पंच तत्वों में विलीन हो गए हरीश राणा। 13 साल के उस छत और बेड की घुटन से आजाद हो गए हरीश राणा। [संगीत] बुधवार को दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में जब उनका अंतिम संस्कार हुआ तो मानो सबकी आंखें नम हो गई। गुलाब के फूलों से सजे अंत्यष्ट्रीय स्थल पर हरीश की पार्थिव देह आते ही भाई रो पड़े। कई दफा पिता की आंखें भी झलक आई लेकिन दिल में गम के साथ परिवार को तसल्ली भी है कि हरीश राणा को मिल गई,
उस अंतहीन तकलीफ से मुक्ति। अंतिम संस्कार के बाद पहली रात बिना हरीश राणा के गुजार कर आज यह परिवार फिर वहीं पहुंचा उसी मोक्ष धाम आगे की रस्म के लिए। रस्म अस्थि चुनने की। जिन्हें गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। इस दौरान भाई आशीष राणा एकदम टूटे हुए नजर आए। हरीश के भाई आशीष राणा जब एक बार फिर से उसी जगह पर पहुंचे जहां पर उन्होंने अपने बड़े भाई को मुखाग्नि दी तो मानो एकदम [संगीत] पत्थर से हो गए।
एक टक वो उसी राख को निहारते दिखे। [संगीत] [संगीत] आशीष राणा के लिए पल बहुत ज्यादा कमजोर करने वाला था। लेकिन उनको संभालने वाले उनकी मजबूत पिता अशोक राणा भी वहां पर थे। साथ में जीजा और मां भी। आपको बता दें कि यहां से अस्थियां लेकर परिवार जो है वो हरिद्वार जाएगा जहां पर अस्थियां जो है प्रभावित प्रभावित प्रवाहित की जाएंगी और उसके बाद परिवार वहीं से बाहरी बाहर हिमाचल प्रदेश अपने जो है
गृह जनपद गांव की तरफ चला जाएगा। अभी आप देख सकते हैं तस्वीरों में आशीष राणा जो है नजर आ रहे हैं इस वक्त और उनके साथ उनके बगल में उनके जो है दामाद हैं और साथ ही साथ जो है उनके पिता अशोक राणा इस वक्त अस्थियां जो है लेने के लिए आए हैं। यह परिवार क्योंकि मतलब बेहद कठोर और कठिन समय इस परिवार के लिए है यह और इस परिवार ने कल जो है पहली रात ऐसी गुजारी जिसमें हरीश इनके सामने नहीं थे
और इनकी सोसाइटी में जैसा कि अभी हमने इनके पिता से बात की तो उन्होंने बताया कि सोसाइटी वालों ने काफी जो है मदद की। सोसाइटी वालों ने यहां पर लोगों को जो है जो रिश्तेदार जो तमाम आए हुए थे उन रिश्तेदारों को उनके खानेपीने का व्यवस्था जो है सब सोसाइटी वालों ने किया था और आप देख सकते हैं कि यहां पर परिवार जो है अभी इकट्ठा हुआ है और इसके बाद अब सीधे हरिद्वार की तरफ ये फैमिली जो है
वो निकलेगी और हरिद्वार में गंगा जी में प्रवाहित करने के बाद अस्थियों को यह फैमिली हिमाचल प्रदेश अपने गांव की ओर चली जाएगी। जहां पर 13 दिन का जो है 13वीं संस्कार वो जो है गांव में किया जाएगा इनके समाज के बीच इनके लोगों के बीच और साफ तौर पर अभी जो है यहां पिता मौजूद है बाहर इनकी माताजी बैठी हुई हैं और अभी देख सकते हैं किस प्रकार से परिवार के लोग जो है यहां पर चेहरे इनके देख सकते हैं।
आशीष के चेहरे को आप देख सकते हैं। आशीष इस वक्त जो है गमगीन है। के बड़े भाई की अस्थियां लेने के लिए यहां पर यह आए हैं और यह बड़ा भावुक पल है आशीष के लिए और साथ ही साथ पूरे इस राणा फैमिली के लिए यहां से अस्थियां लेकर यह परिजन बता रहे हैं कि हरिद्वार जाएंगे और उसके बाद सीधे हिमाचल प्रदेश। तो बाकी तमाम लेटेस्ट जानकारी और अपडेट्स के लिए.