्थितियों के बीच भी हम अपने लोगों के हितों की रक्षा करेंगे। जाहिर सी बात है कि तेल और नेचुरल गैस के भंडारों पर बैठे देशों में जंग छिड़ेगी तो गैस और तेल की शॉर्टेज होगी।
उनके दाम भी बढ़ेंगे। लेकिन जिस तरह से अभी तक दूसरे देशों पर इसके बुरे प्रभाव पड़े हैं, वैसा दुष्प्रभाव अभी तक भारत पर नहीं पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद [संगीत] पीएम मोदी को बदनाम करने की भरपूर कोशिशें शुरू हो गई हैं। राजनीति करने के लिए कई मुद्दे हैं। लेकिन जब देश की सुरक्षा की बात आए तो सबको एकजुट होना चाहिए।