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नेतन्याहू से 100 गुना ज्यादा ख;तरना!क निकला नया PM, की ऐसी हरकत चौंके मुस्लिम

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इजराइल को आखिरकार नया प्रधानमंत्री मिल गया है। बेंजमिन नेतन याहू की हार हुई है और इजराइल में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनक कोर्ट के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। मुस्लिम पार्टियों ने आइजनक कोर्ट को अपना समर्थन दे दिया है। आप सोशल मीडिया पर ध्यान से देखेंगे तो आपको फिलिस्तीनियों से ज्यादा भारत के कुछ मुस्लिम खुशियां मनाते दिखेंगे। इन सभी को खुशी है कि नेतन याहू हार गए और आइजन कोर्ट जीत गए। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ आइजन कोर्ट ने एक ऐसा खतरनाक एक्सपेरिमेंट किया था

जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। जितने कट्टरपंथियों और आतंकियों को नितिन याहू ने नहीं निपटाया उससे ज्यादा को आइजन कोर्ट ठिकाने लगा चुके हैं। लेकिन नैतन याू सिर्फ मोदी के पक्के दोस्त थे इसलिए भारत और दुनिया भर के कई मुस्लिम आइजन कोर्ट की तारीफें करते नहीं थक रहे।

इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि आइजन कोर्ट ने ऐसा क्या एक्सपेरिमेंट किया था जिसने कुछ साल पहले पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। आइज़न कोर्ट का यह खेल देखने के बाद आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा कि क्या भारत को भी अब आइजन कोर्ट का मॉडल अपनाना चाहिए क्योंकि भारत के ही कई लोग आइजन कोर्ट की जीत का जश्न मना रहे हैं। दरअसल कुछ साल पहले इजराइल की सेना में एक दहिया सिद्धांत की शुरुआत की गई थी। दहिया सुनकर आपको लग रहा होगा कि यह कोई भारतीय सरनेम है। लेकिन आपको बता दें कि दहिया सिद्धांत इजराइल की एक विवादित सैन्य रणनीति है जो दुश्मन पर अत्यधिक और अनुपातहीन बल के प्रयोग पर आधारित है। आसान भाषा में कहें तो अगर किसी घर में एक आतंकी छिपा है तो दहिया डॉक्ट्रिन कहती है कि पूरे मोहल्ले को उड़ा दो फिर चाहे कितने भी निर्दोष लोग मर जाएं। इस खतरनाक सैन्य रणनीति की शुरुआत गादी आइसन कोर्ट ने ही की थी। जब वह इजराइल के सेना प्रमुख थे। यानी गादी आइसनक कोर्ट ने ही दहिया डॉक्ट्रिन की शुरुआत की थी। दहिया डॉक्ट्रिन का नाम लेबनान की राजधानी बेरूद के एक शहर दहिया पर रखा गया है। 2006 के इजराइल हिजबुल्ला युद्ध के दौरान इजराइली सेना ने हिजबुल्ला के गढ़ माने जाने वाले इस दहिया इलाके पर भारी बमबारी की थी और सबको उड़ा दिया था। आपको बता दें कि पारंपरिक युद्ध का नियम है कि हमला सिर्फ सैनिकों या सैन्य ठिकानों पर होना चाहिए। लेकिन दहिया सिद्धांत जानबूझकर आम नागरिकों के घरों, अस्पतालों, स्कूलों, बिजली, पानी के संयंत्रों को निशाना बनाता है। जिससे लाखों बेकसूर लोग मारे जाते हैं या विस्थापित हो जाते हैं।

अगर दुश्मन एक छोटा हमला भी करता है, तो दहिया डॉक्ट्रिन कहती है कि जवाब कई गुना ज्यादा विनाशकारी होना चाहिए। हमले जमीन और आसमान दोनों तरफ से होने चाहिए। दहिया डॉक्ट्रिन का मुख्य उद्देश्य दुश्मन को केवल हराना नहीं है बल्कि उसे पूरी तरह से अपंग और तबाह कर देना है।

वैसे आपको बता दें कि गादी आइजन कोर्ट बोल चुके हैं कि प्रधानमंत्री बनने के 18 महीनों के अंदर पूरे हमास को निपटा दूंगा। अब आप बताइए कि आतंकियों से निपटने के लिए क्या भारत को भी दहिया डॉक्ट्रिन इस्तेमाल करनी चाहिए? यह सवाल उन लोगों से पूछा जाना चाहिए जो नैतन याू के हारने का जश्न मना रहे हैं और आइजन कोर्ट के जीत की खुशियां।

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