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ईरान का मुस्लिम देशों से सवाल-किसके साथ खड़े हो? खुले पत्र से विवाद

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पश्चिम एशिया में जारी ईरान, यूनाइटेड और इजराइल जंग अब अपने 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर दिन इस संघर्ष से जुड़ी नई-नई खबरें सामने आ रही हैं। कभी अमेरिका अपने सहयोगी देशों से मदद की अपील करता नजर आ रहा है तो कभी यह सवाल उठता है कि आखिर इस युद्ध में ईरान के साथ कौन खड़ा है? इसी बीच अब ईरान की ओर से एक ऐसा लेटर सामने आया है जिसने पूरे इस्लामिक दुनिया में नई बहस छेड़ दी है।

नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं india.com। दरअसल ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारी जानी ने दुनिया भर के मुसलमानों और इस्लामिक देशों को सरकारों को एक ओपन लेटर लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अमेरिकी इजराइली संघर्ष के बीच ईरान को जिस समर्थन की उम्मीद मुस्लिम देशों से थी, वह उन्हें नहीं मिला।

लारी जानी ने अपने पत्र में नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकांश इस्लाम देशों ने सिर्फ बयानबाजी तक खुद को सीमित रखा लेकिन वास्तविक रूप से ईरान के साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने यह भी बताया कि हमलों में ईरान के कई नागरिकों, सैन्य कमांडरों और इस्लामिक क्रांति के एक प्रमुख नेता की जान गई है। इसके बावजूद लारी जानी के अनुसार ईरानी जनता ने दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ जवाब दिया है।

जबकि हमलावर अब भी इस रणनीतिक संकट से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। अपने लेटर में उन्होंने अमेरिका और इजराइल को बड़ा शैतान और छोटा शैतान बताते हुए आगे कहा कि ईरान इनके खिलाफ अपने प्रतिरोध के रास्तों पर आगे बढ़ता रहेगा। लारी जानी ने मुस्लिम देशों से सीधा सवाल किया है कि वह आखिर किस पक्ष में खड़े होना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ देशों का रवैया पैगंबर मोहम्मद की उन शिक्षाओं के खिलाफ है जिनमें कहा गया है कि किसी मुसलमान की पुकार सुनकर भी अगर कोई मदद ना करें तो वह सच्चा मुसलमान नहीं। साथ ही उन्होंने उन देशों को जवाब देते हुए जिन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने उनके यहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

लारी जानी ने सवाल उठाया, क्या ईरान से यह उम्मीद की जा सकती है कि वो चुपचाप बैठा रहे? जबकि इन्हीं ठिकानों से उस पर हमले किए जा रहे हैं। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट की राजनीति और भी जटिल होती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि इस ओपन लेटर के बाद मुस्लिम देश किस तरह की रिएक्शंस देते हैं और यह संघर्ष आगे किस दिशा में बढ़ता है। आप अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।

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