मुस्कान और साहिल, सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई है। हालांकि, फांसी कब होगी, ये अभी तय नहीं है। लेकिन पवन जल्लाद अपनी ड्यूटी के लिए तैयार है। निचली अदालत की सजा के बाद आगे की प्रक्रिया क्या होगी और दोषियों के पास क्या विकल्प हैं? चलिए आपको एक रिपोर्ट दिखाते हैं।ब्लू ड्रम केस में मौत की सजा का ऐलान हुआ है। मुस्कान और साहिल फिलहाल मेरठ जेल में बंद हैं। सजा सुनाए जाने के बाद से ही इस बात को लेकर तेज अटकलें हैं कि दोनों दोषियों को फांसी कब दी जाएगी। कितना समय लगेगा, और फांसी कहां होगी? इन सभी सवालों के बीच मेरठ के पवन जल्लाद अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।देखिए, वो निश्चित रूप से इस सजा के हकदार थे, और हमारी जनता संतुष्ट है; हमारी अदालत और जज साहब ने जो फैसला लिया है वो सही है।
आगे की प्रक्रिया चाहे जो भी हो, चाहे वो ऊपरी अदालतों में जाए या सुप्रीम कोर्ट में, जब डेथ वारंट जारी होगा, मैं उसके लिए तैयार रहूंगा।पवन जल्लाद अपना काम करने के लिए हमेशा सतर्क रहते हैं। हालांकि मुस्कान और साहिल के मामले में, पवन आगे की कानूनी प्रक्रियाओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। लेकिन अपने स्तर पर वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं।मेरठ के पवन जल्लाद एक जाने-माने और फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले जल्लाद हैं। पवन जल्लाद का परिवार पिछले चार पीढ़ियों से इस पेशे से जुड़ा हुआ है। उनके दादा, कालूराम जल्लाद ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी दी थी। पवन जल्लाद राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने मार्च 2020 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया केस के चारों दोषियों को एक साथ फांसी दी थी।जो अपराध बढ़ रहे हैं, जो रेप और मर्डर के केस हो रहे हैं।
जिन्हें मौत की सजा मिलनी चाहिए उन्हें फांसी देकर उनके केसों का निपटारा किया जाना चाहिए। मैं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से प्रार्थना करता हूं, और हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं, कि उन्हें न्याय दिया जाए। उनके माता-पिता, उनकी बहनों और भाइयों को न्याय मिलना चाहिए, ताकि हमारी 140 करोड़ की आबादी, जो पीड़ित है, उसे न्याय मिले। हमारी जनता को न्याय मिले।पवन जल्लाद ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा देने के अदालत के फैसले को सच्चा न्याय बताया। हालांकि, फांसी कब होगी ये कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। जब सभी कानूनी विकल्प खत्म हो जाएंगे, तब फांसी की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें जल्लाद की भूमिका अहम होती है।इसके तहत, सबसे पहले अदालत द्वारा डेथ वारंट जारी किया जाता है। जिसमें फांसी की तारीख, समय और जगह की स्पष्ट जानकारी दी जाती है। जब अदालत द्वारा किसी कैदी के लिए डेथ वारंट जारी किया जाता है, तो जेल प्रशासन जल्लाद से संपर्क करता है। नियमों के अनुसार, जल्लाद को फांसी की तारीख से 2 से 3 दिन पहले जेल में बुलाया जाता है। जेल पहुंचने के बाद, जल्लाद फांसी घर में रस्सियों का निरीक्षण करता है और कैदी के वजन के बराबर रेत या मिट्टी की बोरी से ट्रायल करता है ताकि आखिरी समय में कोई गलती न हो।फांसी के लिए क्या तैयारियां करनी पड़ती हैं? फांसी के तख्ते की जांच करनी पड़ती है। फांसी का तख्ता आमतौर पर पहले से ही ठीक होता है। तेल या ग्रीस की जांच करनी पड़ती है, और कैदियों के वजन के हिसाब से गणना करनी पड़ती है। अब, चाहे उन्हें एक साथ फांसी दी जाए या नहीं, या अगर कोई महिला शामिल है, तो ये इस बात पर निर्भर करता है कि अदालत एक साथ या अलग-अलग आदेश देती है।पवन जल्लाद 6 साल पहले ही तिहाड़ जेल में चार दोषियों को फांसी दे चुके हैं।
इसका मतलब है कि वो अपने काम के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं। इसीलिए वो भविष्य में बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं, और सभी की निगाहें सौरभ राजपूत केस के दोषियों पर टिकी हैं।मुस्कान और साहिल ने 3 मार्च 2025 को जघन्य हत्या को अंजाम दिया था। हत्या के बाद दोनों ने शव को एक नीले ड्रम में पैक कर दिया था।
अपराध का खुलासा होने के बाद, मामले की सुनवाई मेरठ जिला जेल में हुई। 22 लोगों ने गवाही दी। पुख्ता सबूत पेश किए गए। करीब 17 महीने तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने 14 अक्टूबर को मौत की सजा सुनाई। अब, प्रक्रिया में अगले कदमों का इंतजार किया जा रहा है।BNSS की धारा 22 और 407 के अनुसार, निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को सीधे तौर पर तब तक अंजाम नहीं दिया जा सकता जब तक कानूनी प्रक्रिया के सभी चरण पूरे न हो जाएं।
जिला अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजा जाएगा। दोषी मुस्कान और साहिल को इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार है। अगर हाई कोर्ट सजा को बरकरार रखता है, तो वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट भी मौत की सजा पर अपनी मुहर लगा देता है, तो वे राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर कर सकते हैं। अगर राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज कर देते हैं, तो सभी कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद केस फाइल वापस मेरठ जिला अदालत में आएगी।
इसके बाद जिला जज दोनों को फांसी देने की तारीख और वारंट जारी करेंगे।हमारी व्यवस्था में सबसे क्रूर अपराधी को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। पूरा मौका दिया जाता है ताकि आप अपने बचाव या समर्थन में जो भी कहना चाहते हैं, कानूनी दायरे में रहकर पेश कर सकें; वो मौका दिया जाता है। तो, इसमें भी ऐसा ही मौका दिया गया है कि जो भी आप कहना या करना चाहते हैं, कर सकते हैं। अगर वे हाई कोर्ट में आगे अपील करना चाहते हैं, तो वे हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। तो ये सब कानूनी पहलू हैं। उन्हें ऐसा करने का पूरा हक है। इस आदेश में ये भी कहा गया है कि वे 30 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकते हैं।फिलहाल, मुस्कान और साहिल के लिए सजा के खिलाफ अपील करने का रास्ता खुला है। इसीलिए अभी ये कहना बेहद मुश्किल है कि दोनों को फांसी के फंदे पर कब भेजा जाएगा।