ईरान से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। पहले दावा किया गया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामन के साथ उनकी पत्नी मंसूरहा खोज इस्तेहा की भी इजराइल अमेरिका के हमलों में मौत हो गई है। लेकिन अब एक ऐसी खबर आई जिसने सबको हिला कर रख दिया। जी हां, इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉप्स से जुड़े मीडिया संगठन फार्स न्यूज़ एजेंसी ने गुरुवार को दावा किया है कि मंसूरे खोज इस तरह जिंदा है और उनकी मौत की खबरें पूरी तरह से गलत थी।
इस स्पष्टीकरण के बाद उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है। जिनमें कहा जा रहा था कि हालिया हमलों में खामिनाई के परिवार को बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति बनी हुई है और इस संघर्ष को अब 13 दिन पूरे हो चुके हैं। इसी दौरान खबरें आई थी कि युद्ध की शुरुआत में हुए अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खमनई की मौत हो गई थी। इन खबरों के बाद कई सरकारी और क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उनकी पत्नी भी हमले में मारी गई है। लेकिन गुरुवार को स्थिति उस समय बदल गई जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुस्ताबा खामनाई ने अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में उन्होंने अपनी मां की मृत्यु का कहीं भी उल्लेख यानी कि जिक्र नहीं किया। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर मंसूरेहा खोजा स्नेहा के साथ वास्तव में क्या हुआ?
इसी पृष्ठभूमि में फास्ट न्यूज़ ने स्पष्ट किया है कि उनकी मौत की खबरें अफवाह थी और वह जिंदा है। मंसूरहा खोजास्त का जन्म ईरान के एक बेहद धार्मिक और पारंपरिक परिवार में हुआ था। उनके पिता ईरान के जानेमाने कारोबारी माने जाते थे। साल 1964 में उनकी शादी अयातुल्लाह अली खामिनई से हुई थी। उस समय खामनाई एक युवा धार्मिक छात्र और उभरते हुए धर्म गुरु थे। समय के साथ-साथ खामनाई ईरान की राजनीति और धार्मिक नेतृत्व के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए। मंसूरहे और खामनाई के कुल छह बच्चे हैं। इनमें चार बेटे और दो बेटियां शामिल हैं। उनके बेटों के नाम मुस्तफा, मुस्तफा, मसूद और मेसम है। जबकि बेटियों के नाम बोस और खौदा बताए जाते हैं।
हाल ही में उनके बेटे मुस्तफा खामेनई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया। जिसके बाद देश की सत्ता और धार्मिक नेतृत्व अब उनके हाथों में आ गया। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच यह खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि खामियानाई परिवार ईरान की सत्ता का सबसे बड़ा प्रभावशाली केंद्र रहा है। ऐसे में परिवार से जुड़ी हर खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरों और अफवाहों का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका सीधा-सीधा प्रभाव राजनीति पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस खबर ने पूरी दुनिया भर में हलचल मचा दी है और माना जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेजमीन ने याहू की भी चिंता बढ़ा दी है। युद्ध के 13वें दिन आई इस सफाई ने यह साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकट में जानकारी और अफवाहों की लड़ाई भी उतनी तेज चल रही है जितनी कि असली जंग। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव और असर पड़ता है। अमेरिका इजराइल और ईरान युद्ध के बीच एक नया मोड़ सामने आया है।
ईरान ने तीन शर्तें रख दी हैं। यह ऐसी शर्तें हैं कि अमेरिका अगर मानता है तो ईरान हमला करना रोक देगा। लेकिन यह ऐसी शर्तें हैं जो शायद अमेरिका माने ही ना। क्योंकि अगर अमेरिका यह मानता है तो पूरी दुनिया में उसकी साख पर दांव लग सकता है क्योंकि अमेरिका अपने दबाव के लिए ही जाना जाता है और अमेरिका ने कहा था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन करेगा। ऐसा होता तो दिखाई नहीं दे रहा। ईरान हमले पर हमला कर रहा है और अब ईरान ने कह दिया है कि युद्ध रोक देंगे। लेकिन पहले यह तीन शर्तें मान कर दिखाओ। मान गए तो हम भी मान जाएंगे।
चलिए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि ईरान ने आखिर कौन सी तीन शर्तें रख दी हैं जिससे अमेरिका असमंजस में पड़ गया है क्योंकि अमेरिका चाहता है युद्ध अब रुक जाए क्योंकि उसके हालात बस से बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि कैसे तैसे किसी बहाने युद्ध से वह पीछा छुड़ा ले। ईरान अब तक कह रहा था कि हम युद्ध तब खत्म करेंगे जब हम चाहेंगे। शुरू आपने किया है। मारेंगे तब तक मारेंगे जब तक बदला पूरा नहीं होगा। आठ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नेस्तानाबूद कर दिया और अब तीन बड़ी शर्तें रख दी। देखिए आखिर ये शर्तें हैं क्या? और क्या अमेरिका मानेगा? मानेगा नहीं तो मार खाएगा। आखिर अमेरिका करें तो क्या करें? चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह तीन शर्तें हैं क्या?
दरअसल ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजकियान ने बुधवार को 28 फरवरी से जारी इस भीषण जंग को रोकने के लिए ईरान की तीन शर्तें बताई हैं। उन्होंने यह तीन शर्तें बताते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मान्यता देनी होगी और यह गारंटी देनी होगी कि देश पर भविष्य में हमले नहीं होंगे। ईरान की तीन शर्तें। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पेजिशकियान ने कहा कि जंग का हल सिर्फ इन तीन शर्तों के जरिए ही निकलेगा। पजिशियान ने लिखा इस जंग को जिसे यहूदियों और अमेरिका ने शुरू किया उसे खत्म करने का एकमात्र तरीका है ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध का हरजाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना। यह तीन बड़ी शर्तें हैं।
पहली शर्त है कि ईरान के कानूनी अधिकार को मान्यता दी जाए। युद्ध का हरजाना भी दिया जाए। भविष्य में हमले ना किया जाए इसका पक्का प्रमाण दीजिए। वहीं अब दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जीतने का दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान में अब सैन्य लक्ष्यों के नाम पर व्यवहारिक रूप से कुछ भी नहीं बचा। ट्रंप ने एक्सओस को दिए एक फोन इंटरव्यू में कहा कि युद्ध बहुत शानदार चल रहा है। हम अपने निर्धारित समय से काफी आगे हैं। उन्होंने बताया कि हमलों ने उम्मीद से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।