अमेरिका, इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिशकियान ने एक बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कह दिया है कि अब पड़ोसी देशों पर हमले नहीं किए जाएंगे जब तक कि उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला ना हो। साथ ही पेजिशियान ने पिछले कुछ दिनों में पड़ोसी देशों पर हुए हमले के लिए उनसे माफी भी मांग ली है। साथ ही कहा कि ईरान इन देशों के साथ तनाव बढ़ाना नहीं चाहता और भविष्य में ऐसे हमलों से बचने की कोशिश करेगा।
लेकिन इसके बाद ही खबर यह सामने आई कि क़तर की राजधानी दोहा में एक और धमाका हुआ है। [संगीत] 28 फरवरी से जो जंग शुरू हुई है उसमें ईरान, इजराइल समेत मिडिल ईस्ट के [संगीत] 13 देशों को अब तक निशाने पर ले चुका है। [संगीत] [संगीत] जंग के आठवें दिन भी हमलों में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। जिस तरह के हालात बनते हुए नजर आ रहे हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह युद्ध और ज्यादा भीषण होता हुआ नजर आएगा।
हालांकि अमेरिका ईरान को अब पूरी तरीके से तबाही कर देना चाहता है। तभी अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट [संगीत] बेसेंट का यह बयान अपने आप में अहम है। जिसमें उन्होंने कहा है कि वो आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने वाले हैं। उन्होंने यह कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लांचर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है।
ईरान के राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों के लिए माफी मांगते हुए कहा, तेहरान इन हमलों को रोकेगा। यह हमले रैंकों में गलतफहमी की वजह से हुए थे। साथ ही उन्होंने शर्त भी रख दी और कहा कि हम पड़ोसी देशों पर तब तक हमला नहीं करेंगे जब तक पड़ोसी देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता है। वहीं इसी के साथ अमेरिका के सामने सरेंडर करने की बात पर मसूद पेजिशियन ने कहा कि कि यूनाइटेड स्टेट्स की बिना शर्त सरेंडर की मांग एक सपना है जिसे उन्हें अपनी कब्र तक साथ ले जाना चाहिए।
आपको बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान से उसके आगे सरेंडर करने की बात कही थी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा था कि जब तक ईरान पूरी तरह नहीं झुक जाता तब तक किसी भी कूटनीतिक रास्ते की गुंजाइश नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि वो ईरान से बिना शर्त सरेंडर के बातचीत नहीं करेंगे। अब मिडिल ईस्ट में जो जंग चल रही है उसका असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
क्योंकि इस पूरे संकट के बीच कई देशों में एक और बड़ी चिंता भी उभर कर सामने आई है। वो है स्ट्रेट ऑफ हॉरमोस। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा होकर गुजरता है और इसका असर कहीं ना कहीं भारत पर भी पड़ सकता है