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ईरान का जासूस पकड़ा गया! पता चल गया कैसे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को शहीद किया?..

Hindi Post

ईरान के सुप्रीम लीडर अल्लामा ऐतुल्ला अली खामनई की शहादत को एक हफ़्ते से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। और पिछले एक हफ्ता के दौरान इसी सवाल का जवाब लोग तलाश करते रहें कि अमेरिका कैसे सुप्रीम लीडर तक पहुंच गया। ईरान के सबसे बड़े लीडर को अमेरिका और इसराइल ने कैसे इतनी आसानी के साथ मार दिया? ईरान से कहां सिक्योरिटी में चूक हुई या ईरान का निजाम इतना कमजोर क्यों है? ईरान के पास अपना एयर डिफेंस सिस्टम क्यों नहीं है? जब अमेरिका इसराइल चाहता है वहां आकर के बम बरसाता है

और किसी को भी मार कर चला जाता है। किसी मुल्क की सिक्योरिटी का निजाम ऐसा लाचार बेबस कैसे हो सकता है? इस सवाल के जवाब में दो बातें सामने आ रही है। एक का ताल्लुक इसराइल और अमेरिका की टेक्नोलॉजी से है और दूसरे का ताल्लुक ईरान में पाए जाने वाले मुसाद के जासूस से है। और ये जासूस कोई आम शख्स नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा कमांडर और लीडर है ईरान में। पहली बात ये बताई जा रही है कि अमेरिका और इजराइल के पास जदीद टेक्नोलॉजी है। ऐसे वसाइल है जो दुनिया में किसी के पास नहीं है।

और अमेरिका इजराइल जहां चाहे जिस मुल्क के बारे में चाहे किसी भी लोकेशन को ट्रेस कर सकता है। वहां तक पहुंच सकता है। अब ईरान में अमेरिका ने और इसराइल ने ये किया। खास तौर पर इसराइल के एजेंसी मुसाद ने ईरान में जितनी रेड लाइट है, जितने ट्रैफिक्स है, उन तमाम जगहों पर जो कैमरे लगे हुए होते हैं, उन तमाम कैमरों को मुसाद ने पहले हैक किया। उसके बाद उसका डाटा उसने हासिल करना शुरू किया और उस कैमरों के जरिए मुसाद ने निगरानी की कि ईरान के कौन से लीडर कहां जा रहे हैं?


किसके पास जा रहे हैं? किससे ज्यादा मुलाकात करते हैं। तो ट्रैफिक कैमरों के जरिए इजराइल ने लगातार वॉच किया, निगरानी की। ईरान के लीडरों को देखा कि उनकी सरगर्मियां क्या है और किस लीडर से मुलाकात करने वह ज्यादा जाते हैं और जब उन्होंने अली शमखानी को देखा कि वो ज्यादा किधर जाते हैं। उनकी गाड़ी किस घर के पास या किस गली में ज्यादा रुकती है और अली शमखानी के बारे में मूसाद को इसराइल को यह पता था कि वो ईरान के सुप्रीम लीडर आया अली खामनई के एडवाइजर हैं।

मुशीर हैं और सुप्रीम लीडर के घर की तरफ ज्यादा उनका एडवाइजर और मुशीर ही जा सकता है। कोई और नहीं जा सकता। अली शमखानी उसी के पास ज्यादा जा सकते हैं जिसके एडवाइजर है। चुनांचे मुसाद ने इस बात को यकीनी बना लिया। कंफर्म कर लिया कि अली शमखानी जिससे ज्यादा मिलने जाते हैं वो सुप्रीम लीडर है। कोई और नहीं है। वयातुल्लाह अली खामन का दफ्तर है। उनका घर है। किसी और का घर नहीं है। और इस बात पर मुसाद ने यकीन कर लिया कि वही अली खामन का घर है। यह तो एक मामला हुआ। एक वजह हुई कि ट्रैफिक कैमरों को हैक करके इसराइल यहां तक पहुंच गया। लेकिन यह कोई ज्यादा बड़ी वजह नहीं है।

या इसको ज्यादा बड़ी कामयाबी नहीं बताई जा सकती। क्योंकि ठीक है तुमने ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया तुमने रास्तों की निगरानी कर लिया लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि गली की लोकेशन भी मालूम हो जाए कहां पर घर है वो कब है कब नहीं है वो कब मीटिंग कर रहे हैं कब मीटिंग नहीं कर रहे हैं इसको कोई जान ले यह पॉसिबल नहीं है जब तक अंदर से कोई इंफॉर्मेशन ना मिल जाए अब दावा यह किया जा रहा है कहा ये जा रहा है कि इसराइल को खामनई साहब के दफ्तर से उनके घर से खबर मिलती है लोकेशन मिलती ती है कि अभी खामन साहब मीटिंग कर रहे हैं। डिफेंस मिनिस्टर के साथ हैं। आर्मी चीफ के साथ हैं।

और उनको जब पूरी मीटिंग का पता चलता है, पूरे प्रोग्राम का पता चलता है। उसके बाद ही अमेरिका और इसराइल ने अपने ऑपरेशन का आगाज किया। एयर स्ट्राइक शुरू कर दिया और खामनाई को शहीद कर दिया। अब जिस लीडर का नाम आ रहा है, जिस कमांडर का नाम आ रहा है, वह कमांडर है अलस फोर्स का कमांडर इन चीफ इस्माइल का। यह इस्माइल का हैं जिनको आप स्क्रीन पर देख रहे हैं और यह साल 2021 से अलदस फोर्स के कमांडर हैं। ईरान की अलकस फोर्स के इससे पहले कमांडर थे जनरल कासिम सुलेमानी।

जब अमेरिका ने बगदाद एयरपोर्ट के नजदीक उनको शहीद कर दिया। उनके बाद इस्माइल का को ही इस अलकत्स फोर्स का कमांडर इन चीफ बनाया गया। और यही इस आर्मी को संभाल रहे थे। और अलकत्स फोर्स का जो किरदार है वो यह है कि ईरान के बाहर ईरान से ताल्लुक रखने वाली मलेशिया को कैसे सपोर्ट करना है? ईरान की प्रोक्सस को कैसे मजबूत करना है, उसको कैसे सपोर्ट करना है, कैसे आगे बढ़ाना है, कैसे उससे रिश्ता रखना है, यह अलस फ़ की बुनियादी जिम्मेदारी होती है। जैसे हजबुल्ला को ईरान सपोर्ट करता है, होसी मलेशियाओं को सपोर्ट करता है या इराक में मलेशिया है, उसको सपोर्ट करता है। इसी तरह हमाज़ को भी ईरान की तरफ से सपोर्ट किया जाता है,

मदद दी जाती है। तो इन सब ग्रुप्स से कैसे राबता रखना है? कैसे ईरानी आर्मी इन सब ग्रुप्स को मदद पहुंचाएगी? यह जिम्मेदारी अलदस फोर्स की होती है। और जनरल कासिम सुलेमानी ने इसको बहुत मजबूत किया था। आगे बढ़ाया था। उनकी मौत के बाद इस्माइल का को इसका जिम्मेदार बनाया गया और वही इस काम को अंजाम दे रहे थे। अब कहा जा रहा है कि पिछले दिनों में कई हलाकतें जो हुई है उसके पीछे इस्माइल खानी का हाथ रहा है। इस्माइल खानी की बीच में कुछ दिनों के लिए गिरफ्तारी हुई थी।

लेकिन इस खबर को ईरान की मीडिया ने कंफर्म नहीं किया है ना ईरान के दानिशान ने इस पर कोई खास तत्सरा किया है। लेकिन अरब मीडिया में इस तरह की बातें की जा रही है। अब असल मामला क्या है? हुआ क्या? क्यों इस्माइल खानी पर शक किया जा रहा है? उसको जान लीजिए। 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामन की 9:00 बजे अपने घर में मीटिंग हो रही थी और उसकी मीटिंग में ईरान के डिफेंस मिनिस्टर भी मौजूद थे। आर्मी चीफ भी मौजूद थे। पासदारानी इंकलाब के कमांडर इन चीफ भी मौजूद थे।

और उसी मीटिंग में अलकुत्स फोर्स के कमांडर इन चीफ इस्माइल का भी मौजूद थे। और अमेरिका ने जब हमला किया तो अमेरिका के हमला होने से ठीक 10 मिनट पहले इस्माइल का वहां से बाहर निकल जाते हैं और उनके निकलने के 10 मिनट के दौरान ही वहां पर हमला हो जाता है और जितने लोग मौजूद थे हर एक की मौत हो जाती है। सुप्रीम लीडर की वहां पर मीटिंग होने वाली है। ये खबर भी सभी को पता नहीं थी क्योंकि बातचीत का दौर जारी था अमेरिका के साथ और ओमान सालसी का किरदार अदा कर रहा था।

ओमान के फॉरेन मिनिस्टर ने अमेरिका जाकर बातचीत की और कहा कि ईरान ने कुछ शर्तों को मान लिया है और अब बातचीत हो सकती है। अमेरिका के नायब सदर ने हरी झंडी दे दी थी। उसके बाद ओमान के फॉरेन मिनिस्टर ने ईरान के फॉरेन मिनिस्टर अब्बास सिराफसी से बातचीत की और कहा कि अमेरिका मान गया है न्यूक्लियर तवानाई के बारे में जो आपने प्रपोजल दिया है और बातचीत हो सकती है जंग रुक सकती है।

उसके बाद अब्बास राखची ने अपने एडवाइजर से और इसके अलावा डिफेंस मिनिस्टर से बातचीत की और इन लोगों ने तय किया कि पूरी सुरते हाल सुप्रीम लीडर को बताई जाए और उनका साइन करा लिया जाए इस मुहदा पर कि सारी चीजें तय हो गई है और अब अमेरिका पीछे हट रहा है वह हमला नहीं करेगा। 28 फरवरी को सुबह का 9:00 बजे का टाइम मीटिंग के लिए तय हो जाता है। और यह बात सिर्फ ईरान के डिफेंस मिनिस्टर को मालूम रहती है। आर्मी चीफ को यह बात पता रहती है। ईरान के सदर को भी इस बात का इल्म नहीं रहता है।

उसके अलावा पादराने इंकलाब के कमांडर इन चीफ को यह बात मालूम रहती है और अलस फोर्स के इसी कमांडर इन चीफ इस्माइल का को भी यह बात पता थी और तमाम लोग मीटिंग में जाते हैं और मीटिंग शुरू होने के कुछ ही देर बाद यह हमला शुरू हो जाता है। 10 मिनट पहले इस्माइल का वहां से निकल जाते हैं। इसलिए लोगों का जो शक है वह यकीन में तब्दील हो गया। लोगों को शक पहले से इस्माइल का पर था। क्योंकि अक्टूबर 2027 में जब हिजबुल्ला के सेक्रेटरी जनरल हसन नसरुल्लाह पर हमला हुआ और उनको इसराइल ने हमला करके शहीद कर दिया तो ठीक हसन नसरुल्लाह से मुलाकात करके 10 मिनट पहले इस्माइल का वहां से निकले थे

और उसके बाद हसन नसरुल्लाह पर हमला हो जाता है उनकी शहादत हो जाती है। इसी तरह दावा यह किया गया कि हसन नसरुल्लाह के बाद हाशिम सफीद्दीन जो हिजबुल्लाह के अगले सरबराह बने उनकी लोकेशन भी लीक करने में इस्माइल खानी का हाथ था। इस्माइल का ने उनसे जाकर मुलाकात की और इस मीटिंग के बाद भी उनकी शहादत हो जाती है। जून 2025 में इसराइल ने ईरान पर हमला किया और तेहरान पर इसराइल ने उस वक्त हमला किया जब ईरान के तमाम अहम तरीन कमांडर और फौजी जनरल मशवरा कर रहे थे। बातचीत कर रहे थे

और इसराइल के उस हमले में उस मीटिंग में मौजूद तमाम कमांडरों की शहादत हो जाती है। पिछले साल यानी 2025 में जब इसराइल ने ईरान पर हमला किया तो इसराइल ने ईरान पर उस वक्त और उस जगह हमला किया जहां ईरान के तमाम टॉप कमांडर इकट्ठे बैठे हुए थे। किसी मसले पर मीटिंग कर रहे थे। बातचीत का सिलसिला जारी था और इसराइल को बाजाब्ता खबर मिलती है। उनकी लोकेशन इजराइल को पता चल जाती है कि कहां पर ये लोग मीटिंग कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं और उसके बाद अचानक इसराइल ने एयर स्ट्राइक कर दिया और उस मीटिंग में जितने टॉप कमांडर थे सबको मार दिया। सबको शहीद कर दिया।

खबर भी आई पूरी दुनिया ने जाना कि 20 टॉप कमांडर को इसराइल ने हमला करके शहीद कर दिया। और ईरान की जितनी आर्मी है, जितने दस्ते हैं, जितने ब्रिगेड है, सभी के टॉप कमांडर की शहादत हो जाती है। सिवाय अलस फोर्स के कमांडर इन चीफ इस्माइल का की इस पर भी लोगों को शक हुआ। उसके बाद इस्माइल हनिया का मामला भी आता है। क्योंकि इस्माइल हनिया जुलाई में ईरान गए थे। तो ईरान में उन्हें पास इंकलाब के गेस्ट हाउस में ठहराया गया था। कहां ठहराया गया था? किस रूम में वो ठहरे यह लोकेशन किसी आम ऑफिसर को नहीं पता रहती या किसी के लिए पॉसिबल नहीं होता है। लेकिन इजराइल को पूरी इंफॉर्मेशन मिल जाती है।

मुसाद को पूरी जानकारी रहती है कि बाज़ाराने इंकलाब के हेड क्वार्टर में वो कहां ठहरे हैं? किस हेड क्वार्टर में इस्माइल हनिया को ठहराया गया है? उनका रूम नंबर क्या है? उनके साथ कौन-कौन है? और ठीक उनको उनके रूम में मार दिया जाता है। अब इस तरह की जो सेक्रेट इंफॉर्मेशन है, बहुत डीप नॉलेज वाली इंफॉर्मेशन है। यह कोई आम एजेंट किसी को नहीं दे सकता है। बल्कि टॉप लेवल का जो जनरल होता है, कमांडर होता है, उसी को इस तरह की इंफॉर्मेशन पता रहती है और वही आगे बढ़ाता है। इसलिए लोगों का हमेशा शक गया इस्माइल का पर। पिछली मर्तबा भी कुछ दिनों के लिए इस्माइल का को डिटेन किया गया था। वह मंजरनामा से गायब फिर वह बाद में सुर्खियों में आए।

मीडिया से हमेशा इस्माइल खानी दूर रहते हैं। ज्यादा पब्लिक प्लेस में नजर नहीं आते। अब सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनई की शहादत के बाद एक मर्तबा फिर अरब मीडिया में यह खबर गर्दिश कर रही है कि इनको फांसी दे दी गई है। कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि इनको डिटेन कर लिया गया है। लेकिन ईरान की मीडिया ने इस तरह की किसी भी खबर को वेरीफाई नहीं किया है ना कि ईरान के लोगों ने इस तरह की खबर को वेरीफाई किया है। अब आप इसको अफवाह भी समझ सकते हैं। यह हकीकत भी समझ सकते हैं।

यह भी सच्चाई है कि ईरान में मुसाद और सीआईए के एजेंट बड़े मजबूत है। अंदर तक पहुंचे हुए हैं और लगातार यह लोग अंदर की इंफॉर्मेशन इसराइल और अमेरिका तक पहुंचाते हैं। अब इस्माइल का क्या किरदार है इसके बारे में आप भी बता सकते हैं। अगले दिनों में तस्वीरें साफ हो जाएगी। लेकिन यह कुछ वाक्यात सच है। जैसे खामनई पर हमला होने से 10 मिनट पहले वो वहां से निकल गए।

इसी तरह हसन नसरुल्लाह के घर से 10 मिनट पहले निकलते हैं। वहां पर हमला हो जाता है। कुछ और मामले सामने आए हैं। हमास के एक और लीडर ईसा इब्ने मरवान थे जिनकी हलाकत बैरूत में हो गई थी। इसराइल ने हमला करके सबसे पहले उन्हीं को शहीद किया था। और दावा यह है कि यहां भी इस्माइल का किरदार था। उसी के जरिए लोकेशन लीक हुई थी। सच्चाई क्या है? व्ल्लाहु आलम बिवाब। आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में लिखें।

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