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ईरान-अमेरिका के बीच मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिकियों को ओपन लेटर में क्या ल‍िखा?..

Hindi Post

एक्सपर्ट सशन कैंडिडेट डस्टिंग पाउडर हटा खुजली लगा कैंडिडेट क्या वाकई ईरान से अमेरिका को कोई सीधा खतरा था जिसके बहाने उसने ईरान पर अंधाधुंध बमबारी शुरू कर दी। क्या मासूम बच्चों का कत्लेआम करना, अस्पतालों को तबाह करना या किसी देश को बम से उड़ाकर पाषाण युग स्टोन एज में धकेलने की बातें करना अमेरिका की ग्लोबल इमेज चमका रहा है। क्या अमेरिका इस जंग में सिर्फ इजराइल के एक प्रॉक्सी के तौर पर काम कर रहा है?


क्या वो इजराइल का एक मोहरा है? क्या अमेरिका की सरकार के लिए अमेरिका फर्स्ट का नारा अब कोई मायने रखता भी है या नहीं?यह सवाल है ईरान के राष्ट्रपति मसूद रजिशियान के। उन्होंने यह सवाल अमेरिकी सरकार से नहीं बल्कि अमेरिका की आम जनता से पूछे। चीनी रणनीतिकार एक जाने-माने स्ट्रेटजिस्ट सुनजू ने द आर्ट ऑफ वॉर अपनी जो किताब थी उसमें लिखा था

अगर शासक और उसकी प्रजा के बीच अटूट एकता हो तो उनके बीच दरार डाल दो। यह उनकी स्ट्रेटजी थी। कूटनीति के मैदान में यह एक पुराना पैतरा रहा है। हमने सदियों से ऐसा देखा है कि राजाओं ने इसका इस्तेमाल किया है। आपने पिछले कुछ महीनों में इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतनिया और डॉनल्ड ट्रंप को बार-बार इसी पैतरे का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा।

वो अमेरिका और इजराइल में बैठे-बैठे ईरान की आवाम से मुखातिब होने लगते हैं। हमदर्दी से कहते हैं कि हम आपके दुश्मन नहीं हैं। हम तो आपके दोस्त हैं। आपका असल दुश्मन तो आपके सिर पर बैठा कट्टरपंथी इस्लामी निजाम है। इसे उखाड़ फेंको। हम तुम्हारे साथ हैं। हम तुम्हें आजादी दिलाएंगे। अब इसी डायरेक्ट मैसेजिंग वाले गेम में फिजिशियान ने भी ट्रंप और नितनिया के नक्शे कदम पर चलने की कोशिश की है

और अमेरिकी जनता के नाम पर चार पन्नों का एक लंबा चौड़ा खुला खत लिखा है। खत में परशकियान ने अमेरिकी जनता से कहा है कि ईरान के लोगों के दिल में अमेरिका या यूरोप की आम जनता के लिए कोई नफरत नहीं है। उन्होंने सरकार और नागरिकों के बीच एक लकीर खींची, एक लाइन ड्रॉ की और कहा कि हमारी लड़ाई अमेरिकी आवाम से नहीं है। अमेरिकी जनता से नहीं है बल्कि अमेरिकी सरकार की दमनकारी नीतियों से है।

खत में लिखा है कि ईरान को जानबूझकर खतरा बनाकर पेश किया जाता है ताकि अमेरिका की हथियारों की इंडस्ट्री चलती रहे और सामरिक बाजारों पर कब्जा बना रहे। खत में ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास की जड़ों को भी कुरेदा गया है। बजयान ने अमेरिकी जनता को याद दिलाया कि कैसे साल 1953 में अमेरिका ने ईरान की चुनी हुई सरकार का मोहम्मद मुसद्द जो प्रधानमंत्री थे उनका अवैध तख्ता पलट करवाया। ऐसा इसलिए किया गया था

क्योंकि मुसद्द नेशनलाइज कर रहे थे ऑयल इंडस्ट्री को और ईरान के तेल और संसाधनों पर अमेरिका अपना कब्जा चाहता था। पश्चिम अपना कब्जा चाहता था। अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर वो तख्ता पलट उसको अंजाम दिया था। उन्होंने 80 के दशक में सद्दाम हुसैन को दिए गए अमेरिकी समर्थन का भी याद दिलाया बरिशियान ने। इसके अलावा कड़े प्रतिबंधों और बातचीत के बीच यह जो हालिया बमबारी हुई है ईरान पर इसका भी जिक्र किया।

दावा किया कि ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी जानबूझकर युद्ध की शुरुआत नहीं की है। अमेरिका ने ईरान के चारों तरफ अपने मिलिट्री बेस बना रखे हैं और ईरान ने जो भी किया है वो सिर्फ अपने बचाव में किया है। उन्होंने अमेरिका की सुपर पावर वाली जो इमेज है जो हैसियत है उस पर भी तंज कसा। फिर ने पूछा कि क्या अमेरिका इस जंग में सिर्फ इजराइल के एक मोहरे के तौर पर काम नहीं कर रहा? क्या इजराइल एक मनगढ़ंत ईरानी खतरा पैदा करके फिलिस्तीनियों पर हो रहे अपने जुल्मों से दुनिया का ध्यान नहीं भटकाना चाहता?


उन्होंने बुनियादी ढांचे ढांचे पर अमेरिकी हमलों को युद्ध अपराध वॉर क्राइम बताया। खत के आखिर में प्रिशियन ने अमेरिकी जनता से अपील की है कि आज दुनिया एक दोराहे पर खड़ी है। मुठभेड़ की जगह बातचीत का रास्ता चुनना होगा क्योंकि जंग सिर्फ तबाही ला रही है। उन्होंने अमेरिकी आवाम से कहा कि वह अमेरिका में मौजूद कामयाब ईरानी प्रवासियों को देखें जो अमेरिकी यूनिवर्सिटीज और टेक कंपनियों में अपना योगदान दे रहे हैं।

उन्हें उस भ्रामक तंत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए जो उन्हें दिन रात परोसा जा रहा है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। आप इस पर क्या सोचते हैं? पेजयान के इस तावे पर क्या सोचते हैं? अमेरिका की इस जंग पर क्या सोचते हैं? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

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