Cli
harish rana case hai

गिरा नहीं..गिराया गया था.., हरीश राणा के पिता ने किया चौंकाने वाला खुलासा..

Hindi Post

विकसित यूपी बैठक गोरखपुर जल्द आ रहा है सिर्फ और सिर्फ यूपी तक पर। देखो ऐसा इसकी मारपीट ही हुई है क्योंकि जहां ये गिरा था जी वो जगह खाली थी। पुलिस केस हुआ वो एफआईआर भी बंद हो गई। 307 120 लगी हुई थी। परंतु सीबीआई वाले ने बताया कि अंकल यह यूनिवर्सिटी बादल की है। बादल उसमें 2013 में उनकी सरकार थी। तो यह है हरीश राणा के पिता। बड़े दर्द में हैं।

यह इंटरव्यू 2024 का है जून के महीने का। उस दौरान उनसे बात की गई थी हरीश राणा के मामले में ही तब उन्होंने कुछ ऐसी बात कही थी जिसके बाद कई सारे सवाल भी खड़े हुए थे वो यह था वो इस दौरान कहते हुए देखे गए कि उनके बेटे को गिराया गया था वो गिरा नहीं था जिसके बाद से वो उस 13 सालों तक वो उस अवस्था में रहे जिसके चलते आज वह इस हालात में पहुंचे हैं कि उनको कोर्ट से इच्छा मृत्यु मांगनी पड़ी और उनको अब वो मिली है क्या कह रहे थे उनके पिता उस दौरान वह सब कुछ आपको विस्तार से बताएंगे।

मैं हूं मधुर और आप देख रहे हैं यूपी तक। सुप्रीम कोर्ट से हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत मिलने के बाद अब उन्हें दिल्ली के जानेमाने हॉस्पिटल एम्स में ट्रांसफर कर दिया गया। हाल ही में। डॉक्टरों और सूत्रों के मुताबिक हरीश के मामले में यह पूरी प्रतिक्रिया लगभग दो से तीन सप्ताह तक चल सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस प्रक्रिया के लिए एम्स में एक खास डॉक्टरों की टीम बनाई गई है।

वह सब उसकी देखरेख में लगे हुए हैं। बता दें कि 13 साल से कोमा में है हरीश। हरीश राणा पिछले करीब 13 सालों से कोमा जैसी स्थिति में है। साल 2013 में वह पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक के छात्र थे। उसी दौरान चौथी मंजिल की बालकनी से गिरने की वजह से उनके सर में गंभीर चोटें आई थी।

दुर्घटना के बाद से ही उनकी जो हालत है वह गंभीर बनी रही और वो कोमा जैसी अवस्था में रहे। इन सालों में उनका इलाज चलता रहा लेकिन उनकी चेतना कभी वापस नहीं आ सकी। लेकिन जब हमने उनसे बात की, उनके पिता से बात की तो उन्होंने बताया कि जिस हालत में वो पहुंचे हैं उसके लिए कोई ना कोई शख्स जरूर जिम्मेदार है। उनके पिता लगातार कहते रहे कि जब वो वहां पर लेने के लिए पहुंचे तो शरीर पर चोट के निशान थे। क्या कुछ कह रहे हैं हरीश राणा के पिता उस 2024 के इंटरव्यू में? आइए आपको वो सुनाते हैं। फोटो भी आपने जागरण में भी देखी होगी।

बॉडी बिल्डर जी जी तो उसमें उसमें इसने पार्टिसिपेट किया था पंजाब यूनिवर्सिटी में ही कंपटीशन वन का सर तो उंगलियों के निशान नहीं होते मैंने डॉक्टर ने मेरे को ये बोला यार छलांग क्यों लगाई है जब हमने उंगलियों के निशान देखे तो हमने ये डॉक्टर को बोला राकेश नाम है उस डॉक्टर का जिसने एमएलएसीमिया लिखा है कि गिरा हुआ है ये गिरा मेरे को तो ये भी नहीं पता कि एमएलसी क्या होती है क्या होती है ये तो बाद में एम्स से हमको रात को 2:30 बजे फोन आया क्योंकि थके हुए थे तो मैंने नींद में मैंने कहा वो एमएलसी पता नहीं क्या होती है

अब वो उन्होंने बोला इसकी एमएलसी है मैं समझ आ नहीं मैंने पहले चुप रहा मैं मेरे को पता नहीं तो मैं क्या जवाब दूं। मैंने कहा क्या होती है? बोले पुलिस केस हुआ है। मैं कहा पुलिस केस तो एफआईआर करा रखी है। मैं कह रहे एमएलसी है। मैं कहा एमएलसी एमएलसी कैसे बोले नहीं जी है कि नहीं है? तो देखो ऐसा इसकी मारपीट ही हुई है क्योंकि जहां ये गिरा था जी वो जगह खाली थी।

जी तो जब हम गए विजिट करने वहां पर हमने हमने तो क्यों उसके दोस्त ही ले गए क्योंकि पढ़ने में बड़ा लायक था तो इसके दोस्त भी बड़े थे तो वो ले गए तो एक के हाथ में चोट लगी थी तो वो ऐसे कर रहा उंगली करके कह रहा ये लाया उसको उसका लड़के का नाम करण है जो हमें ले गया अपनी गाड़ी में तो क्योंकि एक दो तो इसको आगे कुछ भी नहीं थे मतलब इतना ये तगड़ा था जैसे कहते हैं

आपसे मतलब आप शरीर देखते इस कहते बच्चा मैंने देखा नहीं यहां गाजियाबाद के यूपी के क्षेत्र में दूसरी बात कि उसके उंगलियों के निशान नहीं होते। यहां जैसे बैट की चोट थी ना तो वो उपड़ी हुई थी। इसने देखी इसने कल बोला ये इंटरव्यू मेरे को तो ये भी नहीं पता क्योंकि मैं तो जिसे कहते हैं जो पुलिस केस हुआ उसका क्या हुआ फिर?


सर जी पुलिस केस हुआ वो एफआईआर भी बंद हो गई। 307 120 लगी हुई थी। परंतु सीबीआई वाले ने बताया कि अंकल यह यूनिवर्सिटी बादल की है। बादल उसमें 2013 में उनकी सरकार थी और जो बे ऑफ़ टाकिंग डॉक्टर की थी तो हो सकता है जैसे हमें बोला था तो वो छोड़ा ही नहीं था व्यूज देने के लायक कि बच्चा हमने तो सोचा वो ठीक हो जाता। हमने पूरी हद तक जितनी हमारी पहुंच थी मतलब जिसे कहते हैं घर भी बेचा ना तो उसकी बदौलत ही बेचा कि भाई चलो यह ठीक हो जाए। तो वो मारा हुआ ही था। गिरा गारा नहीं था। परंतु पंजाब केसरी में उन्होंने अपने आप वो अखबार में दिया जैसे कुछ अखबार हिंदुस्तान टाइम वालों ने यहां नहीं आए आप तो यहां आए जी परमात्मा आपको भी हेल्दी वेल्थदी हैप्पी रखे आप साक्षात मेरे से पूछ रहे हैं वहां ना हमें पूछा गया ना कुछ हां एक डीआईजी का सेक्रेटरी आया कह रहा है

या लड़के को परेशान कर रहे हैं पुलिस वाले ऐसेसे हालांकि हमने पांच दिन बाद करी है वो भी नहीं कराना चाहता सीबीआई जांच हुई थी सीबीआई जांच कुछ नहीं थी वो तो ऐसे ही जानने वाला आ गया कोई ना अच्छा तो उसने पूछा होगा वो और पुलिस ने मामले को रफादफा कर दिया। कुछ हमारे साथ तो कुछ भी नहीं हुआ। उसके बाद हमें फोन आने लगे। रात को 2:00 बजे 2:30 बजे वो कॉपी मेरे पास है। वो फोन नंबर भी है।

फिर हमने बोला मैंने सीसी टू सीपी दिल्ली सीसी टू डीआईजी पंजाब। वो मेरे पास वो क्या है? रजिस्टर्ड लेटर होते हैं ना वह सीधे नहीं है। आज भी है श्री सीसी टू आईजी पंजाब क्योंकि वहां पर यह है किसी ने बताया ऐसे जैसे आप जैसे कोई ना कोई तो मिल ही जाता है मैंने कहा ऐसे ऐसे हो रहा वहां कैमरा लगाया उस मकान में वो टाइम्स ऑफ वाले इंडिया वाले गए थे उन्होंने सब देखा हुआ तो ऐसे-से फिर हमें वो खातिर वो बात तो मेरे को याद नहीं है

इसलिए हमने फिर वो मकान बेचा उसके बाद क्या हुआ पंजाब पुलिस का एक बंदा आया उसने मेरे को एसएओ का नंबर दिया एक दो बंद मुंशी का नंबर दिया कह रहा अंकल आज से बात नहीं हो गई उसने मेरे से साइन करवा लिया किसी चीज ठीक उसके बाद कोई हमें फोन नहीं आया ना तो वो जो हरकतें हो रही थी जैसे रात में गोरगर कोई घटना नहीं घटी हमारे साथ तो उसके बाद हमने ये मकान बेच दिया फिर तो ये है

हरीश राणा के पिता लगातार यहां पर कहते हुए नजर आए पूरी हालात उन्होंने बताए कि किस तरह से जब उनको खबर मिली वो तुरंत वहां पर पहुंचे और कैसे डॉक्टर्स का रवैया रहा और और भी कई नाम लिए हैं उन्होंने। फिर इस केस में आखिर हुआ क्या है वह सब कुछ यहां पर हरीश राणा बता रहे थे। इस पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें जरूर बताएं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *