अलग-अलग कारणों के चलते भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक है। इसलिए यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एक मत और एकजुट आवाज दुनिया में जाए। अध्यक्ष जी जब से यह युद्ध शुरू हुआ है तब से ही प्रभावित देशों में हर भारतीय को जरूरी मदद दी जा रही है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्रध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है।
दुर्भाग्य से इस दौरान कुछ लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और कुछ घायल हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवार जनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल है उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है। अध्यक्ष जी प्रभावित देशों में हमारे जितने भी मिशन है वह निरंतर भारतीयों की मदद करने में जुटे हैं। वहां कम काम करने वाले भारतीय हो या फिर जो टूरिस्ट वहां गए हैं सभी को हर संभव मदद दी जा रही है।
हमारे मिशन नियमित रूप से एडवाइज़री जारी कर रहे हैं। यहां भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24/7 कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई है। इनके माध्यम से सभी प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है। अध्यक्ष जी संकट की स्थिति में देश विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रही है।
युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग 1000 भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी देशों में भारतीय स्कूलों में हजारों विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीबीएसई ने ऐसे सभी भारतीय स्कूलों में होने वाली कक्षा 10वीं और 12वीं की निर्धारित परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।
इन बच्चों की पढ़ाई निर्वाद चलती रहे इसके लिए सीबीएसई उचित कदम उठा रही है। यानी सरकार संवेदनशील भी है, सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है। माननीय अध्यक्ष जी भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर जैसी अनेक जरूरी चीजें हॉर्मोन ट्रेड के रास्ते से आती है। युद्ध के बाद से ही हॉर्मो स्ट्रेट में जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है।
बावजूद इसके हमारी सरकार का यह प्रयास रहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित ना हो। देश के सामान्य परिवारों को परेशानी भी कम से कम हो इस पर हमारा फोकस रहा है। हम सभी जानते हैं देश अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है।
इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने एलपीजी के डोमेस्टिक उपयोग को प्राथमिकता दी है। साथ ही एलपीजी के देश में ही उत्पादन को भी बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोल डीजल की सप्लाई पूरे देश में सुचारू रूप से होती रहे। इस पर भी लगातार काम किया गया है।