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हरीश राणा की मौत के बाद रोते हुए बोले पिता, कहा हाथ जोड़ता हूं ये मत करना..!

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13 साल से कोमा में रहे हरीश राणा की मौत के बाद हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने हाथ जोड़कर पूरी दुनिया से कहा, मैं हाथ जोड़ता हूं यह गलती मत करना। आखिरकार क्यों हरीश राणा की मौत के बाद भी पूरी नहीं हो सकी हरीश राणा की अंतिम इच्छा। अगर पिता अशोक राणा ने नहीं तो किसने किया हरीश राणा का दिल्ली में आज सुबह अंतिम संस्कार? हेलो दोस्तों, मैं हूं पूनम अधिकारी। अक्सर मैं आपको इस चैनल में हमेशा जो बॉलीवुड स्टार्स हैं हमारे जो बॉलीवुड के सेलिब्रिटीज हैं उनसे जुड़ी खबरें उनसे जुड़े हुए अपडेट्स उनसे जुड़े हुए तमाम जो मसले हैं

वो मैं आपको दिखाती रहती हूं। लेकिन आज अपने इस वीडियो में मैं बात करने वाली हूं उस हरीश राणा की जिसके लिए आज पूरा देश रो रहा है। चाहे वो बच्चा हो, बूढ़ा हो, जवान हो, हर कोई हरीश राणा के बारे में इस वक्त सोच रहा है। जी हां, वही हरीश राणा जो पिछले 13 साल से कोमा में थे। वही हरीश राणा जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भारत में पहली बार किसी को इच्छा मृत्यु की इजाजत दी थी। उसी हरीश राणा ने कल दिल्ली की एम्स में अंतिम सांसे ली और आज सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन आप जानते हैं जब हरीश राणा का अंतिम संस्कार हो रहा था तो उस वक्त उनके पिता अशोक राणा ने कहा मैं हाथ जोड़ता हूं यह गलती मत करना। क्या कहा अशोक राणा ने?


और क्यों अशोक राणा ने अपने पिता अपने और क्यों अशोक राणा ने अपने बेटे हरीश का अंतिम संस्कार नहीं किया? पूरा मामला मैं आपको आज आपको बताने वाली हूं इस वीडियो में। लेकिन बताने से पहले इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और चैनल को फॉलो करना मत भूलिएगा। हरीश राणा को कौन नहीं जानता? वही हरीश राणा जो पिछले 13 साल से कोमा में हैं। वही हरीश राणा जो 31 साल के तो हैं लेकिन ना वह खुद से खा सकते हैं ना बोल सकते हैं ना चल सकते हैं। बस बिस्तर पे एक लाश की तरह पड़े हुए हैं।

सोचिए उसी हरीश राणा को लेकर पिछले कई महीनों से हम लगातार सुन रहे थे कि उनके पिता जो माता-पिता हैं उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डाली कि इसको इच्छा मृत्यु दे दे दी जाए और दिल्ली के एम्स में लगभग 4:10 के आसपास शाम का वक्त था जब हरीश राणा ने आखिरी सांस ली। हरीश राणा की मौत की खबर आते ही पूरी दुनिया में सन्नाटा छा गया। हर कोई आज नम आंखों से हरीश राणा को विदाई दे रहा है।

14 मार्च के आसपास हरीश राणा को गाजियाबाद से एम्स में शिफ्ट कर दिया गया था और यहां पे उनकी इच्छा मृत्यु की जो प्रोसीजर है जो प्रक्रिया है उसे शुरू कर दिया गया था। दिल्ली के ग्रीन पार्क में जब हरीश राणा का अंतिम संस्कार हो रहा था तो उनके जो पिता है अशोक राणा उन्होंने रोते हुए हाथ जोड़ते हुए जो भी उस अंतिम संस्कार में मौजूद था सिर्फ हाथ जोड़ते हुए अशोक राणा सर ने सिर्फ एक ही बात कही। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे की मौत पर प्लीज आप रोना मत। जो भी लोग यहां पे इस वक्त हैं इस अंतिम संस्कार में मौजूद हैं।

मैं हाथ जोड़ता हूं कि आप रोना मत। मैं चाहता हूं कि मेरे बेटे को हंसकर विदाई दी जाए क्योंकि 13 साल तक उसने बहुत कुछ सहा है। सर सोचिए साल 2013 के आसपास जो है हरीश राणा का एक्सीडेंट हो गया था। वो अपने कॉलेज की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की जो चौथी मंजिल से वहां से गिर गया था और उसके बाद से 2013 का इंसिडेंट है और ये 2026 चल रहा है। साल 2026 तक यानी इतने सालों से लगभग 13 सालों से वो बिस्तर में थे

और जो उनके बूढ़े मां-बाप हैं वो उनकी सेवा कर रहे थे। आप जानते हैं कि जब आज सुबह दिल्ली के ग्रीन पार्क में जब अंतिम संस्कार हुआ तो ये अंतिम संस्कार हरीश के पिता अशोक राणा ने नहीं किया बल्कि जो हरीश राणा के जो छोटे भाई हैं उन्होंने अंतिम संस्कार किया क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि आखिरी वक्त में माता-पिता के अलावा जिसने सबसे ज्यादा हरीश राणा की सेवा की वो उनके भाई ही थे। वो उनका छोटा भाई था जो अपनी सुबह ऑफिस जाने से पहले अपने भाई को पूरा नहलाकर, धुलाकर, उसको खाना खिलाकर फिर ऑफिस जाता था

और शाम को आता था तो फिर अपने बड़े भाई की सेवा में लग जाता था। और इसीलिए आज जब अंतिम संस्कार हुआ तो पिता की जगह जो हरीश राणा के भाई हैं वो इस अंतिम संस्कार में बैठे। कितनी कितनी दुखद बात है सोचिए एक इंसान जब बूढ़ा हो जाता है तो एक जब शख्स बूढ़ा हो जाता है तो वो यह उम्मीद करता है कि उसके जो बच्चे हैं वो उसका सहारा बनेंगे। लेकिन एक पिता जो बूढ़ा हो चुका है आज उसके कंधों पर अपने ही बेटे की अर्थी का इतना बड़ा बोझ था। राणा के पिता है अशोक राणा वो हरीश राणा का अपने बेटे का अंतिम संस्कार वो गाजियाबाद में करना चाहते थे।

एक बड़ी अंतिम यात्रा निकालना चाहते थे। लेकिन ऐसा हो नहीं सका क्योंकि एम्स के डॉक्टर का कहना था कि बॉडी जिस तरह से हो गई है मौत के बाद उनको ज्यादा वक्त तक रखना सेफ नहीं होगा और दिल्ली के एम्स में थे हरीश राणा और एम्स से फिर गाजियाबाद ले जाने में वक्त लगता है। इसीलिए जो एम्स के डॉक्टर हैं उन्होंने कहा कि आप दिल्ली में ही इनका अंतिम संस्कार कर दीजिए। दिल्ली के ग्रीन पार्क में ही क्योंकि वो पास भी है नजदीक भी है और वहां पे सारे इंतजाम कर भी कर भी दिए जाएंगे।

तो इसीलिए जो आखिरी इच्छा थी जो अशोक राणा चाहते थे कि वो अपनी बेटी की आखिरी इच्छा पूरी करें। उन्हें गाजियाबाद से अपने घर से उनको विदाई दे। ऐसा भी नहीं हो सका। आप जानते हैं जब 14 मार्च को दिल्ली के एम्स में हरीश राणा को एडमिट किया गया तो सबसे पहले जो खाने की जो ट्यूब जली थी उसको बंद कर दिया गया। जो पानी की ट्यूब थी वो बंद कर दी गई। जो ऑक्सीजन था वो बंद कर दिया गया।

क्योंकि हर कोई चाहता था कि हरीश राणा जितने दर्द में है उनको जल्द से जल्द इस दर्द से मुक्ति मिले। इस दर्द से आजादी मिले और एम्स के डॉक्टर्स ने पूरा ख्याल रखा कि जो हरीश राणा है उनको बिना दर्द हुए वो उस दुनिया को छोड़कर चले जाए और सबसे हैरानी की बात पता है भारत का ये पहला केस है जो हरीश राणा का वो पहला केस है जिसे इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी गई है। सोचिए उस उस पिता पर क्या बीत रही होगी जिसने खुद अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यु मांगी। जब 2013 में यह हादसा हुआ था जब हरीश जो राणा है

जो अपने यूनिवर्सिटी की जो बिल्डिंग से गिर गए थे। उस वक्त से लगातार उसके बूढ़े मां-बाप उसकी सेवा कर रहे हैं। दुनिया का ऐसा कोई डॉक्टर नहीं था। ऐसा कोई हकीम नहीं था जिनके पास वो अपने बेटे को लेकर नहीं गए। लेकिन कोई भी इलाज काम नहीं किया। जिसके बाद थक हारकर 3 साल पहले जो हरीश राणा के जो पिता हैं अशोक राणा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह इजाजत मांगी कि मेरे बेटे को आजाद कर दिया जाए क्योंकि वो कुछ भी नहीं कर सकता खुद से ना चल सकता है

ना बोल सकता है ना खा सकता है ना पी सकता है बस बिस्तर में पड़ा हुआ है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में के जो जज थे जब उन्होंने फैसला सुनाया कि हां चलिए हरीश राणा को इच्छा मृत्यु दे दी जाएगी तो जो जज थे जिन्होंने फैसला सुनाया उनकी भी आंखों में आंसू था कितना कितना इमोशनल मूवमेंट होगा दिल्ली में करोड़ों का मकान था हरीश राणा के पिता अशोक राणा का लेकिन अपने बेटे के इलाज के हरीश राणा के इलाज के लिए 13 साल से इलाज चल रहा है उनका।

उस इलाज की वजह से जो अशोक राणा है उन्होंने अपना यह दिल्ली का करोड़ों का घर भेज दिया था और गाजियाबाद के एक दो कमरे के फ्लैट में शिफ्ट हो गए थे। जो हरीश राणा की मां है निर्मला निर्मला राणा वो भी पिछले 13 साल से उनका कहना है कि वो किसी फंक्शन में नहीं गई। किसी शादी में नहीं गई क्योंकि वो सिर्फ और सिर्फ अपने बेटे की सेवा पानी में लगी हुई थी। क्योंकि उनको उम्मीद थी कि उनका बेटा एक दिन ठीक हो जाएगा।

लेकिन जब यह उम्मीद टूटी और पैसा भी खर्च हो रहा था। कहीं ना कहीं जो अशोक राणा हैं जो हरीश के पिता हैं उनका कहना है कि उनका जो जितना भी पैसा उन्होंने जोड़ा था अपना दिल्ली का मकान बेच दिया जितनी भी उनको जो आप कह सकते हैं जो रिटायरमेंट फंड मिलता है जो रिटायरमेंट के बाद जो पैसा मिलता है वो सब उन्होंने अपने बेटे के इलाज के में लगा दिया था। अब उनके पास पैसा तक नहीं बचा था। जिसके बाद उन्होंने थक हारकर फिर अपने बेटे के लिए सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु मांगी।

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