मिडिल ईस्ट की जंग में अब एक नया मोड़। ईरान ने सीधे भारत को कॉल किया है और सिर्फ कॉल ही नहीं यहां पर भारत से मदद भी मांगी है। ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से यह कहा है कि आप बॉस हैं और आप ही इस जंग को रुकवा सकते हैं। सवाल यह है कि क्या भारत अब वॉर का गेम चेंजर बनने जा रहा है? और इतना ही नहीं यहां पर यह भी बता दें कि नो रोज और ईद के मौके पर हुई यह बातचीत सिर्फ एक औपचारिक कॉल नहीं थी।
यह एक हाईस्ट डिप्लोमेटिक मूव था। यहां पर बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पिजिशकेन के बीच हुई इस बातचीत में ईरान ने साफ-साफ अपनी शर्तें रख दी हैं कि कैसे यह जो जंग है वो रुकेगी। और सबसे बड़ा संदेश क्या था? यह था कि भारत इस जंग में यहां पर आए और यहां पर इस जंग के लिए मीडिएटर बने। लेकिन इस बीच ईरान ने तीन बड़ी शर्तें भी रखी है।
पहली शर्त यह है कि तुरंत हमला बंद करें यूएस और इजराइल। जब तक यूनाइटेड स्टेट्स और इजराइल हमले नहीं रोकेंगे तब तक कोई भी बातचीत ईरान से नहीं हो पाएगी। यानी पहले बम बंद और फिर उसके बाद बातचीत शुरू। दूसरा भविष्य में हमला नहीं होगा इसकी गारंटी चाहिए। ईरान का साफ कहना है कि सिर्फ वादे ही नहीं बल्कि यहां पर बाइंडिंग अश्योरेंस चाहिए। क्यों?
क्योंकि पहले भी सीज फायर हुए लेकिन इसके बावजूद भी कई बार हमला हुआ और इस बार ईरान पॉज नहीं बल्कि परमानेंट सॉल्यूशन चाहता है। अब तीसरी शर्त की बात करते हैं। तीसरी शर्त यह है कि मिडिल ईस्ट से अमेरिका बाहर जाए। ईरान की यह सबसे बड़ी मांग है। पूरे मिडिल ईस्ट से यूनाइटेड स्टेट्स यानी कि अमेरिका अपने एयरबेस और मिलिट्री हटाए चाहे वो सऊदी अरब हो या फिर यूएई हो या फिर क़तर हो।
ईरान यह साफ चाहता है कि रीजनल सिक्योरिटी बिना वेस्ट के बने। अब ट्रंप के जो दावे हैं और ईरान का जो जवाब है अब आप उसे समझिए। ट्रंप के जो दावे सामने आ रहे हैं वो यह है कि ट्रंप ये कह रहे हैं कि हम वॉर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ईरान ने सीधा-सीधा यहां पर यह जवाब दिया है कि हम न्यूक्लियर वेपन बना नहीं रहे थे। असली अस्थिरता अमेरिका और इजराइल यहां पर फैला रहे हैं। अब इस पूरे युद्ध में भारत क्यों बना है सबसे अहम प्लेयर? कैसे यहीं से कहानी बदलती है?
ईरान ने भारत को ही क्यों चुना? उस पर अब बात कर लेते हैं। दरअसल इस पूरे घटनाक्रम के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला भारत पूरी स्थिति को लेकर न्यूट्रल है। दूसरा दोनों ब्लॉक्स से बात कर सकता है भारत। तीसरा ब्रिक्स में मजबूत पोजीशन है भारत की और इसलिए ही ईरान का सीधा संदेश है कि इंडिया कैन बी द ब्रिज। और वही बता दें आपको कि मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद ईरान ने कम से कम दो से तीन बार भारत से हाई लेवल संपर्क किया है।
और इतना ही नहीं ईरान के राष्ट्रपति पिजिशकियन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक से ज्यादा बार बातचीत भी हो चुकी है और यह घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि ईरान भारत को सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक भरोसेमंद पावर मान रहा है। अब भारत का स्टैंड क्या है इस पूरे मामले पर? अब आप उसे भी जान लीजिए। भारत ने बहुत स्मार्ट पॉलिसी यहां पर अपनाई है। यह है कि किसी का साइड नहीं और यहां पर तीन महत्वपूर्ण चीजें भी है।
पहला डीएस्केलेशन यानी कि तनाव का कम होना, डायलॉग होना यानी कि बातचीत हो और ऑयल सप्लाई चालू रहे। क्योंकि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी सीधे जुड़ी है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से। अब सबसे अहम सवाल क्या सच में जंग खत्म हो सकती है? तो बता दें कि सच यह है कि बहुत मुश्किल है क्योंकि इसके पीछे अमेरिका के पांच बड़े टारगेट हैं। ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना, मिसाइल पावर कमजोर करना,
डिफेंस प्रोडक्शन रोकना, ऑयल रूट सुरक्षित रखना और रीजनल इन्फ्लुएंस खत्म करना। लेकिन बात करें तो जमीन पर यह सारे टारगेट पूरे होते हुए नहीं दिख रहे हैं। तो पूरी कहानी का सार क्या है? ईरान दबाव में है लेकिन झुक नहीं रहा। अमेरिका और इजराइल पीछे हटने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। और इसी बीच अब भारत बन गया है सबसे बड़ा किंग मेकर। क्योंकि पहली बार जंग लड़ने वाले देश ही नहीं बल्कि जंग रोकने के लिए भारत को यहां पर बुलाया जा रहा है कि आप प्लीज यहां पर आइए और इस जंग को रुकवाइए। मीडिएटर बनिए।
और अब सबसे बड़ा सवाल क्या नरेंद्र मोदी इस ग्लोबल क्राइसिस में पीस मेकर बनेंगे या फिर यह जंग और भी ज्यादा भड़कने वाली है। वॉच दिस स्पेस क्योंकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है और यहां पर महत्वपूर्ण जानकारी आपको यह भी दे दें कि एक तरफ वैश्विक शक्तियां हैं तो वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय संघर्ष भी है
और इनके बीच उभरता हुआ एक देश है और वो है भारत और शायद यही वजह है कि ईरान ने यह कहा है कि आप बॉस हैं क्योंकि आज दुनिया सिर्फ ताकत ही नहीं संतुलन और नेतृत्व भी तलाश रहा है और इसीलिए यह फोन कॉल बेहद अहम है।