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गरबे की उस रात बस इस एक गलती ने खत्म किया फाल्गुनी का करियर,सच आया सामने

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चूड़ी जो खन की हाथों में चूड़ी जो खन की मेरी चुनर उड़ उड़ जाए। हाय दिल 90ज के दशक की एक मशहूर परफॉर्मेंस आर्टिस्ट और म्यूजिक कंपोजर जिन्हें क्वीन ऑफ डांडिया और भारतीय मडोना का टाइटल दिया गया और नवरात्रों से लेकर शादियों पार्टियों तक हर जगह इनके ही गाने सुनाई देने लगे। मैंने पायल है छनकाई अब तो आजा तू हरजाई। छोटे बालों और टॉम बॉय की इमेज वाली इस लड़की की आवाज इतनी कर्णप्रिय थी मानो सावन की फुहार में मोर नाच रहे हो। हाथ से दिल खो गया मुझे। अपनी आवाज से किसी भी सुनने वाले का दिल जीत लेने वाली एक पॉपुलर सिंगर जिनके पॉप सिंगर्स और फोक गीतों ने जमकर धमाल मचाया। में मोरनी बनके मैं तो छमम छमम नाचूं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह साल 2000 के दौर में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली गरबा डांडिया आर्टिस्ट बन गई थी और एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने इन्हें परफॉर्म करने के लिए हर दिन के 70 लाख ऑफर किए थे। आई मैं तो आई नज़ारों की जान। क्या आपको पता है कि आज भी यह अपने एक शो के लिए 25 से ₹ लाख लेती हैं और अपनी शर्तों पर काम करती हैं। ओढ़नी ओढ़ी उड़ी जाए। ओढ़नी ओढ़ी उड़ी जाए। और क्या आप यकीन करेंगे कि इनके ऊपर एक कार्यक्रम में अश्लील गाना गाने और गलत तरीके से इशारे करने का इल्जाम लगा और स्थानीय लोगों ने पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज करवा दी। ओ पिया ओ पिया लेके लिया। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि अपने समय के दिग्गज गीतकारों पर भारी पड़ने वाली इस टैलेंटेड सिंगर ने फिल्मों के लिए गाना छोड़ दिया और कई बार ऑफर मिलने पर भी यह अब फिल्मों में गाने से साफ इंकार कर देती हैं। बाबा मेरी ये जवानी मेरा पीछा ना छोड़े। बाबा मेरी ये जवानी मेरी बताएंगे इनके बारे में और भी बहुत कुछ। आप देखते रहिए बॉलीवुड के रोचक किस्से वेदिका के साथ। मुझे ऐसा लगा वो मिल गया। आहा आहा मुझे ऐसा लगा।

दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं 90ज के दशक में अपने एल्बम सॉन्ग से धमाल मचाने वाली पॉपुलर सिंगर फाल्गुनी पाठक की। फाल्गुनी पाठक ने अपने गानों से भारतीय संस्कृति को आगे ले जाने में काफी मदद की और भारतीय लोकगीतों और त्योहारों को पूरी दुनिया में प्रचारित करने का काम किया। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं फाल्गुनी पाठक के बचपन, इनके फैमिली बैकग्राउंड और इनके सिंगिंग फील्ड में आने के बारे में। फाल्गुनी पाठक का जन्म 12th मार्च 1969 को वडोदरा में एक गुजराती परिवार में हुआ था।

चार बेटियों के बाद माता-पिता जब एक बेटे की उम्मीद में थे, तो पांचवी संतान के रूप में फाल्गुनी का जन्म हुआ और घर में सब निराश हो गए। चौथी बेटी के जन्म के 8 साल के इंतजार के बाद फाल्गुनी का जन्म हुआ था और वह भी नाउदी के साथ। दोस्तों, यह वह दौर था जब भारत में एक बेटे के इंतजार में लोग 8-10 बेटियां भी पैदा कर देते थे, और ज्यादातर घरों में लड़कियों के पैदा होने पर मातम पसर जाता था। और यही फाल्गुनी के साथ भी हुआ। फिर अपनी निराशा को थोड़ा कम करने के लिए इनकी मां और बड़ी बहनों ने इन्हें लड़कों की तरह कपड़े पहनाना शुरू कर दिए और बाल छोटे करवा देते। इसलिए बचपन से ही फाल्गुनी लड़कों जैसी ही दिखती थी। पैंट- शर्ट पहनी हुई छोटे बालों में। खैर, बचपन से ही फाल्गुनी रेडियो पर खूब गाने गाने लगी और उनके रियाज़ करने लगी। धीरे-धीरे यह उनका शौक बन गया और फाल्गुनी कहने लगी कि मैं तो सिंगर बनूंगी। लेकिन इनके पिता को यह सब पसंद नहीं था। वो 90ज के टिपिकल इंडियन मिडिल क्लास पिता थे। तभी एक बार 9 साल की उम्र में बिना अपने पिता को बताए फाल्गुनी ने इंडिपेंडेंस डे के मौके पर हो रहे आईएएस उदयगिरी जहाज में एक कल्चरल शो में पार्टिसिपेट कर लिया और सेलेक्ट होने पर बेहद सराहनीय परफॉर्मेंस भी दिया। फाल्गुनी ने वहां फिल्म कुर्बानी का सुपरहिट गाना लैला ओ लैला गाया और खूब तालियां बटोरी। फिर तो फाल्गुनी के हौसले और बुलंद हो गए।

लेकिन इसके बारे में एक पड़ोसी से इनके पिता को पता चल गया और उन्होंने आव देखा ना ताव बेटी के घर आते ही इनकी जमकर पिटाई कर दी। पर फाल्गुनी समझाने से शायद मान भी जाती लेकिन इस पिटाई के बाद इन्होंने ठान लिया कि अब तो चाहे जो हो जाए यह सिंगर बनके रहेंगी और पूरी दुनिया में अपनी गायकी की पहचान बनाएंगी। किसी के टैलेंट और जुनून को दबाना इतना आसान नहीं होता और फाल्गुनी के साथ भी वही हुआ। पिता की मां ने इन्हें रिवोल्टी बना दिया और यह स्कूल की छुट्टी के बाद इसके लिए इधर-उधर और कोशिशें करने लगी। इसमें इन्हें कामयाबी भी मिली और इस इंसिडेंट के ठीक 1 साल बाद फाल्गुनी को एक गुजराती फिल्म में गाना गाने का मौका मिल गया। बड़ी बात यह कि वो गाना इन्होंने मशहूर प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक के साथ गाया।

इसके बाद फाल्गुनी का आर्केस्ट्रा में गायकी का सिलसिला चल निकला और इनकी खूब डिमांड होने लगी। फिर उन्होंने डांडिया नाइट्स में भी गाना शुरू कर दिया। घर में इसका खूब विरोध होता रहा। पर फाल्गुनी अपने रास्ते पर चलती रही। यहां आपको बता दें कि फाल्गुनी पाठक की मां ने इन्हें बचपन से ही गुजराती पारंपरिक गाने सिखाए थे क्योंकि वह भी अच्छा गाती थी। लेकिन उनकी प्रतिभा को कभी मंच नहीं मिल पाया था। इसलिए अब उन्होंने बेटी को सपोर्ट करने का फैसला किया। इसके साथ ही फाल्गुनी ने भवदीप जयपुर वाले से 5 साल वोकल म्यूजिक की ट्रेनिंग भी ली और गायकी में खुद को तराशती रहीं। फाल्गुनी नवरात्रि के मौके पर भी भजन और दूसरे फोक गीत गाने जाती रहीं। फाल्गुनी ने 1990 में बॉलीवुड में भी अपने करियर की शुरुआत की और फिल्म आंधियां के लिए दो गाने रिकॉर्ड किए। हालांकि इस फिल्म के गाने कुछ खास नहीं चले और इसके बाद फाल्गुनी को फिल्मों में कोई बड़ा ब्रेक नहीं मिल पाया। फाल्गुनी को अब लगने लगा कि अपना म्यूजिक ग्रुप बनाना चाहिए ताकि अपनी अलग पहचान बनाई जा सके। फिर साल 1994 में इन्होंने 25 साल की उम्र में 18 मेंबर्स के साथ मिलकर एक म्यूजिक बैंड ताथैया बनाया और ऑफिशियली इस बैंड के जरिए अपने ग्रुप के साथ स्टेज परफॉर्मेंस देने लगी। फाल्गुनी बाद में मुंबई शिफ्ट हो गई और अपने परफॉर्मेंस के साथ ही इन्होंने मुंबई के श्रीमती एमएम के कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से बीकॉम की पढ़ाई भी पूरी कर ली।

फाल्गुनी अपने बैंड में एक सिंगर, परफॉर्मर और कंपोजर के तौर पर काम करती रही और इनका संगीत खासकर गुजरात के ट्रेडिशनल म्यूजिक फॉर्म पर बेस्ड था। वैसे तो फाल्गुनी अपने लाइव कॉन्सर्ट्स से अच्छा खासा फेम और मनी कमा रही थी। लेकिन फिर अपना एल्बम निकालने की सोची और यूनिवर्सल इंडिया के साथ साल 1998 में इनका पहला एल्बम रिलीज़ हुआ। याद पिया की आने लगी। यह एल्बम मार्केट में आते ही छा गया और पहले ही एल्बम के हिट होने से फाल्गुनी सबके बीच चर्चा का विषय बन गई। तब दूरदर्शन के रंगोली से लेकर चित्रहार जैसे कार्यक्रमों से इस गाने ने गजब लोकप्रियता हासिल कर ली। दरअसल पॉलीग्राम प्रोडक्शन कंपनी ने पहले इन्हें डांडिया गाने के एल्बम के लिए ही ऑफर दिया था। लेकिन फाल्गुनी देश के यूथ को टारगेट करके गाना बनाना चाहती थी। इसलिए इस तरह के पॉप सॉन्ग को चुना। इस बारे में खुद फाल्गुनी पाठक ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 1998 में पहले एल्बम के रिलीज़ के बाद धीरे-धीरे इनके गाने हर जगह छाने लगे। तो वहीं 99 में इनके दूसरे एल्बम के गाने मैंने पायल है छनकाई ने वही शोहरत दोहराई और फाल्गुनी की पॉपुलैरिटी आसमान छूने लगी।

फाल्गुनी के ज्यादातर म्यूजिक वीडियो लव स्टोरी पर बेस्ड होते थे। जिनमें गाने के जरिए ही कहानी बयां की जाती थी। 2000 में आए इनके तीसरे एल्बम के गाने भी ऐसे ही थे और यह एल्बम ना सिर्फ अपने मेलोडियस सॉन्ग्स बल्कि उनके साथ दिखाई जाने वाली इन लव स्टोरीज के लिए भी बहुत फेमस हुए।

20001 में रिलीज्ड सांवरिया तेरी याद में एल्बम का गाना भी खूब चला। यह वो दौर था जब फाल्गुनी पाठक के पॉप सिंगर्स खूब पॉपुलर हो रहे थे और इनकी मधुर आवाज के लोग दीवाने बन चुके थे। इनकी सफलता को देखते हुए इन्हें कई बॉलीवुड फिल्मों से भी ऑफर आने लगे और फाल्गुनी ने कई गाने गाए।

प्यार कोई खेल नहीं ना तुम जानो ना हम दीवानापन घात लीला और कोयला जैसी फिल्मों के अलावा फाल्गुनी ने कई गुजराती मूवीज में भी गाने गाए। गुजराती होने और शुरू से ही अपने बैंड में गुजराती फोक गाने की वजह से फाल्गुनी गुजराती कम्युनिटी में बहुत फेमस हो गई और नवरात्रि जैसे प्रचलित त्यौहारों में इन्हें परफॉर्म करने के लिए इनवाइट किया जाने लगा। धीरे-धीरे इनकी डिमांड इतनी बढ़ गई कि यह सबसे ज्यादा फीस लेने वाली गरबा डांडिया आर्टिस्ट बन गई। जानकारी के मुताबिक साल 2013 में यह रिपोर्ट आई थी कि फाल्गुनी ने उस साल नवरात्रि फेस्टिवल में ₹2 करोड़ कमाए थे। यहां तक कि इन्हें एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के लिए गाने और परफॉर्म करने के लिए हर दिन के 70 लाख ऑफर किए गए थे। तो वहीं आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गुजराती फोक परफॉर्मर होने के बावजूद फाल्गुनी पाठक ने कभी भी अपने शो में घाघरा चोली या सलवार कुर्ता जैसे ट्रेडिशनल कपड़े नहीं पहने और अपने अंदाज में ही हर शो में नजर आती रही। उन्हें ना ही कभी मेकअप में देखा गया और ना ही ज्वेलरी या हाईफाई अटायर में। अपनी पहचान बना लेने के बाद फाल्गुनी ने अपने बैंड ताथैया के तहत कई देशों में परफॉर्म किया और विदेशों में इनके कुछ शोज़ तो जबरदस्त हिट रहे।

90ज और 200 के दशक में कई दूसरे आर्टिस्ट ने भी एल्बम निकाले थे और कई सिंगर्स के एल्बम फाल्गुनी की तरह ही सुपरहिट रहे थे। लेकिन म्यूजिक एल्बम्स का यह जादू लगभग एक डेढ़ दशक तक ही चला और धीरे-धीरे एल्बम्स का यह दौर जाने लगा। फिर फाल्गुनी के भी नए गाने आने कम हो गए और कुछ एल्बम फ्लॉप भी हो गए और फिर धीरे-धीरे इनकी आवाज मध्यम पड़ती गई। लेकिन हां, इन्होंने एल्बम निकालना और लाइव परफॉर्मेंस करना कभी नहीं छोड़ा और खासकर नवरात्रि में डिमांड में बनी रही। इनका आखिरी एल्बम साल 2022 में आया था वसाल दे दी। आप फाल्गुनी के बारे में शायद ही यह बात जानते होंगे कि इन्होंने कई टीवी शोज़ में भी गेस्ट के तौर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जब यह नजर आई तो उस शो को काफी पॉपुलैरिटी मिली और इनके फैंस ने खूब पसंद किया। साथ ही फाल्गुनी अमिताभ बच्चन के फेमस शो कौन बनेगा करोड़पति में भी एक एपिसोड का हिस्सा रहीं। इसके बाद फाल्गुनी कॉमेडी नाइट्स विद कपिल बाबू और बेबी जैसे मशहूर टीवी शोज़ में भी दिखाई दी।

फाल्गुनी ने सिंगिंग के साथ ही साल 2002 में कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग में भी हाथ आजमाया और फिल्म दिलविल प्यारव्यार और दिल है तुम्हारा में कंट्रीब्यूट किया। फाल्गुनी पाठक ने एक बार बताया कि इन्हें अब भी बॉलीवुड से काफी ऑफर मिलते हैं। लेकिन यह स्टेज शो करके ही खुश हैं।

इनका कहना था कि अगर आप बॉलीवुड में काम करते हैं तो डबल मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए मैंने बॉलीवुड को कभी सीरियसली नहीं लिया। फाल्गुनी पाठक साल 2022 में एक बार फिर तब सुर्खियों में आ गई जब इनके 90ज के दशक के आइकॉनिक सॉन्ग मैंने पायल है छनकाई का रीमेक रिलीज़ हुआ जिसे नेहा कक्कड़ ने गाया था। गाना रिलीज़ होने के बाद नेहा की सोशल मीडिया पर खूब गिरकिरी होने लगी और लोग फाल्गुनी की तारीफ करते हुए लिखने लगे ओल्ड इज गोल्ड। फाल्गुनी के गानों और उनकी आवाज को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।

इन सबके बीच फाल्गुनी ने भी इस पर अपना रिएक्शन दिया और नाराजगी जाहिर करते हुए नेहा कक्कड़ को नसीहत दे डाली कि गाने के रिमेक में कहां किस तरह की चूक हुई है। मैंने पायल है छलकाई अब तो आजा तू हर जाए मैंने पायल। हालांकि इसके जवाब में नेहा कक्कड़ ने भी एक तीखा सा पोस्ट लिखा और फाल्गुनी के फैंस को नीचा दिखाया। लेकिन फिर कुछ ही दिनों बाद फाल्गुनी को इंडियन आइडल 13 में बुलाया गया और दोनों ने साथ में मंच साझा किया। जिसके बाद यह कोल्ड वॉर खत्म हुआ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कूल दिखने वाली फाल्गुनी को गुजरात में आयोजित एक डांडिया कार्यक्रम में विवादों का सामना भी करना पड़ा था। जब साल 2010 में गुजरात के अंकलेश्वर में आयोजित एक नवरात्रि उत्सव के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने इनके और अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। उस संगठन का कहना था कि अपने प्रदर्शन के दौरान इन दोनों आर्टिस्ट ने डबल मीनिंग शब्दों का इस्तेमाल किया और मंच पर अश्लील इशारे किए। इसमें संगठन ने भरूच के जिला कलेक्टर को 50 से ज्यादा लोगों के सिग्नेचर वाला एक ज्ञापन भी सौंपा और उस कार्यक्रम के रिकॉर्ड सीडी को भी जमा किया। हालांकि बाद में यह मामला शांत हो गया था। फाल्गुनी पाठक की पर्सनल लाइफ के बारे में बात करें तो इन्होंने शादी नहीं की और पूरी तल्लीनता से बस एक अपने काम पर ही फोकस किया। इन्होंने अपने घर वालों और खासकर अपने पिता को यह दिखा दिया कि बेटियां कहीं से भी बेटों से कम नहीं होती हैं। बस जरूरत होती है उन्हें पंख देने की, उन्हें आजाद छोड़ने की ताकि वह अपनी उड़ान को मुकम्मल कर सकें।

उम्मीद है कि फिर इनके माता-पिता को इन पर गर्व जरूर हुआ होगा और बेटा पैदा ना होने का कोई मलाल नहीं रहा होगा। फाल्गुनी अब 56 साल की हो चुकी हैं और आज भी अकेले ही अपनी जिंदगी को एंजॉय कर रही हैं। यह मुंबई के सटक में शिल्पा बिल्डिंग में रहती हैं और लेविश लाइफ जीती हैं। इनके पास Mercedes Benz जैसी महंगी कार है और इन्हें अपनी फैमिली के साथ अक्सर लॉन्ग ड्राइव पर जाती देखा गया है। फाल्गुनी प्योर वेजिटेरियन हैं और कैमोमाइल टी पीना पसंद करती हैं। फाल्गुनी ने अपनी फोक गुजराती गीतों के जरिए देश की परंपरा और संस्कृति को भी पूरी दुनिया में प्रमोट करने का काम किया है। यह ट्रैवल लवर भी हैं जिस वजह से पूरी दुनिया की सैर करती रहती हैं।

फाल्गुनी सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं और खासकर नवरात्रि के मौके पर इनके परफॉर्मेंस का सबको इंतजार रहता है। आज भी नवरात्रि पर होने वाले गरबा और डांडिया फाल्गुनी पाठक के गानों के बिना अधूरे माने जाते हैं। यह अभी भी अपने एक शो के लिए 25 से ₹ लाख फीस लेती हैं।

फाल्गुनी ने भले ही फिल्मों के लिए कम ही गाने गाए लेकिन अपने एल्बम्स, फोक गीतों और लाइव परफॉर्मेंस के जरिए गायकी की दुनिया में एक मजबूत पहचान बनाई। ढेर सारे अवार्ड जीते और लाखों लोगों का प्यार भी। हम इनके आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए इन्हें दिल से शुभकामनाएं देते हैं।

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