आज दंगों ने पूरे यूरोप को अपनी जद में ले लिया है। फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम, इटली, अल्बानिया सब जल रहे हैं। यह वो देश हैं जिन्होंने ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं दिया था। ऐसे में अमेरिकी डीप स्टेट एक्टिव हो गया और इन देशों में मौजूद वामपंथियों और कट्टरपंथियों को बेलगाम छोड़ दिया। फ्रांस में स्कूल ठीक करने के नाम पर आंदोलन शुरू हुआ और आज पूरा देश जल गया। आंदोलन ऐसे मुद्दों पर शुरू किए जा रहे हैं जो जनता से जुड़े हैं जिन पर जनता आसानी से विश्वास कर सके। अब स्कूल ठीक होना चाहिए इससे कौन ही इंकार करेगा।
ऐसे ही मुद्दे भारत में भी उठाए गए थे। कोशिश भारत को भी जलाने की थी। लेकिन भारत में दंगाई हार गए। इसकी एक वजह तो सनातन की ताकत है। लेकिन दंगाइयों से निपटने का भारत के पास एक और सीक्रेट है। अब कुछ यूरोपीय देश भारत के इसी सीक्रेट को चुराने या कहिए कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें इटली ने पहल की है। आपने देखा होगा कि भारत में किसी भी आंदोलन, दंगे या विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ करने वालों से ही नुकसान की पूरी वसूली करने का सख्त प्रावधान है। अब तो दंगाइयों के घर तक तोड़ दिए जाते हैं। दंगाइयों की हरकत की कीमत उनके मां-बाप चुकाते हैं।
वैसे तो भारत में प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट है। लेकिन उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल की तर्ज पर अब देश के कई राज्यों ने अपने विशेष रिकवरी ऑफ डैमेजेस कानून बना लिए हैं। अब पहली बार यूरोपीय देश इटली भी इसी मॉडल पर काम करने जा रहा है क्योंकि इटली में भी दंगे हो रहे हैं। इटली में अब नाबालिक ने तोड़फोड़ की तो उसके माता-पिता को भरपाई करनी पड़ेगी। यह इटली का योगी मॉडल है। इटली में हिंसक प्रदर्शन करने वालों को अब 5 साल तक की जेल और करीब ₹21 लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों और दुकानों में लूटपाट और आगजनी करने वालों से पैसा वसूलने की योजना बना ली है। दंगाई अगर नाबालिग है तो नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता को करनी पड़ेगी। भारत में भी दंगाइयों की करतूतों की कीमत उनके मां-बाप को चुकानी पड़ती है।
बहरहाल आपको बता दें कि दुनिया भर में वामपंथी और कट्टरपंथी हाथ मिला चुके हैं। कुछ समय पहले स्वीडन में राइट विंग सरकार को हराने के लिए मुस्लिम प्रवासियों ने वामपंथी सरकार को जमकर वोट दिए और जीता भी दिया। अब वामपंथियों और कट्टरपंथियों के निशाने पर अगला टारगेट इटली है। इटली में वामपंथी और कट्टरपंथी अमेरिकी डीप स्टेट के इशारे पर दंगे कर रहे हैं। यह सब कुछ इसलिए है क्योंकि इटली ने ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं दिया था। जॉर्जिया मेलोनी और डोन्ड ट्रंप पब्लिक मंचों पर एक दूसरे को कोस रहे हैं। वैसे अमेरिका को आंख तो भारत ने भी दिखाई थी.
लेकिन अमेरिकी डीप स्टेट भारत में सफल नहीं हो पाया क्योंकि भारत में अभी भी सनातन की ताकत है। सनातन की ताकत के आगे कोई दंगाई पनप नहीं सकता। आपने देखा होगा कि जंतरमंतर पर वामपंथियों और कट्टरपंथियों को किस तरह से सनातनियों ने दौड़ा दिया था। आप यहां पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात को याद रखिए। उन्होंने कहा था कि धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा और अगर छिड़ गया युद्ध तो बम गोला भी दागूंगा।