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प्रेमानंद के शिष्य की मौ;त पर संतों ने बताई अंदर की बात, मचा तह;ल!का !

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मथुरा में प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य की होती है और मतलब अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि है कि ये है। अभी पुलिस जांच कर रही है। रसिक दुलारी दीपक लोधी ये नाम है और उम्र बस 25 वर्ष बताई गई है। जिसको लेकर अयोध्या में । कैसे देखते हैं महाराज जी कैसे देख रहे हैं। और जो भी है महाराज जी कैसे आप लोग देख रहे हैं मथुरा में जो भी हुआ प्रेमानंद महाराज जी शिष्य के साथ देखिए पूज्य प्रेमंद जी महाराज जी के शिष्य के साथ जो भी दुर्घटना या जो भी घटना घटी है ये दुर्भाग्यपूर्ण है निंदनीय है पीड़ादायक है निश्चित रूप से वहां प्रशासन पूर्ण रूप जांच कर रही है

रिपोर्ट के हिसाब से ज्यादा सारे तथ्य साक्ष्यों का जो है संकलन करके और ऐसा तो लग रहा है प्रथम दृष्ट्या पुलिसों को जो यह शरीर से रक्तपात होने से जो उनकी हुई है तो निश्चित रूप से जांच का विषय है। पुलिस प्रशासन जांच कर रही है। जांच करके निष्पक्ष जो है अपने जो है जांच के बिंदुओं तक पहुंच के अगर कोई दोषी है तो उसके ऊपर कारवाई करे। कहीं ना कहीं आरोप कि उनको तीन दिन से मिलने में नहीं दिया गया था। नहीं देखिए परिवार का आरोप मिथ्या आरोप है। कोई भी संत बन जाता है विरक्त परंपरा में आ जाता है तो परिवार से उसका कोई मतलब नहीं रहता। वो स्वयं में प्रबुद्ध व्यक्ति था। स्वयं में बिल्कुल जो है ऐसा कोई अबोध व्यक्ति नहीं था। अज्ञानी नहीं था।

वह स्वयं में अपने आप को जो है समझने वाला व्यक्ति था। तो स्वयं में व्यक्ति परिवार से अवॉयड करता। परिवार के लोगों से उसका मिलनाजुलना नहीं रहता। इसलिए नहीं मिलते थे। लेकिन वो लोग आरोप मिथ्या आरोप लगा रहे हैं। उनके आरोप में कोई दम नहीं। आप सर कैसे देख रहे हैं? जो भी कहा जाए इसको मतलब अभी जांच का विषय जांच चल रहा है। देखिए स्वामी प्रेमानंद जी के शिष्य की जो हुई तो बहुत ही घोर निंदनीय इसका हम निंदा करते हैं और यह जांच का विषय है कि उन्होंने आत्महत्या किया है या उनको उनकी हत्या की गई है क्योंकि उनके साथ-साथ ये भी है कि उनके परिवार के लोग भी मिलना चाहते थे तो उनके परिवार के लोगों को तो मिलने देना चाहिए और ये जांच का विषय है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस पर जो है जो भी दोषी पाया जाए उस पर कठोर से कठोर कारवाई की जाए जिससे इस तरह की वारदात और घटना ना हो सके। महाराज जी संत हैं।

मथुरा में है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री एक संत है योगी आदित्यनाथ और एक संत मुख्यमंत्री होने के बाद भी अगर संत आत्महत्या कर रहा है या उसकी हो रही है तो ये जांच का विषय है और पुलिस ने अभी रिपोर्ट दिया है पोस्टमार्टम की। उसके प्राइवेट आज के और आज के 50 साल पहले में एक वातावरण था। 50 साल पहले जब कोई संत रहता था उसके लिए एक संत निवास रखा जाता था। और उस संत निवास में 25 50 60 70 संत उसमें सामूहिक रूप रहते थे। तो कोई विकार नहीं होता था। कोई प्रकार की कामता नहीं होती थी। कोई प्रकार का ऐसी स्थिति नहीं होती थी।

कोई मत जब से ये अलग एसी बना के कमरा ला जाने लगे काजू किशमिश बदाम खा करके मौज मस्ती कर करके और तब से दुर्घटनाएं। देखिए मैं बात स्पष्ट बोलता हूं। ये दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। कारण है कि संत महात्माओं की जो है एकदम या तो प्रकृति में वातावरण में रहे या तो जंगल में रहे या तो ऐसे जगह रहे जहां किसी से मुलाकात नहीं हुई। जब इनका वैभव बढ़ेगा जब इनका वैभव बढ़ेगा और वैभव के साथ-साथ जब इनकी व्याकुलता बढ़ेगी तो कोई ना कोई घटनाएं घटित हो ही और चोला का मतलब कुछ नहीं है। रावण भी कहीं चोला पहन करके मां जान के ले गया था। तो चोले की बात मत मत कहिए। निश्चित है। लेकिन योगी आदित्यनाथ के समय में मुख्यमंत्री एक संत होने के नाते अगर संतों की ऐसी घटनाएं घट रही हैं। या तो वो किया या तो उसको मारा गया। दोनों चीजें मेक है। इसकी सही जांच हो और दूध का दूध और पानी का पानी अस्पष्ट होना चाहिए। आप कैसे देख रहे हैं महाराज? जी ऐसी स्थिति इतनी बड़ी घटना।

देखिए बहुत गहरी साजिश की ब आ रही है। इसमें विश्व प्रसिद्ध सत्य सनातन धर्म के प्रचारक विचारक और जिनके मार्ग जिनके द्वारा बताए गए मार्ग पर आज संपूर्ण सनातन सहित विश्व भर के मानव मात्र प्रशस्त हो रहे हैं। ऐसे परम पूज्य संत श्री स्वामी जो है प्रेमानंद जी महाराज जी के शिष्य की हत्या यह दृतांत और संपूर्ण हिंदू समाज को विभ कर देने वाली घटना है और यह चिंताजनक है और मैं समझता हूं कि सनातन की प्रतिष्ठा को और उसकी बढ़ती ख्याति को किसी को बर्दाश्त नहीं हो रहा था और यह संत प्रेमानंद जी महाराज जी के खिलाफ इस प्रकार की साजिश रची गई है क्योंकि मैं समझता हूं कि सनातन में कोई इस प्रकार से कुकृत करने की हिम्मत नहीं करेगा कि पोस्टमार्टम के रिपोर्ट आने बाकी हैं और बहुत सारी अभी मिथक टूटने वाली है। आप देखिएगा कि कितने बड़े साजिश के तहत इस प्रकार की घटना अह ना सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में कहीं ना कहीं संतों के साथ घटित करवाई जा रही हैं। अथवा घटित हो रही हैं। यह दुखद व दुर्भाग्यजनक है।

हम सभी लोग इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। और जो भी लोग इसमें दोषी हो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो और संत प्रेमानंद जी महाराज जैसे परम विचारक को जिनके बताए हुए मार्ग पर विश्व भर के हिंदू मानव मात्र आज प्रशस्त हो रहे हैं। उनको जो बदनाम करने का ये कुछ चक्र और यह साजिश रची गई है। क्योंकि आप देखिएगा यह पहली ऐसी घटना है। संत प्रेमानंद जी महाराज जी के स्थान गुरु कृपा कुंज में जहां उनके शिष्य परिशिष्य रहा करते थे उस रूम में तो यह हमें जो समझ में आती है ये एक साजिश है एक घटना जो बनाया हुआ है अभी इस पे पर्दाफाश होना है उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज जी के नेतृत्व में जब निष्पक्ष जांच करेगी और पोस्टमार्टम और जो फॉरेंसिक लैब में जो तमाम जांच गए हैं उसके रिपोर्ट आएंगे तो स्थिति स्पष्ट होगी और तमाम मतंतर मजहब के जो इस प्रकार के कुचक्र रचे जा रहे हैं

सनातन को बदनाम करने साधु संतों को बदनाम करने के गुरु शिष्य की परंपरा को दूषित और धूमिल करने की वो सारे स्पष्ट होकर समाज के सामने आएंगे और एक भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा। मैं समझता हूं जब जो आरोपी चिन्हित कर लिए जाएंगे तो माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज जी के शासन प्रशासन और उनके कड़े नेतृत्व में ऐसे लोगों के ऊपर कठोर से कठोरतम कार्यवाही संपादित की जाएगी। महाराज जी आप भी एक संत हैं। परिवार से नहीं मिलने दिया जा रहा है। ये भी एक चर्चा का विषय वहां चल रहा है कि वो संत है उनके परिवार से। क्या यह है कि आप भी संत होने के बाद आप अपने परिवार से मिलते हैं? देखिए यह निजता की बात होती है। जब कोई संत हो जाता है तो अपने घर परिवार को एक संकीर्ण दायरा को त्याग कर और वसुध कुटुंबकम की धारणा से विश्व को अपना परिवार मान के वो गुरु के शरण में जाता है। गुरु की शरणागति में जाता है और उनकी देखरेख में वो अपनी आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ करता है। तो इस दौरान कोई परिवार से मिलने आ रहा है।

यह बहुत सार्वजनिक नहीं होता है। उनकी क्या बातें किससे हो रही हैं ये बहुत सार्वजनिक नहीं हो पाता है। तो वो क्या आरोप लगा रहे हैं? सत्य है, यथार्थ है, निरर्थक है। इस पर हम बहुत बात नहीं कर सकते हैं। किंतु जो घटना घटित हुई है, वह संपूर्ण हिंदू समाज को विभत्स कर देने वाली है। यह एक परिवार की घटना नहीं हो सकती है। यह एक दीपक लोधी नाम के किसी व्यक्ति की घटना नहीं हो सकती। यह संपूर्ण संत समाज के हत्या की साजिश रचने का प्रयास किया गया है। एक संत को निर्ममता पूर्वक मारने की घटना घटित करवाई गई है। और इसमें क्या तथ्य है? ये अभी रिपोर्ट आने बाकी हैं। वो संपूर्ण रूप से आ जाए तब हम कुछ हम आप चाहे जो भी इस पर खुलकर कुछ बात कर सकते हैं। किसी को ऐसे सीधे उंगली उठाना एक संत को बदनाम करना एक संत की हत्या पर राजनीति करना साजिश करना अपनी लोकप्रियता के लिए कुछ भी आबाऊ व बक देना ये उचित बात नहीं है। यह बहुत बड़ी घटना है और बहुत विधस्य कर देने वाली घटना है। महाराज जी संत के हिसाब से जैसे फैमिली के साथ जुड़े हुए आप कह रहे थे कितने साल से देखिए अगर इसका वैदिक लिया जाए तो आदि शंकराचार्य जब सन्यास लेने जा रहे थे और जब मां के पास पहुंचे तो मां ने कहा कि सन्यास आपका तभी सफल होगा जब आप मुझे नहीं छोड़ेंगे और आदि शंकराचार्य जो हमारे आदि महापुरुष हैं वो भी अपनी मां से त्याग नहीं किए वो भी अपनी मां से अलग नहीं हुए। हमारे सन्यास धर्म में भी लिखा गया है। मैं खुद स्वामी जी स्वामी हूं। जब सन्यास लिखा गया है तो सन्यास में आया है कि आपको मां मिल जाए तो मां के चरणों को आप प्रणाम कीजिए। पिता को भले ना प्रणाम कीजिए लेकिन मां को प्रणाम कीजिए।

तो कोई कितना बड़ा बैरागी हो जाए, कोई कितना बड़ा संत हो जाए लेकिन अगर मां-बाप उनके सामने आते हैं तो मां के सामने संत बैरागी को तयत होना चाहिए। ये हमारे आदगुरु शंकराचार्य की परंपरा है। हमारे सन्यास में भी है। अगर मां-बाप से नहीं मिलने दिया जा रहा है। इसकी भी जांच होनी चाहिए कि मां-बाप से उनको क्यों नहीं मिलने दिया गया। लेकिन एक बड़े संत है वो मतलब प्रेमानंद प्रेमानंद महाराज जी उनका पूरा पूरा दुनिया उनकी प्रेमानंद प्रेमानंद के ऊपर कोई आक्षेप नहीं है लेकिन चाहे कोई कितना उच्च का महात्मा हो जाए हमारे सन्यास में आज भाई आदि शंकराचार्य में लिखा है कि मां आज को प्रणाम करना है प्राणा तो नहीं करना है आदि शंकराचार्य ने अपने मां का दास संस्कार तक किया था आदि शंकराचार्य अपने मां का दास संस्कार तक किया था अंत में आदि शंकराचार्य ने किया था तो माता पिता अगर सामने आ जाए तो कोई ऐसी विषम पस्ती नहीं होनी चाहिए कि वो संत से नहीं मिल सकता है। मिलना चाहिए। ये हमारी परंपरा में है और ऐसा लोगों ने किया है। निश्चित तौर से क्यों नहीं मिलने दिया गया है?

ये उनका राज का विषय है। लेकिन मैं कह सकता हूं अगर माता-पिता आ जाए तो संत को मिलना चाहिए क्योंकि माता-पिता सर्वोपरि होता है। कोई साधारण व्यक्तित्व नहीं होता है। महाराज जी आप कैसे देख रहे हैं जैसे परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा हो। लेकिन प्रेमानंद महाराज जी एक ऐसे महाराज जिनकी वाणी सभी सुनना चाहते हैं। उनके सब फॉलो अप करते हैं। अधिकतर उनको फॉलो करते हैं। देखिए प्रेमानंद जी महाराज बहुत ही उच्च कोटि के संत है। उनको जो है भारत ही नहीं पूरे विश्व उनका सम्मान करता है और उनके कथन अनुसार उनका अनुसरण करता है। तो प्रेमानंद जी तो में कोई किसी भी तरह के कोई आरोप प्रत्यारोप सोचना भी जो व्यर्थ है। लेकिन जो भी लोग उनके परिवार के लोग आ रहे हैं मिलने के लिए वो संत थे। लेकिन उनको मिलने देना चाहिए क्योंकि परिवार के लोग माता-पिता ही सबसे पहला गुरु माने जाते हैं। तो वो वो भी संत सर्वे भवंतु सुखना के दृष्टिकोण से भी उनको चाहिए था कि उनके परिवार के जो भी लोग आ रहे हैं उनको मिलने देना चाहिए और यह जांच का विषय है और जांच जो है होने के बाद पता चल जाएगा कि दोषी जो भी है उसके ऊपर कारवाई होनी चाहिए।

महाराज जी आप भी यहां पर अयोध्या में हैं। प्रेमानंद महाराज जी को आप भी सुनते होंगे। उनके वो शिष्य हैं। मतलब उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी को या समझा नहीं या तो सोचा नहीं या तो फिर उनके साथ कुछ देखिए पूज्य प्रेमानंद जी महाराज आज करोड़ों-करोड़ों युवाओं के जो है जीवन को परिवर्तित करने का काम किए। आज करोड़ों करोड़ों सनातनी भारतवर्ष में नहीं अपितु पूरे विश्व में उनकी बातों को सुनकर के अपने जीवन को एक सतमार्ग में जो है प्रवेश कराने का काम करता है। बात यह है कि परिवार के लोगों का जो आरोप है वो मिथ्या इसलिए मैं कह रहा हूं कि वह स्वयं में मोबाइल रखते थे। उनके जो है कमरे में मोबाइल पाया गया तो क्या उनके जो है दुर्भाष यंत्र से क्या वार्तालाप नहीं होती थी? अगर वह व्यक्ति स्वयं वार्तालाप नहीं करना चाहता चाहता है तो उनकी व्यक्तिगत मर्जी है ना कि वह प्रेमानंद जी से लेना देना है।

प्रेमानंद जी क्यों कहेंगे कि आप मिलो या ना मिलो यहां इस प्रकार का कोई वहां पर आरोप मतलब किसी प्रकार का प्रतिबंध वहां नहीं है। परिवार बोल रहा है तो स्वयं में उनके उन्हीं के बातों से उन्हीं के परिवारों के बातों से मैं ही बता रहा हूं कि जब ये पूज्य जो महाराज जी के जो शिष्य थे उनके पास मोबाइल था कमरे में मोबाइल पाया गया है। वो डीवी डीवीआर उसको जो है तमाम जो है जांच कर रहे हैं और तमाम मोबाइल के भी जांच जो है कॉल डिटेल खला जा रहा है कि किन-किन लोगों से इनकी वार्तालाप होती थी। उनके माताजी का जो आरोप है या उनके भाई का जो आरोप है निराधार है।

इसलिए कि अगर यह व्यक्ति बात नहीं करना चाहता क्या किसी से जबरदस्ती आप बात कराओगे? ये तो कोई जबरदस्ती बात तो करा नहीं सकता। उसकी स्वेच्छा है। उन्होंने अपने जीवन में वैराग वैराग जीवन अपनाया है। तो वह बात करना चाहेंगे तो बात कर सकते हैं। उनकी अगर भावना है परिवार के प्रति तो कोई जो है ही संत रोकता नहीं है ना कोई प्रतिबंधित करता है। उनके ऊपर स्वेच्छा की बात है। महाराज जी जो संत के साथ ऐसा हो रहा है तो आप संत हैं। क्या ऐसा होना उचित है कि नहीं? नहीं बिल्कुल नहीं बहुत गलत है और संपूर्ण संत समाज अभी तो हिंदू समाज के लिए चिंताजनक है। आप देखिए ना कि इस इतनी विभस दुरतांत दुर्घटना मैं नहीं समझता कि कोई हिंदू इस प्रकार से करेगा।

साधु संत तो बहुत दूर की बात है। एक साधु की हत्या करना और उसके बाद उसके गुप्तांगों को काट लिए जाना ये बहुत दुर्तांत और विभक्त कर देने वाली घटना है। मैं तो मान ही नहीं सकता। बिल्कुल जांच का विषय इसीलिए हम स्पष्ट नहीं कह रहे हैं। किंतु इसमें मतमतांतर मजहबियों के बहुत बड़े षड्यंत्र और कुचक्र दिखाई देते हैं। आप देखिए ना कि पूरे विश्व में सनातन की जिस प्रकार से ख्याति प्रतिष्ठित हो रही है। परम पूज्य संत प्रेमानंद जी महाराज जी के नेतृत्व में और उनके बहुत विशिष्ट वैरागी संत हैं। बहुत प्रतिष्ठित संत हैं। बहुत तपस्वी, ज्ञानी, वैरागी, ध्यानी, योगी, साधक जो भी उनके शिष्य हैं वो अपने आप में स्वयं प्रतिष्ठित थे। वो इस प्रकार से घटना नहीं करेंगे। और मैं समझता हूं कि यह भी स्पष्ट होगी। ये बातें स्पष्ट होंगी कि आखिर क्या बात थी कि जो इस प्रकार से घटना घटित हुई गरें से क्या कोई आप में चिंताजनक है। चिंताजनक है। बहुत दुखद घटना है। वहीं जिस प्रकार से परिवार आरोप लगा रहा है कि तीन दिन पहले वो परिवार अपने उस पुत्र यानी कि दीपक लोधी के रूप में एक संत से मिलना चाहता था। इसमें ना सिर्फ गुरु कृपा कुंज और राधा केली कुंज के संतों पर संदेश और प्रश्न उठते हैं। वहीं परिवार के ऊपर भी प्रश्न तो उठते हैं ना कि आप तीन दिन पहले उस दीपक लोधी से जिसके का दबाव उस संत के ऊपर तो नहीं बनाया जा रहा था। कहीं उसके वैराग्य को छोड़ने और उसको विवाह इत्यादि बंधनों में बांधने और तमाम प्रकार के जो सामाजिक जीवन है उसमें संलिप्त करवाने जैसी बात तो नहीं की जा रही थी। यह परिवार की तरफ से भी तो परिवार को भी तो संदेह के घेरे में लिया जा सकता है कि आप 3 दिन पहले मिलना चाहते थे और तीन दिन बाद एक संत के रूप में दीपक लोधी की हत्या हो जाती है।

आखिर क्यों? कैसे? यह सवाल आपके ऊपर भी खड़े होते हैं कि आप 3 दिन पहले ही क्यों मिलना चाहते थे? तो ये उस परिवार का भी जांच करना चाहिए और जो जो लोग उन संत जी के आसपास में रहते थे उनकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। हर एक पहलू को बहुत ध्यान से देखना चाहिए। वहीं सनातन की ख्याति और प्रतिष्ठा को कहीं दूषित और धूमिल करने के लिए परम पूज्य श्री स्वामी प्रेमानंद जी महाराज जी का जो प्रतिष्ठा है और जो हर युवा हर समाज हर वर्ग के हृदय में वह बसे हुए हैं। कहीं उनकी ख्याति को तो धूमिल करने के लिए इस प्रकार का षड्यंत्र नहीं किया गया। इसकी भी जांच की जानी चाहिए।

वहीं 2027 विधानसभा चुनाव को भी ध्यान में रखते हुए यह जांच बहुत अनिवार्य है और बहुत मायने रखता है और मैं उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी महाराज जी से उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीजीपी से भी यह निवेदन करूंगा लॉ एंड ऑर्डर से भी निवेदन करूंगा कि इसे निष्पक्ष जांच करके और बहुत बारीकी से हर पहलू पर जांच करके और जो भी दोषी हो जो भी अपराधी हो चाहे वो गुरु कृपा कुंज चाहे वो राधा केली कुंज या उसके परिवार के जो भी लोग दोषी हो उसके उनके साथ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए उन्हें कड़ी कड़े से कड़े कानून के तहत जो है उन्हें जेल के पीछे डालना चाहिए। उनके ऊपर उचित कारवाई संपादित की जानी चाहिए। महाराज जी धार्मिक नगरी है मथुरा अयोध्या भी धार्मिक नगरी है। तो धार्मिक नगरी में ऐसे करते हो रहे हैं। ऐसे नहीं होना चाहिए। ये हो रहा है दुर्भाग्यपूर्ण है।

और जब आप संपत में आ गए थोड़ा सा व्यक्ति भावना रखनी चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। अयोध्या में नाम नहीं लेना चाहते हैं। तमाम अफवाहें आप देख रहे हैं। तमाम मौज मस्ती जिंदगी के व्यतीत हो रहे हैं। तमाम पत्नी आ रही हैं। एफआईआर हो रहा है। भाग रहे हैं। षड्यंत्र हो रहा है। तो आप देख ही रहे हैं। अब अब उसको कितना स्पष्ट खोल करके कर दिया जाए। अफवाहें फैल रही है। लेकिन लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती है। लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती है।

लेकिन बिना अग्नि के धुआ नहीं निकलता है। इस पे विशेष जांच की आवश्यकता है। तो देखिए ये अयोध्या के संत है हमारे साथ जिन्होंने मथुरा में हुई एक संत की हत्या पर आपत्ति जताई है। कहीं ना कहीं शासन से यह भी उम्मीद जगाई है कि उस पे कड़ी से कड़ी जांच होनी चाहिए। जांच कमेटी बैठानी चाहिए और इसका खुलासा जल्द से जल्द होना चाहिए। जैसे कि मैं सो रहा हूं तो पिताजी को जगाना है मुझे तो वो डायरेक्ट उठाने के बजाय और हिंसा की परंपरा मेरे यहां नहीं थी सौभाग्य से तो वो क्या करते थे कि उस कमरे में आ जाएंगे या बाहर से गुजरेंगे और चौपाई बोलेंगे प्रातकाल उठ गए रघुनाथा मात पिता गुरु नाव माता कभी-कभी मैं गुस्से में उठ के अरे बाबा तो चरण स्पर्श किया और सो गया मैंने कहा मत उठाना

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