हमारी फिल्म इंडस्ट्री वेस्टर्न कल्चर से कितनी ज्यादा इन्फ्लुएंस्ड है। यह तो हमने फिल्मों की कहानियां, फिल्मों के म्यूजिक, फिल्मों का फैशन, फिल्मों के गाने, डांस स्टाइल सभी में देखा है। बार-बार पब्लिक को इंडियन रूट्स की फिल्में परोसने के बजाय वेस्टर्न फिल्में परोसी गई है। कुछ इस तरह से खुद बॉलीवुड वाले डिपेंडेंट है फिल्मों के लिए वेस्टर्न मूवीज पर। इधर बात करें वेस्टर्न फिल्मों की तो वह इंडियन फिल्म्स या इंडियन सुपरस्टार्स को कितना प्रायोरिटी देते हैं
यह तो रिसेंटली तब देखने को मिला जब ऑस्कर्स हुए और ऑस्कर्स में पिछले साल जिन एक्टर्स की डेथ हुई उन्हें जब श्रद्धांजलि दी गई तो उसमें से हमारी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज सुपरस्टार धर्मेंद्र जी का नाम गायब रहा। धर्मेंद्र जी को ऑस्कर्स पर नेगलेक्ट करना उन फिल्म मेकर्स के मुंह पर बड़ा थप्पड़ है
जो वेस्टर्न कल्चर और वेस्टर्न फिल्मों पर डिपेंडेंट है। इधर हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र का नाम ऑस्कर्स की रिमेंबरिंग लिस्ट में शामिल नहीं करने पर दुख जताते हुए कहा है धर्मेंद्र को ऑस्कर्स में नेगलेक्ट करना बहुत शर्मनाक बात है। वह जाने-माने एक्टर थे। उन्हें दुनिया भर से प्यार मिला। हालांकि उनकी पहचान कभी भी किसी अवार्ड की मोहताज नहीं थी। हेमा मालिनी ने आगे कहा कि मैं और धर्मपाल जी कभी भी ऑस्कर्स की परवाह ही नहीं करते थे।
हमें जो पब्लिक से प्यार मिला वही हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। काम मैंने भी इंडस्ट्री में बहुत किया। मीरा और लाल पत्थर में मेरे काम की बहुत तारीफ हुई लेकिन तब भी मुझे अवार्ड नहीं मिला। इधर हेमा मालिनी की बेटी एशा देओल ने अपने पिता को ऑस्कर्स में नेगलेक्ट करने की बात पर कहा कि मेरे पिता बहुत बड़े दिल के थे।
उनके लिए यह सब चीजें मायने रखती ही नहीं थी। उन्होंने जिंदगी में कभी पहचान और रुतबे को प्रायोरिटी नहीं दी बल्कि प्यार, दयालुता और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखने के बारे में थी। तो बहुत कुछ कह जाती है यह बातें धर्म जी की पर्सनालिटी के बारे में ही वाज़ अ ट्रू आइकॉन और बहुत दुख होता है कि फिल्म इंडस्ट्री से एक ऐसा सुपरस्टार चला गया जो सबसे बेहतरीन इंसान था।