खामोशी में डूबी यह तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं। हरीश राणा का परिवार अस्थियां चुनने पहुंचा। यूपी सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी का भी बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं दिल से। हरीश राणा के पिता सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हैं। सरकार की तरफ से हरीश के परिवार के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। वहीं यह तस्वीरें सचमुच भावुक करने वाली हैं।
हरीश राणा को 13 साल बाद दर्द से मुक्ति मिली। 13 साल एक लंबा इंतजार। उम्मीद और बेबसी के बीच झूलता यह परिवार। आज वही परिवार हरीश राणा की अस्थियां चुनने पहुंचा। हर एक मुट्ठी राख जैसे बीते 13 सालों की कहानी समेटे हुए। 25 फरवरी को दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में हरीश राणा का अंतिम संस्कार जब हुआ तो मानो सभी की आंखें नम हो गई। यूपी तक की टीम ने मृतक हरीश राणा के पिता से एक्सक्लूसिव बातचीत की।
हरीश राणा के पिता अशोक राणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हैं और बताते हैं सरकारी घोषणाओं के बारे में। बताते हैं कि कैसे योगी सरकार ने मदद की और क्या बड़ा आश्वासन दिया। सर्वप्रथम मैं सर्वशक्तिमान परमात्मा का धन्यवाद करता हूं उसी परमात्मा का जिनकी छतरछाया में ये हमारे लड़के का जो मान सर्वोच्च अदालत से माननीय हमारे न्यायमूर्ति प्रदीवाला जी और विश्वनाथन जी ने जो मानवीय निर्देश दिए।
सबसे पहले हम उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। दूसरे नंबर पे तीसरे नंबर पे हम गाजियाबाद सरकार के मतलब यूपी सरकार के मुख्यमंत्री माननीय आदित्यनाथ योगी जी का भी बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं दिल से। उन्होंने जिला अधिकारी और जीडीए के बीसी साहब को और आयुक्त कमिश्नर को एमसीडी वाले को हमारे घर पहुंचा और हमारी सहायता हेतु उन्होंने कुछ घोषणाएं की है और मदद भी की है।
वो कह रहे हैं कि ₹1 लाख हम देंगे। दर्द के इस समंदर में सरकार की तरफ से मिला यह सहारा परिवार के लिए राहत बनकर आया है। पिता बताते हैं कि सरकार ने लगभग ₹1 लाख की मदद की घोषणा की है। हरीश राणा पंच तत्वों में विलीन हो गए लेकिन पीछे रह गई तमाम यादें। और एक ऐसा दर्द जिसे शायद शब्दों में बयां करना आसान नहीं। हरीश राणा अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। पढ़ाई में तेज, फिटनेस के दीवाने और भविष्य को लेकर बड़े सपने देखने वाले हरीश की जिंदगी 20 अगस्त 2013 को अचानक बदल गई। हरीश अपनी पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए। यह हादसा इतना भयानक था, इतना गंभीर था कि उनके सिर में गहरी चोट आई। और इसी एक पल से पूरे परिवार की जिंदगी बदल गई।
हादसे के बाद पिता अशोक राणा ने अपने बेटे को बचाने की बहुत कोशिश की। लेकिन हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं पाया। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 13 साल बाद हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी और 24 मार्च 2026 को हरीश राणा ने दिल्ली एम्स में आखिरी सांस ली। 25 मार्च को हरीश राणा को अंतिम विदाई दी गई और आज यानी 26 मार्च की सुबह परिवार अस्थियां इकट्ठा करने पहुंचा था.