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इजरायल का ऐसा अपराध… इंसानियत शर्मसार! अब US छोड़ देगा साथ?..

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इजराइल ने जंग जीतने के लिए किया ऐसा घिनौना काम कि ट्रंप भी भड़केंगे। मध्यपूर्व की इस जलती हुई जंग में इजराइल की सेना ने सफेद फास्फोरस जैसे खतरनाक हथियार का इस्तेमाल किया जो आम लोगों की जान पर खेल रहा है। मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स वॉच की नई रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। लोग पूछ रहे हैं क्या जंग में सब कुछ जायज है? चलिए इस कहानी को शुरू से समझते हैं। जैसे कोई पुरानी फिल्म सुना रहे हो जहां हीरो और विलेन की लड़ाई में निर्दोष फंस जाते हैं। कल्पना कीजिए दक्षिणी लेबनान का एक छोटा सा गांव योहमोर जहां लोग अपने घरों में शांति से रहते थे। बच्चे खेलते [संगीत] थे। परिवार खाना बनाते थे।

लेकिन अचानक आसमान से मौत बरसी। इजराइली सेना ने तोपों से सफेद फास्फोरस वाले गोले दागे। यह हमला उस वक्त हुआ जब इजराइल ने गांव वालों को चेतावनी दी थी कि घर खाली करो। कुछ घंटों बाद ही आग और धुआं हर तरफ फैल गया। ह्यूमन राइट्स वॉच ने सात तस्वीरों को जांचा, जगह की पहचान की और कहा कि यह हमला गैरकानूनी था। आम घरों पर ऐसा हथियार इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यह सिर्फ योहमोर नहीं बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों में भी खतरा पैदा कर रहा है। अब सोचिए सफेद फास्फोरस क्या है?

यह एक ऐसा रसायन है जो हवा के संपर्क में आते ही जल उठता है। सेना इसे धुआं बनाने या जगह रोशन करने के लिए इस्तेमाल करती है। लेकिन जब हथियार की तरह दागा जाता है तो यह इमारतों में आग लगा देता है। इंसान की त्वचा को हड्डी तक जला देता है। अगर कोई बच भी जाए तो संक्रमण फैलता है। फेफड़े खराब हो जाते हैं। [संगीत] छोटी सी जलन भी जानलेवा बन जाती है। मानवाधिकार वाले कहते हैं कि जंग में भी ऐसे हथियारों का इस्तेमाल अवैध है। यह आम लोगों को निशाना बनाता है। ह्यूमन राइट्स वॉच के शोधकर्ता रामजी कैस ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक है।

नागरिकों पर इसका असर भयानक होगा। इजराइल ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया। पहले वह कहता रहा है कि हम सिर्फ धुआं बनाने के [संगीत] लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि यह झूठ है। कहानी में एक और मोड़ है। लेबनान की सरकारी एजेंसी ने बताया कि इजराइल ने खियाम और तालनहास शहरों पर भी फास्फोरस से हमला किया। पिछले महीने इजराइल पर आरोप लगा कि उसने सीमा पर ग्लाइफोसेट नाम का जहर छिड़का जो फसलों को बर्बाद करता है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ ऑन ने इसे पर्यावरण के खिलाफ अपराध कहा।

इजराइल ने 2024 के युद्ध विराम के बावजूद हमले जारी रखे। ईरान से जंग शुरू होने के बाद तो और तेज हो गए। हिजबुल्ला पर निशाना बनाकर इजराइल ने लेबनान में जमीन पर सैनिक भी भेज दिए। सीमावर्ती इलाकों में लड़ाई छिड़ गई। हजारों लोग बेघर हो गए। सैकड़ों मारे गए। अब ट्रंप की बात। अमेरिका इजराइल का बड़ा साथी है। ट्रंप ने हाल ही में एक आदेश दिया जो सफेद फास्फोरस जैसे सामान को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बचाता है। लेकिन इस रिपोर्ट के बाद ट्रंप भी भड़क सकते हैं क्योंकि अमेरिका ने ऐसे हथियार दिए थे इजराइल को। पुरानी रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका सफेद फास्फोरस सप्लाई करता है।

अगर यह गैरकानूनी इस्तेमाल हुआ तो ट्रंप की सरकार पर सवाल उठेंगे। वो कहते हैं कि इजराइल को मजबूत रखना है। लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन से दुनिया नाराज हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं ट्रंप को बोलना चाहिए यह घिनौना काम है। क्या जंग में इंसानियत भूल जानी चाहिए? यह पूरी कहानी बताती है कि मध्य पूर्व की जंग सिर्फ सेनाओं की नहीं बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर असर डाल रही है। इजराइल कहता है खुद की रक्षा कर रहा है। लेकिन तरीका गलत है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने दुनिया से अपील की कि इजराइल को रोके। ऐसे हथियार बंद करें। ट्रंप जैसे नेता अगर भड़के तो शायद बदलाव आए। लेकिन फिलहाल गांव जल रहे हैं। लोग डर में जी रहे हैं। उम्मीद है कि शांति आएगी। कोई घिनौना काम ना हो

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