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नहीं थमी जंग तो भारत के लिए बुरी खबर!

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इस महायुद्ध से जुड़ी सबसे अहम खबर सामने आ रही है। इस वक्त की बड़ी खबर यह है कि मिडिल ईस्ट में महायुद्ध और ज्यादा तेज होता जा रहा है और ज्यादा धड़कता जा रहा है। युद्ध पर अमेठी हाउस स्पीकर की तरफ से बड़ा बयान दिया गया है। कार ट्रंप की शक्ति को सीमित करना खतरनाक है। युद्ध शक्तियों को सीमित रखना खतरनाक बताया स्पीकर ने। और युद्ध पर अमेरिका स्पीकर की तरफ से बड़ा बयान। क्या इस युद्ध को और बढ़ाना चाहता है अमेरिका? बिल्कुल ऐसा ही लगता है। ट्रंप की शक्ति को सीमित करने का खतरा जो है उसका जिक्र यहां पर यूएस स्पीकर की तरफ से कहा गया। तो मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध का आज पांचवा दिन है। एक तरफ ईरान समेत कई देशों से तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। तो दूसरी तरफ एक दूसरा संकट दिख रहा है।

संकट का नाम है कच्चा तेल। यानी क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। और अगर यही हाल रहा तो अब सवाल खड़ा हो रहा है कि युद्ध क्या तेल की कमी के साथ मंदी लेकर आएगा? एक तरफ ईरान और अमेरिका जंग के मैदान में आमने-सामने हैं तो दूसरी तरफ और स्टेट को लेकर ईरान और अमेरिका के दावे भी एक दूसरे के उलट हैं। जंग के बीच ईरान की रेवोलशनरी गार्ड ने ऐलान कर दिया है कि अगर इस रास्ते से कोई भी शिप गुजरा तो वो उसे तबाह कर देगा।

जबकि अमेरिका का दावा है कि दुनिया का सबसे व्यस्त तेल सप्लाई वाला समुद्री मार्ग खुला हुआ है। दोनों दावों में कितना दम है इसकी बिल्कुल सटीक जानकारी देना उतना ही कठिन है जितना कि यह बता पाना कि जंग कब तक चलेगी। अब पिछले पांच दिनों से जारी इस महाविनाश के डायरेक्ट इंपैक्ट भी जान लीजिए। युद्ध की आग में कच्चे तेल की कीमतें अपने तेवर दिखा रही हैं।

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का भाव $0 प्रति बैरल से बढ़कर $82 प्रति बैरल पर पहुंच चुका है। यानी 5 दिन में कच्चा तेल $ महंगा हो चुका है। और चिंता की बात यह है कि अगर जंग जारी रही तो इसके $ पर पहुंचने का अनुमान है। हॉरबुज स्टेट का यह जलमार्ग दुनिया के 20% तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। और खास बात यह है कि भारत समेत कई आयातक देश इस जलमार्ग पर पूरी तरह से निर्भर है और इनमें सबसे पहला नाम है जापान का। जापान में खपत होने वाला 90% तेल आयात होता है। जबकि चीन सबसे बड़ा आयातक है और बरबूज से 40 से 50% तेल आयात होता है। व भारत 85सदी तेल का आयात करता है। रोजाना 2.1 मिलियन बैरल हरमबूज से आता है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया का 70 से 80% तेल हॉर्मोज से ही सप्लाई होता है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों को तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

यह और बात है कि भारत जैसे देशों में लोगों को जमीनी हकीकत से अगले 7 से 10 दिनों में सामना करना पड़ सकता है। तो अभी टैंकर्स या शिपमेंट्स जो अभी ट्रांजिट में है उनको अभी कोर्ट में पहुंचने में तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। बट जो नए ऑयल टैंकर फ्रूट टैंकर आ रहे हैं या जो और सामान खानेपीने का या जो कमोडिटीज आ रही हैं उसको आने में और नए आदमी नए सामान को शुरू होने में वहां फर्क पड़ेगा। इसलिए 7 से 10 दिन तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यहां इस बात पर गौर करना जरूरी है कि तमाम मुश्किलें सिर्फ तभी आएंगी जब मिडिल ईस्ट का संकट बरकरार रहता है और युद्ध जारी रहता है। लड़ाई वाले हालात में भारत ही नहीं कई देशों में आयात बिल बढ़ेगा और पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ेंगी। यह संकट कई दशकों का सबसे बड़ा ऑयल शॉक माना जा रहा है। क्योंकि हॉर्बुस जैसे चोक पॉइंट का बंद होना सीधे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को हिट करता है। इसलिए दुनिया की तमाम शक्तियां इस युद्ध को खत्म होते देखना चाहती हैं। इसी में सभी की भलाई है।

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