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अमेरिका-इजरायल के हमले के वक्त सुरक्षित जगह क्यों नहीं गए थे खमेनेई? ईरान डिप्लोमेट ने क्या बताया?..

Hindi Post

वेस्ट एशिया में जंग की सुगबुगाहट तेज हो चुकी थी। इजराइल और अमेरिका के हमलों का खतरा बढ़ रहा था। ऐसे में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामिनई को उनके सहयोगी बार-बार कह रहे थे कि वे अपने तेहरान वाले घर को छोड़कर किसी सुरक्षित जगह पर चले जाएं। लेकिन खामिनई ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक ईरान के 9 करोड़ लोगों के लिए सुरक्षित जगह नहीं है तब तक वे अकेले अपनी सुरक्षा के लिए बंकर में नहीं जाएंगे। आखिर वे अपने घर में ही रहे जहां बाद में हमले में उनकी मौत हो गई। खामिनई के करीबी तो यही कहते हैं।

अब सवाल यह कि खामिनई किसी सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं गए? इसका जवाब दिया है खामिनई के करीबी रहे अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने। उन्होंने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर आया अली खामिनई ने तेहरान में अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित जगह या बंकर में जाने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक ईरान के सभी 9 करोड़ लोगों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होगी तब तक वह अपनी सुरक्षा की तलाश नहीं करेंगे। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में खामेनई की मौत हो गई थी।

14 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए इलाही ने कहा कि खामिनई ने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद अपने घर पर ही रहने का फैसला किया था। भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि इलाही ने कहा कि मैंने सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि अगर वे किसी दूसरे शहर में नहीं जाना चाहते तो कम से कम उनकी सुरक्षा के लिए घर के बेसमेंट में ही एक बंकर बना दिया जाए।

लेकिन अधिकारियों ने बताया कि वे इसकी इजाजत नहीं देते हैं। यही सवाल अली खामिनेई के परिवार से भी पूछा गया था कि खामिनेई किसी सेफ जगह पर शिफ्ट क्यों नहीं हो जाते? तो इस पर परिवार वालों ने बताया जो कि खामिने के हवाले से था। मैं देश का लीडर हूं और एक लीडर को पिछड़े और गरीबों के बराबर होना चाहिए। अगर मैं अपने लिए खास जिंदगी जीता हूं तो मैं इस देश का लीडर नहीं रह सकता। आगे इलाही ने यह भी बताया कि आयतुल्लाह अली खामिनी लंबे समय से शहादत हासिल करना चाहते थे।

रमजान के दौरान इस्लाम में शहादत की अहमियत पर पूछे गए सवाल पर हाकिम ने कहा कि इस्लामी तालीम के हवाले से शहादत को सबसे बड़े सम्मान के रूप में माना जाता है। एंड ही सेड दैट आई एम द लीडर ऑफ द कंट्री एंड एनी लीडर और प्रेसिडेंट ऑफ द कंट्री शुड बी इक्वल टू द ऑर्डिनरी पीपल टू द इमेजिन पीपल टू द पुअर पीपल। इफ आई हैव अ स्पेशियल लाइफ फॉर मसेल्फ दैट आई कैन नॉट बी मोर लीडर ऑफ द कंट्री।

सो स्टिल आई एम द लीडर ऑफ़ द कंट्री। आई हैव टू पेन द पेन व्हिच माय पीपल पेन इट। एंड आई हैव टू बी विथ देम इन द सेम लेवल। आई कैन नॉट हैव ऑर्डिनरी लाइफ फॉर मसेल्फ। बिकॉज़ ऑफ दैट ही डिडंट मूव ह प्लेस ऑल दे नो दैट दिस प्लेस इज वेल नोन एंड इट विल बी मे बी इट विल बी टारगेटेड बाय द एनिमीज़ बट ही डिडंट मूव फ्रॉम दिस प्लेस। इलाही ने यह भी कहा कि रमजान के महीने में खामई की शहादत का मुसलमानों के लिए खास मायने हैं। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामिनई ने अपनी पूरी जिंदगी अल्लाह और अपने लोगों के लिए समर्पित कर दी थी।

अल्लाह ने उन्हें सबसे बड़ा सम्मान दिया है यानी शहादत और वो भी अल्लाह के महीने रमजान में। बताते चले कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने तेहरान में खामिनई के ऑफिशियल कंपाउंड पर एयर स्ट्राइक की थी और बंकर बस्टर बमों से निशाना बनाया था। इस हमले में आया अली खामिनई की मौत हो गई थी। तो फिलहाल इस खबर में इतना ही। आपकी इस खबर पर क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं

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