भारतीय फिल्म इंडस्ट्री जिसे हम बॉलीवुड के नाम से भी जानते हैं। हमेशा से अपनी विविधता और धर्मनिरपेक्षता के लिए जानी जाती रही है। यहां प्रतिभा को धर्म से ऊपर रखा जाता है। लेकिन विशेष रूप से 40, 50 और 60 के दशक में फिल्म निर्माताओं और कलाकारों का ऐसा मानना था कि एक न्यूट्रल या हिंदू नाम दर्शकों के बीच अधिक स्वीकार्य और सरल होता है। इसी परंपरा के चलते कई प्रतिभाशाली मुस्लिम अभिनेत्रियों ने हिंदू नाम अपनाए और उन्हीं नामों ने आगे चलकर इतिहास रच दिया। आइए जानते हैं उन 10 दिग्गज अभिनेत्रियों के बारे में जिनके असली नाम तो मुस्लिम थे लेकिन वह हिंदू नामों से घर-घर में मशहूर हुई। नंबर एक मधुबाला। बॉलीवुड की वीनस और सबसे खूबसूरत अभिनेत्री माने जाने वाली मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां देल भी था। उन्होंने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। नाम बदलने की कहानी जब मधुबाला बाल कलाकार के रूप में काम कर रही थी
तब देविका रानी जो बॉम्बे टॉकीज की मालकिन भी थी उन्होंने ऐसा काम किया जिसने आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा लोकप्रियता हासिल की। दरअसल देविका रानी ने बाल कलाकार मधुबाला के अभिनय और उनकी सुंदरता को देखकर उन्हें मधुबाला नाम दिया। इस नाम ने मुमताज को मधुबाला के तौर पर एक नई पहचान दी और मुगले आजम जैसी फिल्म समेत तमाम हिट फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका दिया। हिंदी सिनेमा के इतिहास में वो हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गई हैं। नंबर दो मीना कुमारी। फिल्मी दुनिया में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी ने अपनी आंखों और आवाज से दर्शकों को दर्शकों तक अपनी लाजवाब अदाकारी से अपना दीवाना बनाए रखा। वैसे यह बात भी बहुत कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम अली बख्श था जो एक रंगमंच के कलाकार थे। नाम बदलने की कहानी यह बात भी सुनने को मिलती है कि जब महजबी ने फिल्मों में कदम रखा तो निर्देशक विजय भट्ट ने उन्हें बेबी मीना का नाम दिया।
धीरे-धीरे महजबी बानो फिल्मी दुनिया में मीना कुमारी के नाम से मशहूर हो गई। उनके अभिनय की गहराई ऐसी थी कि आज भी उनके नाम की मिसाल दी जाती है। नंबर तीन नरगिस। भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में से एक नाम नरगिस का भी आता है। दरअसल सुनील दत्त की पत्नी नरगिस का असली नाम फातिमा राशिद था। उनकी मां अपने समय की मशहूर गायिका और फिल्म निर्माता भी थी। नाम बदलने की कहानी। यह किस्सा भी फिल्म जगत में काफी सुनने को मिलता है कि फातिमा को फिल्मों में आने के बाद नरगिस नाम दिया गया। मदर इंडिया में नरगिस ने ऐसा जानदार और शानदार अभिनय किया कि उनके किरदार ने उन्हें दुनिया भर में ख्याति दिलाई। हालांकि बाद में सुनील दत्त से शादी कर ली और उनके नाम के आगे दत्त लग गया। वैसे भले ही सुनील दत्त से शादी करके अपने नाम के आगे जो है उन्होंने दत्त लगा लिया हो लेकिन उनको सीने प्रेमी हमेशा नरगिस के नाम से ही जानते रहे। नंबर चार रीना रॉय। 70 और 80 के दशक की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल रीना रॉय ने नागिन और आशा जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया। ऐसा कहा जाता है कि जब वह अपने करियर के चरम पर थी तो वह उस वक्त फिल्मों में बाकी अभिनेत्रियों के मुकाबले सबसे ज्यादा फीस चार्ज करती थी। वैसे अगर उनके असली नाम की बात की जाए तो पता चलता है कि रीना रॉय का असली नाम सायरा अली था। नाम बदलने की कहानी। रीना के माता-पिता का तलाक होने के बाद उनकी मां ने अपने सभी बच्चों के नाम बदल दिए। सायरा अली रीना रॉय बन गई। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के साथ कई यादगार फिल्में दी और उस दौर की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में उनको गिना जाने लगा। नंबर पांच निम्मी।
राज कपूर की फिल्म बरसात से डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस निम्मी का असली नाम नवाब बानो था। निम्मी 50 के दशक की एक बहुत ही लोकप्रिय अभिनेत्री थी। उस वक्त अभिनेत्री के तौर पर उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और उनकी तमाम फिल्में हिट भी रही। नाम बदलने की कहानी। ऐसा सुनने को मिलता है कि अपने जमाने के दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर राज कपूर ने ही नवाब बानो को निमू नाम दिया था। वैसे यहां यह भी गौर करने की बात है कि निम्मी नाम नवाब बानो पर इतना जचा कि लोग उनका असली नाम भूल गए। वैसे निम्मी ने अपने दौर में आन और उड़न खटोला जैसी हिट फिल्मों में काम किया था। नंबर छह तब्बू। आज के दौर की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में एक नाम तब्बू का भी लिया जाता है। लेकिन तब्बू का असली नाम अगर बताएं तो उनका असली नाम था तबस्सुम फातिमा हाशमी। तब्बू ने अपने करियर में तमाम हिट फिल्मों में काम किया है। अजय देवगन के साथ उनकी जोड़ी को काफी पसंद भी किया जाता है। नाम बदलने की कहानी। तब्बू का नाम तबस्सुम का इस्तेमाल हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में किया जाता है। लेकिन फिल्मी दुनिया में उन्होंने अपना नाम केवल तब्बू कर लिया ताकि किसी को नाम लेने में कोई दिक्कत महसूस ना हो। फिल्म प्रेम से अपने करियर की शुरुआत करने वाली इस अभिनेत्री को शुरू से ही जो दर्शक हैं या जो उनके चाहने वाले हैं वो तब्बू के नाम से जानते हैं। नंबर सात मान्यता दत्त। संगत की पत्नी मान्यता दत्त ने भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई थी। उनका असली नाम दिलनवाज शेख था। यहां तक कहा जाता है कि उन्होंने कुछ बी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया था। लेकिन संजय दत्त के प्रभाव की वजह से यह फिल्में कभी रिलीज़ नहीं हो सकी। नाम बदलने की कहानी। फिल्म गंगाजल में एक आइटम नंबर करने के दौरान उन्होंने अपना नाम मान्यता रख लिया था।
हालांकि उनका फिल्मी करियर छोटा रहा। लेकिन आज वह एक सफल बिजनेस वूमेन और फिल्म प्रोड्यूसर के तौर पर जानी जाती हैं। नंबर आठ सोनिया साहनी। बॉबी और जॉनी मेरा नाम जैसी फिल्मों में नजर आने वाली सोनिया साहनी का असली नाम अनवर अहमद था। सोनिया साहनी की बात करें तो वह एक कश्मीरी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थी। नाम बदलने की कहानी। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने उस दौर के चलन को देखते हुए अपना नाम बदलकर सोनिया रख लिया था। सोनिया नाम रखने के बाद उन्होंने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों में सहायक या फिर ग्लैमरस भूमिकाएं निभाई थी। नंबर नौ मंदाकिनी राम तेरी गंगा मैली से मशहूर हुई मंदाकिनी का असली नाम यासमीन जोजफ था। उनके पिता ब्रिटिश भारतीय थे और मां एक मुस्लिम थी। मंदाखनी को लेकर इस तरह की खबरें भी उस वक्त खूब चर्चाओं में आई थी कि उनका संबंध अंडरवर की दुनिया के साथ है। हालांकि राम तेरी गंगा मैली के अलावा भी मंदाखनी ने बहुत सी हिट फिल्मों में काम किया है। नाम बदलने की कहानी। अपने दौर के शानदार फिल्म मेकर राज कपूर ने फिल्म की शुद्धता और किरदार की मांग को देखते हुए यासमीन का नाम बदलकर मंदाकिनी कर दिया था। वैसे यह देश की एक पवित्र नदी का भी नाम है। फिल्म रिलीज होने के बाद मंदाकिनी घर-घर में मशहूर हो गई थी। यहां तक भी कहा जाता है कि मंदाकिनी अपने दौर की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक थी। नंबर 10 श्यामा। 50 के दशक की खूबसूरत अभिनेत्री श्यामा का असली नाम खुर्शीद अख्तर था। यहां आपको बताए चलें कि श्यामा यानी खुर्शीद अख्तर ने आरपार और बरसात की रात जैसी शानदार फिल्मों में कामया काम करके कामयाबी हासिल की थी। नाम बदलने की कहानी। ऐसा सुनने को मिलता है कि खुर्शीद अख्तर को श्यामा नाम उस वक्त के फिल्म निर्देशक विजय भट्ट ने दिया था।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 1957 में श्यामा को फिल्म शारदा के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिल चुका था। नाम बदलने के पीछे के कारण फिल्मी दुनिया में पुराने दौर के निर्देशकों का मानना था कि मधुबाला और मीना कुमारी जैसे नाम भारतीय दर्शकों के दिलों में जल्दी उतरते हैं। साथ ही यह भी बात सामने आती है कि कई मुस्लिम नाम काफी लंबे और कठिन होते हैं जिन्हें छोटा और कैची बनाने के लिए उन्हें बदल दिया जाता था। इसके अलावा कलाकार चाहते थे कि उन्हें केवल उनकी कला के आधार पर पहचाना जाए ना कि किसी विशेष समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर। वैसे इन अभिनेत्रियों ने यह साबित कर दिया कि नाम में क्या रखा है। असली पहचान तो काम से होती है।
मुमताज जहां मधुबाला बनकर अमर हुई तो महजबी यानी मीना कुमारी बनकर वह अमर हो गई। बॉलीवुड की यह खूबसूरत परंपरा दिखाती है कि इंडस्ट्री हमेशा से दिलों को जोड़ने का काम करती आई है। इन अभिनेत्रियों का योगदान भारतीय सिनेमा में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। फिलहाल आपको यह प्रोग्राम कैसा लगा? इसके बारे में जरूर कमेंट करके बताइए और साथ में किसी कलाकार की जिंदगी से रूबरू होने के लिए अगर आप कमेंट करके बताएंगे तो हम उनकी जिंदगी पे आधारित एक प्रोग्राम भी आपके सामने लेकर आएंगे। फिलहाल आप हमारे साथ जुड़े रहें और हमारे प्रोग्राम के जरिए तमाम अभिनेत्री और अभिनेताओं की जिंदगी के बारे में आप जानते रहिए। इस प्रोग्राम में इतना ही।