ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग ने समंदर के इस संक रास्ते को दुनिया का सबसे खतरनाक फ्लैश पॉइंट बना दिया है। जिसका नाम है स्टेट ऑफ होमर्ज। यह सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि दुनिया की एनर्जी लाइफ लाइन है। आज इस रास्ते पर तनाव की वजह से भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है। सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे देशों की तेल सप्लाई ठप होने की कगार पर है।
आज भले ही इस इलाके में ईरान की तोपें गरज रही हो लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटे तो कहानी कुछ और ही थी। एक वक्त था जब इस जलडमरू मध्य पर ना तो ईरानी का दावा था ना ब्रिटेन का और ना ही अमेरिका का। साल 1507 में यहां पुर्तगालियों ने अपना परचम लहराया था। पुर्तगाली खोजकर्ता जब भारत की तलाश में निकले तब उनकी नजर इस रणनीति द्वीप पर पड़ी। उन्होंने होम पर कब्जा कर वहां पे एक अमेद किला और कस्टम हाउस बना दिया।
मकसद साफ था इस रास्ते से होने वाले रेशम मसालों, मोतियों और अरबी घोड़ों के व्यापार पर पूरी तरह कंट्रोल करना। पुर्तगालियों ने यहां अपनी दादागिरी चलाने के लिए काटारजा सिस्टम लागू किया। यानी अगर किसी को फारस की खाड़ी में व्यापार करना है तो उसे पुर्तगालियों को मोटी रकम देकर अनुमति लेनी होगी। इसी की बदौलत पुर्तगाल ने खुद को इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बना लिया था।
वे बेहद दमनकारी थे। जिसका नतीजा यह हुआ कि स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ भारी विद्रोह शुरू हो गया। इतिहास गवाह है कि जबजब खाड़ी देशों में युद्ध के बादल छाए हैं, होमूर्द का रास्ता बंद हुआ है। आज फिर वही स्थिति है जो रास्ता कभी पुर्तगालियों के टैक्स वसूलने का जरिया था,
आज वह ईरान के लिए युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। दुनिया भर के शेयर बाजार और तेल की कीमतें अब इसी 29 कि.मी. चौड़े रास्ते की लहरों पर टिकी है। हालांकि पुर्तगालियों का वह दौर खत्म हो चुका है। लेकिन होमर्ज की अहमियत आज भी वही है। आज ईरान के पास इसकी चाबी है
और इसी चाबी से वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाने की ताकत रखता है क्योंकि ईरान ने जैसे ही स्टेट ऑफ होम्स को बंद कर दिया पूरी दुनिया की धड़कनें तेज हो गई। कई देशों में तेल गैस की कीमतें आसमान छूने लगी। दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग स्टेट ऑफ होम्स क्यों इतना अहम है और क्यों इसे बंद करना दुनिया के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है?
क्योंकि ईरान और ओमान के बीच मौजूद स्टेट ऑफ होम्स दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफ लाइन माना जाता है।
यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। अपने सबसे पहले हिस्से में यह जल डमरू मध्य सिर्फ 33 कि.मी. चौड़ा है। लेकिन इसी संक्रय रास्ते से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल और गैस दुनिया भर में भेजी जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ग्लोबल ऑयल खपत की करीब 20% यहीं से गुजरता है। इसके साथ समुद्री तेल सप्लाई का लगभग 30% इसी रास्ते पर निर्भर है।
यही नहीं कतर का लगभग पूरा एलएनजी निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यानी अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है। स्टेट ऑफ फोरमूज के बंद होने से किन-किन देशों पर असर पड़ेगा वो भी समझ लीजिए। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पाद देश अपने क्रूड निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर करते हैं
इन देशों का ज्यादातर तेल एशियाई बाजारों, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया को जाता है। अगर यह सप्लाई रुकती है तो इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। स्टेट ऑफ होम सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन है। जिस पर भारत समेत तमाम देशों की निगाहें टिकी हैं।.