सोचिए [संगीत] बॉलीवुड का एक ऐसा सितारा जिसकी पहली फिल्म ने उसे रातोंरात स्टार बना दिया। लड़कियों के बीच जिसकी दीवानगी देखने लायक थी और जिसके पास एक के बाद एक ऐसी फिल्में आती रही जो अगर समय पर बन जाती और रिलीज हो जाती तो शायद बॉलीवुड के इतिहास में उसका नाम एक बिल्कुल अलग मुकाम पर लिखा जाता। यह कहानी है राहुल रॉय की। अब तेरे बिन [संगीत] जी लेंगे हम जहर जिंदगी का पी लेंगे हम। आशिकी की जबरदस्त कामयाबी के बाद राहुल रॉय के पास फिल्मों की लाइन सी लग गई थी। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ एक सुपरहिट फिल्म और उसके बाद आए उतार की कहानी नहीं है। असल कहानी तो उन फिल्मों की है जो बनते बनते रुक गई जिनकी शूटिंग अधूरी रह गई या जो डिब्बे में बंद हो गई या फिर कभी दर्शकों तक पहुंच ही नहीं पाई। अब सवाल यह है कि अगर राहुल रॉय की यह सारी फिल्में समय पर पूरी होकर रिलीज हो जाती तो क्या उनकी स्टारडम आशिकी के बाद भी उसी रफ्तार से आगे बढ़ती? क्या वो उस दौर के उन बड़े सितारों की कतार में खड़े होते जिन्होंने 90 के दशक में बॉलीवुड पर राज किया और क्या यह कहना सही है कि राहुल रॉय [संगीत] के करियर की सबसे बड़ी समस्या उनकी फिल्में नहीं बल्कि वो फिल्में थी जो दर्शकों तक पहुंच ही नहीं पाई। आज की इस स्पेशल वीडियो में हम जानेंगे राहुल रॉय की उन अनरिलीज्ड और अधूरी फिल्मों के बारे में जिनके पीछे छुपी कहानियां आपको चौंका देंगी। चाहत है तू धड़कन है मेरी आरजू है [संगीत] मेरा जिगर है हाले दिल तुझसे मैं कह नहीं पाऊं तेरे बिना [संगीत] मैं अब रह नहीं पाऊं आशिकी की बेशुमार सफलता के तुरंत बाद ही राहुल रॉय को बैक टू बैक कई फिल्मों के ऑफर आए और जिन फिल्मों को उन्होंने साइन किया उनमें से पहली फिल्म थी नादानी जिसके निर्माण की घोषणा साल 1991 में हुई थी। इस फिल्म का निर्माण वेस्टर्न प्रेजेंटेशंस के बैनर तले जिम्मी नरुला कर रहे थे और निर्देशन की जिम्मेदारी सिकंदर भारती ने संभाली थी।
राहुल रॉय के साथ फिल्म में अश्विनी भावे, ज्योतिषना सिंह और साविया जैसे कलाकारों को लिया गया था और इसका संगीत तैयार कर रहे थे नदीम श्रवण। मजेदार बात यह है कि फिल्म का मुहूर्त भी हुआ था और उस मौके पर हिंदी फिल्मों के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना साहब भी मौजूद थे। लेकिन तमाम तैयारियों के बावजूद यह फिल्म आगे नहीं बढ़ सकी और अंत में बंद हो गई। इसी साल यानी कि साल 1991 में ही राहुल रॉय की एक और फिल्म शुरू हुई। दिल में हो तुम। इस फिल्म का निर्देशन सुरेंद्र मोहन कर रहे थे और निर्माता थे जॉनी विस्की। फिल्म में राहुल रॉय के साथ नायिका के तौर पर अश्विनी भावे को साइन किया गया था। लेकिन बाद में अश्विनी भाभी ने फिल्म छोड़ दी और यह मौका रवीना टंडन के पास चला गया। लेकिन यह प्रोजेक्ट भी आगे चलकर डिब्बा बंद हो गया। साल 1991 में ही राहुल रॉय और नीलम को लेकर दिव्या नाम की एक फिल्म की घोषणा हुई थी। लेकिन यह फिल्म भी नहीं बन पाई थी। वीडियो में आगे बढ़ते हुए बात करते हैं एक ऐसी फिल्म की जो राहुल रॉय के करियर की सबसे चर्चित अनरिलीज्ड फिल्मों में गिनी जाती है और इसकी घोषणा साल 1992 में हुई थी। फिल्म का नाम था दिलों का रिश्ता और इसके निर्देशक थे दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार के बालाचंद जिन्होंने [संगीत] एक दूजे के लिए जैसी कमाल के मार्मिक फिल्म बनाई थी। फिल्म दिलों का रिश्ता में राहुल रॉय के साथ अनु अग्रवाल, दीपक सराफ, अश्विनी भावे, अंजू महेंद्रू, अश्विन कौशल और लक्ष्मीकांत बेरडे जैसे अन्य कलाकारों को लिया गया था। फिल्म का संगीत तैयार कर रहे थे बप्पी लहड़ी और इसके निर्माता थे आरसी शर्मा लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म भी पूरी नहीं हो पाई।
असल में इस फिल्म का निर्माण भी शुरू हो गया था। लेकिन इसी दौरान निर्माता आरसी शर्मा की मृत्यु हो [संगीत] गई और मजबूरन निर्देशक के बालाचंद्र को फिल्म का निर्माण रोकना पड़ा। साल 1992 में ही राहुल रॉय को लेकर दिल दिया चोरी-चोरी नामक एक फिल्म की शुरुआत हुई जिसमें उनके साथ थे करिश्मा कपूर, शक्ति कपूर, किरण कुमार और परेश रावल। इस फिल्म के निर्माता थे एनआर पचसिया। निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली थी रवि राय ने तथा संगीत तैयार कर रहे थे जतिन ललित। इस फिल्म को लेकर यहां यह जानना बेहद दिलचस्प है कि उस समय तो यह फिल्म नहीं बन पाई लेकिन आगे चलकर साल 1994 में इसे एक टेलीविजन फिल्म के रूप में बनाया गया जिसका नाम है हंसते खेलते। [संगीत] इस बार फिल्म की कास्टिंग भी बदल गई। राहुल रॉय तो फिल्म का नायक बने रहे लेकिन उनके साथ लीजारे, असरानी, राकेश बेदी, दिनेश सिंघू और अनंत महादेवन जैसे कलाकारों को लिया गया। फिल्म के निर्माता और निर्देशक भी बदल गए। जहां इसके निर्देशक रहे भरतंगाचारी और निर्माता बने फिरोज नाडियाडवाला। साल 1992 में ही राहुल रॉय और मिथुन चक्रवर्ती को लेकर वज्र नामक एक फिल्म की घोषणा हुई। जहां इनकी नायिकाओं के रूप में क्रमशः रवीना टंडन और शिल्पा शिरोड़कर को लिया गया। फिल्म का संगीत तैयार कर रहे थे आनंद मिलिंद और इसका निर्माण व निर्देशन कर रहे थे हैरी बावेजा। [संगीत] जिन्होंने आगे चलकर दिलवाले और दिलजले जैसे कमाल की फिल्में बनाई। खैर, साल 1992 में मिथुन और राहुल रॉय के जोड़ी की वज्र नामक यह फिल्म बन जाती तो यह भी दिलवाले और दिलजले जैसे ही लोकप्रियता हासिल करती। साल 1992 में ही घोषित फिल्म प्रेमा अभिषेक भी राहुल रॉय के उन प्रोजेक्ट्स में शामिल रही जो कभी दर्शकों तक पहुंच नहीं पाई। प्रेमा अभिषेक नाम की इस फिल्म का निर्देशन कर रहे थे केवी राजू और संगीत की जिम्मेदारी संभाली थी एक बार फिर से आनंद मिलिंद की [संगीत] जोड़ी ने। पूर्णिमा आर्ट्स के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म में राहुल रॉय के साथ शांतिप्रिया, रवििशन, अनुवन और देवराज जैसे कलाकारों को लिया गया था। जानकारी के लिए बता दूं कि इस फिल्म में रवििशन वाले रोल के लिए पहले अभिनेता अक्षय आनंद को लिया गया था। लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म भी कभी पूरी नहीं हो पाई और अंत में डिब्बा बंद हो गई। इसी वर्ष यानी कि 1992 में ही राहुल रॉय को लेकर मलिका नाम की एक फिल्म की शुरुआत हुई जिसमें उनके साथ मीनाक्षी शेषादरी, सोनू वालिया, परेश रावल और मनोहर सिंह जैसे अन्य कलाकारों को लिया गया था। डीबी मूवी इंटरनेशनल के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म का निर्माण व निर्देशन कर रहे थे दीपक बक्शी और इसमें संगीत होने वाला था नदीम श्रवण का। लेकिन अन्य फिल्मों की तरह यह प्रोजेक्ट भी डिब्बा बंद हो गया और इसकी घोषणा के बाद राहुल रॉय के फैंस सिर्फ इसका इंतजार करते रह गए। अब चलते हैं राहुल रॉय को लेकर साल 1993 में शुरू की गई एक बेहद ही महत्वाकांक्षी मल्टीस्टारर
फिल्म जबजब दिल मिले की तरफ। इस फिल्म [संगीत] में राहुल रॉय के साथ रवीना टंडन, रोनीत रॉय, नगमा, सदाशिव अमरापुरकर और प्रेम चोपड़ा आदि को लिया गया था। इस फिल्म का निर्माण कर रहे थे तुषेंद्र पाल सिंह और निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली थी अवतार भोगल सिंह ने तथा संगीत दे रहे थे आनंद मिलिंद। इस फिल्म की खास बात यह थी कि यह सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रही बल्कि इसकी शूटिंग काफी आगे बढ़ चुकी थी और दुर्भाग्य से यह प्रोजेक्ट भी रिलीज़ तक नहीं पहुंच सका। इसके अगले साल साल 1994 में Zee टीवी ने राहुल रॉय और नीलम को लेकर एक अनटाइटल्ड फिल्म की घोषणा की जिसका निर्माण कर रहे थे प्रसन्न कपूर और निर्देशन सौंपा गया था विक्रम भट्ट [संगीत] को। मजेदार बात यह रही कि यह फिल्म ना तो कभी पूरा हो पाई और ना इसका नाम कभी फाइनल किया जा सका। खैर अगले साल 1995 में राहुल रॉय को लेकर एक और फिल्म अनाउंस हुई जिसका नाम रखा गया था टाडा। इसमें उनके साथ बतौर नायिका सुमन रंगनाथन भी मौजूद थी और निर्देशन संभाली थी मुन्ना रिवी ने और यह फिल्म भी महज एक घोषणा बनकर रह गई। इसी साल यानी कि साल 1995 में ही जिगरवाला नाम के एक और प्रोजेक्ट ल्च किया गया जिसमें राहुल रॉय के साथ कमल सदाना, ऋतू शिवपुरी, सुमन रंगनाथन, राण साहब, किरण कुमार, रजा मुराद, रीमा लागू, दिलीप ताहिल और शक्ति कपूर जैसे कलाकारों को लिया गया था। यह फिल्म प्रॉमिस प्रोडक्शनंस के बैनर तले बन रही थी। जिसका निर्देशन करने वाले थे दिलीप गुलाटी। लेकिन यह फिल्म भी शेल्वड हो गई। अगले ही साल 1996 में सेना [संगीत] नाम की एक फिल्म की घोषणा की गई। जिसकी जड़े साल 1992 में रोपित हुई थी। असल में इस फिल्म का पहला वर्जन साल 1992 में शुरू किया गया था।
उस समय इसमें आदित्य पंचोली, अक्षय कुमार, अजय देवगन और सुनील शेट्टी जैसे कलाकार थे तथा इसका निर्देशन महेश भट्ट, संगीत आनंद मिलिंद और निर्माण मुकेश दुग्गल कर रहे थे। लेकिन किसी कारणवश यह वर्जन कभी आगे नहीं बढ़ सका। फिर साल 1996 में इसे प्रोजेक्ट को नए कलाकारों के साथ दोबारा शुरू किया गया। इस बार राहुल रॉय के साथ अय्यूब खान, माणिक बेदी, मोनिका बेदी, सिमरन, सुरेश ओवरॉय, कुलभूषण खरवंदा और मोहन जोशी जैसे कलाकारों को लिया गया। साथ ही इसका निर्देशन करने वाले थे शाहनवाज अहमद। निर्माता थे मुकेश दुग्गल और संगीत की जिम्मेवारी ललित सेन को दी गई थी। यहां तक कि इस दूसरे वर्जन के लगभग 10 रील्स भी शूट कर लिए गए थे। लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया और अंततः फिल्म डिब्बा बंद हो गई। यानी [संगीत] सेना एक ऐसी फिल्म थी जिसे राहुल रॉय के दौर में दो अलग-अलग कास्टिंग और दो अलग-अलग वर्जनंस के साथ बनाने की कोशिश हुई। लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हो पाए। खैर इसके तकरीबन 2 सालों बाद साल 1998 में राहुल रॉय एक और फिल्म से जुड़े जिसका शुरुआती नाम तो सात सिकंदर था लेकिन बाद में उसे बदलकर मर्डर इन खंडाला कर दिया गया। इसमें राहुल रॉय के साथ मिलिंद गुणाजी, सुदेश बेरी, [संगीत] कमलजीत, दिव्य कुमार, शिवांगी चौधरी, ज्योति राणा और किरण कुमार जैसे अन्य कलाकारों को भी लिया गया था। फिल्म का निर्माण अवतार अहलवालिया और पूनम शर्मा कर रहे थे तथा निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली थी रवि कथूरिया ने। साथ ही दिलीप चंदन समीर सेन [संगीत] इसका संगीत देने वाले थे। बताता चलूं कि इस फिल्म के पांच रील्स भी शूट कर लिए गए थे। लेकिन बाद में किसी कारणवश शूटिंग रुक गई और सदा के लिए डिब्बा बंद हो गई। इसके अगले साल 1999 में राहुल रॉय केशव नामक एक दक्षिण भारतीय फिल्म से जुड़े जिसमें इनके साथ दक्षिण [संगीत] भारतीय स्टार्स शरद कुमार और रंभा शामिल थी। रिपोर्ट्स की मानें तो राहुल रॉय को इसमें विलेन की भूमिका के लिए लिया गया था। लेकिन यह फिल्म भी शेल्व हो गया। इसके अगले ही साल 2000 में राहुल रॉय श्री स्वामी समर्थ नाम की एक फिल्म में नजर आने वाले थे। जिसमें उनके साथ सुरेंद्र पाल, भाग्यश्री, कश्मीरा शाह, जॉनी लीवर, आलोकनाथ, रीमा लागू, मोहन जोशी और अनूप जलोटा जैसे कलाकार भी साइन किए गए थे। साथ ही निर्देशन अशोक गायकवाड़ का होने वाला था और निर्माण की जिम्मेदारी डीडी, अशोक कांबले और विलास चौहान संभाल रहे थे। लेकिन यह फिल्म भी राहुल रॉय के सहयोग फिल्मों की सूची में चली गई।
2000 दशक में भी राहुल रॉय के अनरिलीज्ड फिल्मों का सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। साल 2003 में उनका नाम फर्क नाम की एक फिल्म से जुड़ा जिसमें उनके साथ प्रियांशु चटर्जी, सोनाली कुलकर्णी और शाहनवाज खान जैसे अन्य कलाकार भी लिए गए थे। फिल्म का निर्देशन करने वाले थे दीपक आनंद लेकिन यह प्रोजेक्ट भी रिलीज नहीं हो सका और अंत में सेल्फड्ड हो गया। साल 2008 में घोषित वफा नाम की एक अन्य फिल्म से भी राहुल रॉय का नाम जुड़ा जिसमें उनके साथ रजत बेदी, मुकेश तिवारी और मून दास जैसे अन्य कलाकार भी मौजूद थे। [संगीत] लेकिन यह फिल्म भी रिलीज़ नहीं हो पाई। राहुल रॉय के अनरिलीच फिल्मों की सूची में एक और बेहद महत्वपूर्ण नाम है खिलौना का। दरअसल महेश भट्ट के प्रोडक्शन में बनने वाली यह फिल्म राहुल रॉय के करियर की बड़ी उम्मीदों में शामिल थी जो केविन कोस्टनर की अंग्रेजी फिल्म रिवेंज का बॉलीवुड रूपांतरण थी। लेकिन यह प्रोजेक्ट भी सेल्फड्ड हो गया। यह जानना भी बेहद रोचक है कि मिड 90ज में निर्माता सुधाकर बोकाड़े ने मेरा जूता है जापानी नाम की एक फिल्म बनाने की योजना बनाई थी। राहुल रॉय को इसका निर्देशन करना था और इसमें संजय दत्त तथा जेकी श्रॉफ जैसे कलाकार जुड़े हुए थे। लेकिन इसके निर्माता सुधाकर बोकाड़ी की आकस्मिक मृत्यु के बाद यह फिल्म भी आगे नहीं बढ़ सकी। इस तरह से देखा जाए तो पता चलता है कि राहुल रॉय के मामले में सिर्फ एक दो फिल्म नहीं रुकी बल्कि एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट्स उनके हाथ से निकलते चले गए। अगर यह सभी फिल्में पूरी हो जाती तो संभवत राहुल रॉय आज शाहरुख [संगीत] खान, सलमान खान और आमिर खान के बराबर के स्टारडम रखते या उनसे ज्यादा भी। तो यह थी राहुल रॉय के अनरली फिल्मों पर हमारी एक विशेष प्रस्तुति। उम्मीद है कि यह आपको बेहद रोचक लगी होगी। अगर वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक व शेयर भी कर दें तथा ऐसे [संगीत] ही अन्य दिलचस्प वीडियोस की नोटिफिकेशन पाने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकॉन में ऑल का बटन दबाना ना भूलें। धन्यवाद।