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इज़रायल नहीं यहाँ होगा चाइना का सबसे बड़ा हमला

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भले ही अभी आपके हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाई वेस्ट एशिया या मिडिल ईस्ट में चल रही हो, ईरान की चल रही हो और बहुत लोगों ने यह भी सवाल पूछे कि चाइना और रशिया क्या कर रहे हैं? उन्होंने अपना अग्रेशन क्यों नहीं दिखाया? ये सब हो क्या रहा है? जब वक्त पड़ा तो ईरान का साथ कोई नहीं दे रहा। लेकिन ईरान अकेले पूरी दुनिया से लड़ रहा है। अब आपको बताते हैं कि चाइना कर क्या रहा है और असली तैयारी चाइना की कहां है और किस प्रकार से ट्रंप को और यूएस को चाइना ने घेरने की तैयारी की है। एक बहुत बड़ी जगह ट्रंप भूल गए। एक सबसे स्ट्रेटेजिक जगह जहां पे अब चाइना हो सकता है सबसे बड़ा वॉर करे वो आपको देखना पड़ेगा और वो है ताइवान। ताइवान के बारे में हम आपको बताना चाहते हैं कि चाइना किस प्रकार से यूएस को वहां पर घेर सकता है और क्या लेटेस्ट अपडेट आई है? मेरा नाम है नागेंद्र सिंह और आप देख रहे हैं वन इंडिया। सबसे पहले देखिए आप यह रिपोर्ट। यह ताइवान के तरफ से रिलीज किया गया है। मैं आपके लिए इसको थोड़ा पढ़ देता हूं। सो दैट आपको आईडिया मिल जाए कि यह इंपॉर्टेंट क्यों है और इस रिपोर्ट में क्या बोला गया है।

यह रिपोर्ट जो कि ताइवान की तरफ से रिलीज किया गया है मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ताइवान और कुछ आप देख रहे होंगे इसमें चाइनीस में भी लिखा है। लेकिन जो सबसे बड़ी बात इसमें निकल कर के आ रही है कि सात शिप्स सात प्लान शिप्स पीएलए पीपल रिपब्लिक ऑफ चाइना उनके शिप्स और दो ऑफिशियल शिप्स दे आर ऑपरेटिंग। यह तो ऑपरेट कर रहे हैं साउथ चाइना सी में और ताइवान के अराउंड बट जो बड़ी खबर है वो आपको दिख रही है कि इनके नेवी शिप्स हैं लेकिन जो प्लेेंस हैं, जेट्स हैं चाइना के वो ऑपरेट नहीं कर रहे हैं। अब सबसे ज्यादा जो अनुमान एक्सपर्ट्स लगा रहे हैं या आपने देखा होगा कि हमने एक इंटरव्यू किया था जीडी बक्शी के साथ और उन्होंने भी यही बोला था कि चाइना जो टारगेट कर सकता है वो ताइवान को कर सकता है। यह उनके लिए सबसे इंपॉर्टेंट मौका है। एक्सपर्ट्स के हिसाब से अभी यह शांति क्यों है? तो यह शांति हो सकती है कि जो सबसे बड़ा बवंडर आने वाला है ताइवान पे उसकी तैयारी हो। पीएलए के जेट्स हमेशा वहां पर घूमते रहते हैं। ताइवान की हिस्ट्री अगर आपको नहीं पता है तो आपको बता दें कि 1949 में जब सिविल वॉर हुआ था चाइना में तो चाइना का एक मेन लैंड बन गया था जिसको पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बोलते हैं

और ताइवान जो कि चाइना का ही पार्ट माना जाता है चाइना के द्वारा उसको रिपब्लिक ऑफ चाइना बोलते हैं। लेकिन जो नेता थे, सर्वोच्च नेता थे चाइना के 1949 के उन्होंने उसी समय बोल दिया था कि एक ना एक दिन ताइवान को मिलना ही पड़ेगा चाइना मेनलैंड से और वहां का रूल चलेगा। लेकिन यूएस का बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है और चाइना यूएस के उस इंटरेस्ट को खत्म करना चाहता है। बहुत सारे लोगों ने बोला कि चाइना डायरेक्ट क्यों नहीं एंटर कर रहा? लेकिन अब हो सकता है ईरान के ये सारे अटैक्स के बीच चाइना सीधे हमला करे और वो भी बिल्कुल भारत के करीब जो साउथ चाइना सी है उधर हमला हो और ताइवान पे कब्जा करने की कोशिश करें। ट्रंप के लिए क्यों मुश्किलें बढ़ जाएंगी? क्योंकि उनके पेट्रियट मिसाइल्स ईरान लगातार खर्च किए जा रहा है। ताइवान का अपना एयर डिफेंस तो है लेकिन वो एक छोटा सा आइलैंड है और उसके पास इतनी ताकत नहीं हो पाएगी कि वो चाइना से लड़े। ट्रंप के सपोर्ट के बिना उनका कोई अपना फुल एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है। पेट्रियट मिसाइल्स ही उनकी आखिरी होप है।

लेकिन अगर यूएसए को इतनी बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ रही है मिडिल ईस्ट में जो अब एक रीजनल वॉर बन चुका है तो उनके लिए बहुत ही मुश्किल होगा कि वो ताइवान को कोई सपोर्ट प्रोवाइड कर पाएं और वहां से कुछ बचा पाएं। अब समझिए कि यूएस को यह लड़ना क्यों पड़ेगा और क्यों ताइवान इतना इंपॉर्टेंट है? ताइवान के पास ऐसे चिप्स बनाने की फैक्ट्रीज है जो पूरे दुनिया में इस्तेमाल होती है और वो चिप्स केवल गाड़ियों में ही नहीं बल्कि जेट्स में भी इस्तेमाल होते हैं। सेमीकंडक्टर्स को लेकर के ताइवान का बहुत ज्यादा प्रोडक्शन है। तो ताइवान एक ऐसी कंट्री है जो टेक्नोलॉजी की वजह से पूरी दुनिया को प्रभावित करती है।

वो एक देश तो यूएस नहीं मानता लेकिन वो चाइना का ही पार्ट है। लेकिन ताइवान एक फ्री कंट्री के रूप में ऑपरेट करना चाहता है जो वो नहीं कर पाते। अब ये ताइवान एक नया सेंटर बनकर निकल सकता है अगले एक हफ्ते में जैसे ही यूएस के पेट्रियट मिसाइल्स कम पड़ना शुरू हो जाए मिडिल ईस्ट में तो एक बहुत बड़ी खबर होगी और आपको समझना पड़ेगा कि चाइना का रोल कैसे अब बढ़ता जा रहा है लेकिन वो डायरेक्ट ईरान में नहीं जा रहे क्योंकि अगर डायरेक्ट जाते हैं तो यह ऑफिशियली एक वर्ल्ड वॉर हो सकता है लेकिन अगर वो ताइवान पे अटैक करते हैं फिर देखेंगे ट्रंप कैसे रिएक्ट करते हैं लेकिन ये एक नया वॉर बन बनता हुआ जरूर नजर आ रहा है ईरान की जगह चाइना और ताइवान के बीच। मेरा नाम है नागेंद्र सिंह। आप देख रहे हैं वन इंडिया। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। डाउनलोड द वन इंडिया ऐप नाउ।

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