:क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के महान अभिनेता और लेखक कादर खान अक्सर कब्रिस्तान में बैठकर अपने संवादों का अभ्यास करते थे? इतना ही नहीं, उनके जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बाद में अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के एक दृश्य में भी दिखाया गया था। आखिर वह क्या कहानी थी, और कब्रिस्तान में अभ्यास करने से कादर खान की किस्मत कैसे बदली? आइए जानते हैं।
बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। कादर खान उनमें से एक थे। 22 अक्टूबर को उनकी जयंती पर उन्हें याद करना बेहद खास है, क्योंकि उन्होंने अपने अभिनय और लेखन के जरिए हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में और संवाद दिए।कादर खान का फिल्मी सफर आसान नहीं था। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आकर बस गया था। उन्होंने बचपन से ही मुश्किलों का सामना किया, लेकिन अपनी मेहनत से जीवन में एक खास मुकाम हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि कादर खान न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे,
बल्कि पढ़ाई में भी बहुत अच्छे थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में एम.एच. साबू सिद्दीक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के रूप में काम भी किया। हालांकि, अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें धीरे-धीरे फिल्मों की दुनिया में खींच लिया।अपने लंबे करियर में कादर खान ने 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। कभी उन्होंने कॉमेडी से दर्शकों को हंसाया, तो कभी विलेन बनकर लोगों के दिलों में खौफ पैदा किया। गंभीर भूमिकाओं में भी उन्होंने अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। अभिनय के अलावा उन्होंने कई फिल्मों के लिए डायलॉग और कहानियां लिखकर अपनी प्रतिभा साबित की।कहानियों के मुताबिक, कादर खान रात को अपने घर के पास स्थित एक कब्रिस्तान में अभ्यास करने जाते थे। दिन भर में जो कुछ भी वे पढ़ते या सीखते थे, रात को उस सुनसान जगह पर उसका रियाज करते थे।
एक रात जब वे कब्रिस्तान में अभ्यास कर रहे थे, तभी अचानक उनके चेहरे पर टॉर्च की रोशनी पड़ी। टॉर्च थामे शख्स ने उनसे पूछा कि वे रात में वहां क्या कर रहे हैं? कादर खान ने बिना डरे जवाब दिया कि वे अपने अभिनय का अभ्यास कर रहे हैं। कहा जाता है कि वह व्यक्ति अशरफ खान थे। कादर खान के जवाब से प्रभावित होकर उन्होंने उनसे पूछा कि वे नाटकों में काम क्यों नहीं करते? इस मुलाकात के बाद कादर खान को थिएटर में काम करने का मौका मिला और यहीं से उनके अभिनय के सफर को एक नई दिशा मिली।कहा जाता है कि 1977 की फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का एक दृश्य कादर खान के वास्तविक जीवन से प्रेरित माना जाता है। फिल्म के इस दृश्य में एक बच्चा कब्रिस्तान जाता है, रोता है
और वहां उसकी मुलाकात एक फकीर से होती है। इस सीन को अक्सर कादर खान की अपनी जिंदगी से जोड़कर देखा जाता है।ज़रा सोचिए, जिस जगह कादर खान ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए रियाज किया, वही जगह बाद में बड़े पर्दे पर दिखाई गई कहानी बन गई। उनकी यह कहानी साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां और सीमित संसाधन किसी इंसान के सपनों को नहीं रोक सकते, बशर्ते उसमें आगे बढ़ने का जुनून हो।कादर खान अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका अभिनय, उनके लिखे संवाद और उनकी यादगार फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।आपको कादर खान का कौन सा किरदार या डायलॉग सबसे ज्यादा पसंद है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।