32 साल के हरीश राणा इच्छा मृत्यु की ओर बढ़ रहे हैं और उनके मां-बाप उनकी मुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 13 वर्ष तक मां-बाप ने अपने बेटे को भयानक पीड़ा में देखा है। उनके लिए अपने बेटे की मृत्यु इस असहनीय पीड़ा से मुक्ति है। इसलिए कभी उनके चेहरे पर मौत की उदासी दिखती है तो कभी मुक्ति का संतोष। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एम्स ने इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एम्स के इंस्टट्यूट रोटरी कैं!सर अस्पताल के पिलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हरीश राणा को ट्यूब से भोजन देना कल ही बंद किया जा चुका है। आज से उनका पानी भी बंद कर दिया जाएगा। इस तरह वे धीरे-धीरे इस दुनिया से विदा लेंगे। जीवन के अंतिम क्षणों में हरीश को कोई शारीरिक पीड़ा ना हो। एम्स के डॉक्टर इसका खास ख्याल रख रहे हैं। हरीश को कोई ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया गया है।
सिर्फ ट्यूब के जरिए पोषण दिया जा रहा था। वह भी हटा लिया गया है। आज यानी मंगलवार से हरीश को पानी देना भी बंद कर दिया जाएगा और पानी के लिए लगे ट्यूब को कैप लगाकर बंद कर दिया जाएगा। उसे निकाला नहीं जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक खाना पानी बंद होने के बाद मनुष्य औसतन 10 दिन जीवित रह सकता है।
लेकिन जीने के यह दिन मनुष्य की शारीरिक क्षमता पर भी निर्भर करते हैं। भोजन पानी त्याग कर भी कुछ लोग दो सप्ताह तक जीवित रह जाते हैं। इसलिए यह ठीक-ठीक नहीं [संगीत] कहा जा सकता कि हरीश को मुक्ति कब मिलेगी। हरीश की इच्छा मृत्यु के बाद एम्स से सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भी पेश की जाएगी। इस खबर में फिलहाल इतना ही। देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए देखते रहिए.