कश्मीर से एक ऐसी खबर आई है जिसका इंतजार 78 सालों से था। 78 सालों में पहली बार कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या की जड़ में मट्ठा डालने का काम शुरू हो गया है। कश्मीर के नाम पर एजेंडा चलाने वाले पाकिस्तान, तुर्की, चीन और अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों को यह खबर बिल्कुल पसंद नहीं आएगी।
क्योंकि कश्मीर में सुरक्षा बलों और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने होश उड़ा देने वाला कदम आखिरकार उठा लिया है। दरअसल कश्मीर के मस्जिद और मदरसे अब सुरक्षा बलों के रडार पर आ चुके हैं। इनका सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। सभी मस्जिद और मदरसों को एक फॉर्म भरने के लिए दिया गया है। इस फॉर्म में जो जो जानकारियां मांगी गई है, वह आपके होश उड़ा देंगी। इनसे पूछा गया है कि मस्जिद और मदरसों को बनाने के लिए पैसा कहां से आया? यह कितने में बनी? मस्जिद से जुड़े मुतव्ली कौन है? अजान देने वाला मौजिल कौन है? मस्जिद और मदरसों की मैनेजमेंट कमेटी में कौन-कौन शामिल है? इन सभी की पर्सनल डिटेल्स भी मांगी गई हैं। जैसे इन सभी को अपना मोबाइल नंबर देना होगा।
यहां तक कि मोबाइल का आईएमईआई नंबर भी देना होगा। यह भी बताना होगा कि मस्जिद और मदरसा कौन से सेक्ट से जुड़ा है। यानी वह देवबंदी विचारधारा को मानता है, बरेलवी विचारधारा को मानता है या फिर हफी को। मस्जिद और मदरसा मैनेजमेंट से जुड़े सभी लोगों को अपनी बैंक डिटेल्स भी देनी होंगी। इन सभी से इनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी पूछी गई है। यानी सच को खोद खोदकर निकाला जा रहा है। सुरक्षा बलों के इस कदम के बाद यह साफ हो जाएगा कि कैसे डीप स्टेट पाकिस्तान, तुर्की और जो-जो खाड़ी देश कश्मीर को अस्थिर करना चाहते हैं। वो किस तरह से काम करते हैं। कौन-कौन से मस्जिद और मदरसे विदेशों से फंड जुटाते हैं।
किस-किस के संबंध पाकिस्तान और तुर्की जैसे कट्टर देशों से हैं? कौन आतंकियों को पनाह देते हैं? लेकिन आपके मन में सवाल होगा कि आखिरकार यह सर्वे क्यों शुरू हुआ है? तो आपको शायद याद होगा कि दिल्ली में जो बम धमाका हुआ था, उसकी जांच में यह पता चला कि अलफलाहा यूनिवर्सिटी के जिस डॉक्टर ने खुद को उड़ा लिया था, उसका कनेक्शन कश्मीर के नौगाम की एक मस्जिद से मिला था। उसी मस्जिद का मौलवी कई पढ़े लिखे लोगों को आतंकी बनाने के काम में लगा था। उसके टारगेट पर डॉक्टर और इंजीनियर थे। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह रैकेट पूरे देश में फैला हुआ था।
गुजरात से भी एक जहर बनाने वाला डॉक्टर पकड़ा गया। इसी के बाद तगड़ा एक्शन शुरू हो गया। इस तरह का एक्शन सालों पहले शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन चलिए देर आए दुरुस्त आए। आपको बता दें कि कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या के पीछे कई मस्जिद और मदरसों का ही हाथ है। 1990 में कश्मीर की मस्जिदों से कश्मीरी पंडितों को तीन ऑप्शन दिए गए थे। मुस्लिम बन जाओ, भाग जाओ या मारे जाओ। भागने वाले कश्मीरी पंडितों से कहा गया कि अपनी संपत्ति और बहू बेटियों और पत्नी को यहां छोड़ जाओ। बहरहाल कश्मीर की स्थिति तब से नहीं बदली है। हाल ही में श्रीनगर की हजरत बल दरगाह में अशोक स्तंभ वाली शिला पट्टी को कुछ लोगों ने तोड़ दिया।
कहा गया कि यह हिंदुओं की मूर्ति जैसी दिखती है। आप नफरत का आलम देखिए। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि कश्मीर में मस्जिद और मदरसे अलगाववादियों और आतंकवादियों के लिए सेफ हाउस की तरह काम करते हैं। सोशल मीडिया पर अब कई लोगों का कहना है कि ऐसे सर्वे पूरे देश में होने चाहिए क्योंकि यह मामला हिंदू मुसलमान नहीं बल्कि देश की सुरक्षा का है। लेकिन मजे की बात देखिए कि महबूबा मुफ्ती को इसमें भी राजनीति दिख रही है। वो मंदिर और गुरुद्वारों का सर्वे चाहती हैं। बहरहाल आपको समझना होगा कि कश्मीर में अभी भी एक बड़ा वर्ग है जो खुद को भारतीय नहीं मानता है। आज भी सरकारी नौकरियों से ऐसे लोगों को निकाला जा रहा है जिनके संबंध आतंकियों से हैं।