ईरान और अमेरिका के बीच चल रही टेंशन अब और खुलकर सामने आ गई। करीब 1 महीने से चल रहे इस संघर्ष के बीच जहां अमेरिका अपने शर्तों पर सीज फायर कराना चाहता वहीं ईरान ने भी ट्रंप के सामने पांच बड़ी शर्तें रख दी। और अगर अमेरिका इन पांच शर्तों को मानेगा तभी ईरान की ओर से युद्ध विराम होगा। ईरान की पहली शर्त है कि उसके खिलाफ हर तरह के हमले और टारगेट किलिंग तुरंत बंद हो।
दूसरी शर्त ऐसा ठोस सिस्टम बने जिससे भविष्य में उस पर फिर से युद्ध थोपा ना जा सके। ईरान की तीसरी शर्त यह कि इस जंग में जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई और मुआवजे की गारंटी चाहिए। साफ और लिखित में। इसके अलावा चौथी शर्त जो काफी बड़ी है। ईरान चाहता है कि सिर्फ उसके खिलाफ नहीं बल्कि पूरे इलाके में जितने भी मोर्चे खुले हैं उन सब पर लड़ाई पूरी तरह खत्म हो।
यानी आधा अधूरा सीज फायर उसे मंजूर नहीं। और पांचवी और सबसे बड़ी मांग स्टेट ऑफ हरमोस पर उसके अधिकार को दुनिया खुले तौर पर माने और इसकी गारंटी भी दे। यानी साफ है ईरान सिर्फ युद्ध रोकने की बात नहीं कर रहा बल्कि पूरी पावर इक्वेशन बदलने की कोशिश में। वहीं इससे पहले अमेरिका ने भी ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था। यानी एक ऐसा रोड मैप जिसके जरिए जंग को रोका जा सके और बातचीत की टेबल पर लौटने का रास्ता बनाया जा सके। इसमें ऐसी शर्तें थी
मानो ईरान जंग नहीं अमेरिका के सामने सरेंडर कर रहा हो। ट्रंप ने जो शर्तें रखी थी उसमें ईरान को अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने की बात तो थी ही लेकिन साथ ही साथ ऐसी मांग की गई थी जो ईरान कभी नहीं मानता जैसे ईरान को 60% एनरिच्ड यूरेनियम अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को देना इंटरनेशनल एजेंसी को पूरा एक्सेस देना स्टेट ऑफ हॉर्मोस खुला रखना मिलिट्री एक्टिविटी कम करना ईरान के मिसाइल प्रोग्राम पर कंट्रोल यानी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल्स पर रोक किया सख्त निगरानी।
इसके अलावा इंटरनेशनल मॉनिटरिंग स्वीकार करना और अगर यह सभी शर्तें ईरान मानता तो ईरान पर लगे आर्थिक और ट्रेड प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं। हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया और अब पांच शर्तें अमेरिका के सामने ईरान ने रख दी हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान की शर्त स्वीकार करेगा?
क्योंकि अगर ट्रंप यह शर्त मान लेते तो एक तरह से ईरान इस जंग में अमेरिका पर हावी हो जाएगा। क्योंकि जिस मकसद से अमेरिका ने ईरान पर हमला शुरू किया था वो सफल नहीं माना जाएगा और बड़ी बात यह शर्तें इजराइल कभी नहीं स्वीकार करेगा क्योंकि ईरान की बढ़ती कारवाई को वो वैसे भी अपनी अस्तित्व की लड़ाई मान रहा है। ईरान ने जो अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी हैं उस पर आपकी क्या राय है? कमेंट करके जरूर बताएं.