यह बताना बहुत मुश्किल है कि यह कितना दिन लगेंगे इसमें क्योंकि यह किसी के भी हाथ में नहीं होता। इस पूरी प्रोसेस के दौरान हमें उसके घर वालों को हमेशा कॉन्फिडेंस में रखना है। उनको काउंसलिंग करते रहना है। बिकॉज़ पेरेंट्स की काउंसलिंग बहुत जरूरी है इस केस में। भगवान के हाथ में होता है जन्म, मरण एंड मरण। तो अब इसमें डेफिनेटली भगवान के हाथ में है। सो मैं कोर्ट की डायरेक्शन से पहले अपने आपको इंट्रोड्यूस कराते हुए बताना चाहती हूं कि मैं एक पैेटिव केयर फिजिशियन हूं।
और पैेटिव केयर फिजिशियन जो होता है वो पेशेंट को किसी भी स्टेज में पेशेंट आए उसको कंफर्टेबल बनाने का उसका काम होता है। कंफर्ट केयर देने का। चाहे वो अर्ली स्टेज हो, चाहे लेट स्टेज हो। अब इस केस में यह एडवांस स्टेज है। जहां पर ऐसा लगता है कि एंड इनविटेबल है। मींस उसका एंड आएगा ही। ऐसी स्टेज में हमने जो थ्री डिकेड्स में प्रैक्टिस की है जहां पे एंड इनविटेबल होता है।
जहां पे हमको लगता है कि पेशेंट को सर्वाइव नहीं किया जा सकता और कोई सी भी चीज करें पेशेंट सर्वाइव नहीं करेगा। तो हम कोई उसमें कोई ऐसा वर्ड यूज़ नहीं करते। हमारे हर एफर्ट होता है। उसमें कोई यूथनेसिया वर्ड नहीं होता बल्कि एक अच्छा पैेटिव केयर फिजिशियन होता है। वह हर संभव कोशिश करता है कि वो उसका एंड को प्रोलोंग नहीं करे। कोई सा भी सपोर्ट देके जो हम एंड प्रोलोंग करते हैं वो नहीं हो और उसकी डेथ को हैसन नहीं करे।
दवाइयां देके। जो यूथनेजिया होता है जिसमें एक्टिव यूथनेसिया होता है उसमें ऐसा होता है कि हम डेलीबेटली मेडिसिन देके एंड को हसन करते हैं वो पैेटिव केयर नहीं करता। पैलेटिव केयर और यूथनेसिया दो अलग-अलग टर्म्स हैं। सो एस सच अगर ऐसी सिचुएशन आती है जहां पे एंड इनएविटेबल होता है जैसा इस बच्चे के अंदर है तो हमको उसको टिल द एंड ऐसा करना चाहिए कि जिससे कि उसको सपोर्ट मिलता रहे।
अब उसको सपोर्ट देने के बाद पेरेंट्स 13 साल तक परेशान हो गए। तो ऐसी सिचुएशन में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस है विदहल्ड और विड्रॉल की। उसको फॉलो करना चाहिए। विद्रोह और विड्रॉल में यह है कि या तो हम दें ही ना सपोर्ट और विड्रॉल मतलब जो सपोर्ट दे रहे हैं उसको विड्रॉ कर लें। तो उसके लिए एक स्पेसिफिक प्रोटोकॉल बना हुआ है वो फॉलो करना चाहिए। और जब यह प्रोटोकॉल भी फॉलो हो गया।
दिस मींस अगर हमारे पास कोर्ट का वर्डिक्ट आ गया। मींस ये प्रोटोकॉल भी फॉलो हो गया और प्रोटोकॉल डायरेक्शन दिया है। तो अब हमारा यह कर्तव भी होता है कि हम उसको फॉलो करें और धीरे-धीरे इसको विथड्रॉ करें। इस इस पूरी प्रोसेस के दौरान हमें उसके घर वालों को हमेशा कॉन्फिडेंस में रखना है। उनको काउंसलिंग करते रहना है। बिकॉज़ पेरेंट्स की काउंसलिंग बहुत जरूरी है इस केस में।
प्लस इसको स्लोली हमको इसको धीरे-धीरे विड्रॉ करके और यह बताना बहुत मुश्किल है कि ये कितना दिन लगेंगे इसमें क्योंकि यह किसी के भी हाथ में नहीं होता। बट कोशिश यही करनी चाहिए कि उसका जिस तरीके से मींस अब हमको बैलेंस करना है। कोर्ट का वर्डिक्ट है। एक हमारा लॉ है जो हमें बताता है कि विद होल्ड एंड विथड्रॉल करना अब पॉसिबल है। अब हमको यह पता है कि इसमें विद विदहेल्ड एंड विथड्रॉ करना है तो हमको बैलेंस करके करना पड़ेगा।
सो दैट हम ऐसा हमको नहीं लगना चाहिए कि हमने कुछ चीज ऐसा कर दिया। डेलीबेट किलिंग वो नहीं है। वह नहीं है इसमें। बिल्कुल भी नहीं है। और यूथनेसिया बेसिकली मेरे हिसाब से मिसनमर है। विदहोल्ड एंड विड विथड्रॉल इज अ राइट टर्म व्हिच वी शुड यूज़ फॉर सच काइंड ऑफ पेशेंट। और इसमें मैम लगभग कितना समय लगता है?
ज्यादा भी समय लग सकता है। ऐसा बताना बहुत मुश्किल होता है। ये भगवान के हाथ में होता है जन्म, मरण एंड परण। हम तो अब इसमें डेफिनेटली भगवान के हाथ में है। लेकिन अब हमारे पास सब कुछ क्लियर है। क्लियर वर्डिक्ट है। क्लियर गाइडलाइंस हैं। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस है। सुप्रीम कोर्ट का वर्डिक्ट है। तो इसमें हमारा मुझे यह नहीं मालूम कि क्या चल रहा है, कैसे ट्रीटमेंट मिल रहा है उसको। लेकिन डेफिनेटली फिर भी अगेन मैं बताना मेरे लिए मुश्किल होगा कि कितना टाइम लगेगा.