आखिर कैसे अब ईरान की तरफ से एक बड़ी चोट दी गई है। 31 दिन में 2400 पेट्रिएट स्वाहा हो गई हैं। थार्ड का स्टॉक खत्म हो गया है और 31 दिनों के युद्ध में ही अमेरिका ने अपनी मिसाइल डिफेंस का बड़ा हिस्सा गवा दिया है। अब उसे दोबारा तैयार होने में कहा जा रहा है कि 3 से 5 साल लगेंगे। इस दौरान वो दुश्मनों के हमले के सामने कमजोर हो गया है। चीन पर निर्भरता ने स्थिति और भी खतरनाक बना दी है।
इसके साथ जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े हैं विदेश मामलों के जानकार निपुण आलमय जी। उनसे जानेंगे। सर यहां पर अब ये कहा जा रहा है कि ट्रंप को युद्ध में एक बड़ा नुकसान हुआ है। क्योंकि अगर हम बात करें स्टक्स की तो यहां पर जो थर्ड मिसाइलें हैं वो खत्म होती हुई दिख रही है और इसमें चीन का बड़ा रोल है क्योंकि उसमें एक जो मैग्नेट लगता है वो दरअसल उसके लिए रेयर अर्थ जरूरी होती है। तो सर इस पे क्या कहना चाहेंगे?
नहीं बिल्कुल सही देखिए जिस प्रकार से अमेरिका ने माना जा रहा है कि थर्ड जो मिसाइल है 40% का स्ट्रोक जो था वो अमेरिका ने अपना खत्म कर दिया समाप्त कर दिया है तो निश्चित रूप से ये अमेरिका के लिए और एक पेट्रियट इंटरसेप्टर जो मिसाइल्स है वो भी करीब 2400 अमेरिका दाग चुका है। अब आप सोचिए अगर हम बात करें तो 650 के आसपास का उनका एक साल का रहता है पेट्रियट मिसाइल बनाने का जो पेट्रियट मिसाइल होती है।
तो करीब आप सोचिए कि अगर 650 एक साल में बनाते हैं 2400 खत्म कर दिए तो उनको दोबारा से बनाने में तीन चार साल लग जाएंगे और यही थर्ड ब्रेस्ट मिसाइल की हम बात करें तो उनको भी जो स्टॉक खत्म किया है वो चार से पांच साल लग जाएंगे और इंटरेस्टिंग बात ये है कि इनको बनाने में जो थर्ड इंटरसेप्ट मिसाइल है उसमें नी ओडियम और साथ में आपका सेम कोलबा ये इस प्रकार के रेयर मिलर्स यूज़ किए जाते हैं
जिनकी सप्लाई चीन करता है और चीन अगर ये सप्लाई रोक दे तो सोनम जी आप समझिए अमेरिका अपनी मिसाइल नहीं बना पाएगा ना तो सर क्या एक यही कारण है कि अब यहां पर जो है ट्रंप वो बेबस नजर आ रहे हैं और जो बयान आक्रामक होकर दे रहे थे अब वो ये कह रहे हैं कि जो युद्ध है वो जल्द समाप्त हो सकता है तो क्या इसलिए ये जल्दबाजी अमेरिका की तरफ से दिखाई जा रही है कि युद्ध को अब खत्म कर देते हैं
क्योंकि जो मिसाइलें हैं वो खत्म होती हुई नजर आ रही है ट्रंप को देखिए एक्चुअली क्या है कि आप शक्ति के दम पर ही तो दुनिया पर राज करते हैं। और अगर आपका मिसाइल खत्म हो रही है कल को किसी प्रकार का चीन और अमेरिका का आमने सामने फाइट होती है तो उस स्थिति में अमेरिका तो सुरक्षित हो गया। जितनी चाहे मिसाइल जो है चीन दाग देगा अमेरिका उसका रिप्लाई नहीं कर पाएगा।
तो कहीं ऐसा ना हो कि हम ईरान पे कंट्रोल करतेकरते अपनी ही सुरक्षा दांव पर रख दे। ये बात अब प्रेसिडेंट ट्रंप को अब समझ में आई जो कि इनको पहले समझ में आनी चाहिए थी और चीन इसीलिए खुश हो रहा है कि तुमने अपने आप को खुद ही क्या निमंत्रण दे दिया आज अमेरिका चीन पर डिपेंडेंट हो जाएगा अगर चीन उनको सप्लाई करने को मना कर देता है और आने वाले चार पांच साल में स्थिति ऐसी बनती है कि कल को अमेरिका चीन सामने होते हैं
तो उस स्थिति में चीन जो है वो हावी दिखाई देगा या हैवी दिखाई देगा अमेरिका के ऊपर तो निश्चित रूप से अमेरिका को बैकफुट पर आना होगा बिल्कुल और एक कही जाती है ना सोनम जी जो क्राइसिस के बाद में अमेरिका में जो कॉन्फिडेंस आया था उसी कॉन्फिडेंस में जाके उन्होंने ईरान में अटैक किया लेकिन ये नहीं पता था कि ये बाजी देखिए होता क्या है क्या वॉर शुरू कर देते हैं लेकिन जब उसका समाप्ति की बात आती है
तो ये केवल एक पार्टी पे डिपेंड नहीं होता है कई पार्टीज के ऊपर आज आप सोचिए चीन नॉर्थ कोरिया और अब रशिया जिस प्रकार का सपोर्ट कर रहा है चाहे वो इन का सपोर्ट उसकी ओर से हो या आपका वेपन का सपोर्ट हो चीन चीन की ओर से तेल खरीदा जाना, आर्थिक सपोर्ट हो, नॉर्थ कोरिया की ओर से, टेक्नोलॉजी की बात हो,
हर तरह का सपोर्ट ईरान को मिल रहा है। इसीलिए तो ईरान इतने दिन तक टिका हुआ है। किसके सामने? अमेरिका के सामने। तो मैं मानता हूं कि कहीं ना कहीं अमेरिका इस बात को समझ रहा है कि हमने अपनी ही सुरक्षा को क्या कर दिया? दांव पर लगा दिया है। ईरान के साथ इतना लंबा बोर्ड चला है